मुंबई पुलिस ने ₹72 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया, 21 राज्यों में 255 मामलों से जुड़े 6 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जाँच में सामने आया कि इन आरोपियों से जुड़े बैंक खातों पर देशभर के 21 राज्यों में 255 साइबर शिकायतें दर्ज हैं और कुल ठगी की रकम लगभग ₹72 करोड़ आँकी गई है।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
30 जुलाई को मुलुंड की एक निजी कंपनी के अकाउंटेंट को व्हाट्सएप पर एक अनजान व्यक्ति ने संपर्क किया। उस व्यक्ति ने कंपनी के मालिक की फोटो अपनी प्रोफाइल पिक्चर (डीपी) लगाकर पहचान छुपाई और खाते से ₹10 लाख ट्रांसफर करवा लिए। इस घटना के बाद मुलुंड पुलिस स्टेशन में अपराध धारा 318(4), 319(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) और 66(C)(D) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
तकनीकी जाँच से मिली बड़ी सफलता
पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के ज़रिये पता लगाया कि ठगी की रकम में से ₹5.50 लाख उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बैंक खाते में जमा हुए हैं। इसी लीड पर मेरठ से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आगे की पूछताछ के आधार पर गाजियाबाद से 1, वडोदरा से 1 और मुंबई के कांदिवली से 1 आरोपी को पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों से ₹5.50 लाख नकद और 5 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
गिरोह का तरीकाकार और विस्तार
जाँच में सामने आया कि एक आरोपी के मोबाइल से मिले 11 बैंक खातों पर देश के 21 राज्यों में 182 साइबर शिकायतें दर्ज हैं, जबकि दूसरे आरोपी के 49 बैंक खातों पर 73 शिकायतें पाई गई हैं। गिरोह के सदस्य टेलीग्राम ग्रुप के ज़रिये बैंक खाते और सिम कार्ड की खरीद-फरोख्त करते थे। पीड़ितों के मोबाइल में APK फाइल इंस्टॉल करवाकर उनके खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम मँगवाने के लिए किया जाता था।
इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर नकद निकाल लिया जाता था और उसे USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था — यह तरीका डिजिटल लेनदेन की पड़ताल को कठिन बनाने के लिए अपनाया जाता है। गौरतलब है कि क्रिप्टो-आधारित मनी लॉन्डरिंग की यह पद्धति देश में साइबर अपराध जाँच के लिए एक बढ़ती हुई चुनौती बनती जा रही है।
अधिकारियों की भूमिका और अंतरराज्यीय सहयोग
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवन भारती, सह-आयुक्त मनोज शर्मा, अपर-आयुक्त धनंजय कुलकर्णी, उपायुक्त अभयसिंह देशमुख और सहायक-आयुक्त सुदर्शन होनवडजकर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ निरीक्षक संतोष घाटेकर के नेतृत्व में की गई। इसमें उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान पुलिस का भी सक्रिय सहयोग रहा।
पुलिस की जनता से अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अनजान व्यक्ति को न दें। अनजान स्रोत से भेजी गई APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज हो रही है और डिजिटल धोखाधड़ी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं।