30 अक्टूबर 2026
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बांग्लादेश: 16 दिनों में 6 मदरसों में बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले, देशभर में आक्रोश

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बांग्लादेश: 16 दिनों में 6 मदरसों में बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले, देशभर में आक्रोश

सारांश

बांग्लादेश में महज 16 दिनों में 6 मदरसों से बच्चों के यौन उत्पीड़न के कथित मामले सामने आए — पीड़ितों में 7 साल तक के मासूम। धमकियों से दबाए गए बच्चे, गिरफ्तार शिक्षक और एक फरार आरोपी। मानवाधिकार संगठनों ने चेताया: वास्तविक संख्या और भी अधिक हो सकती है।

मुख्य बातें

8 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 के बीच बांग्लादेश के 6 मदरसों में बच्चों के यौन उत्पीड़न के कथित मामले सामने आए।
पीड़ितों में 7 वर्ष तक की उम्र के बच्चे शामिल; अधिकांश को चुप रहने की धमकी दी गई थी।
आरोपी शिक्षक एमडी ओलिउल्लाह इस्लाम और मदरसा सदस्य मोहम्मद मिजान गिरफ्तार; एमडी अब्दुल कुद्दूस शेख फरार।
धार्मिक मामलों के मंत्री काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद ने घटनाओं को 'बेहद दुखद और शर्मनाक' बताया।
मानुषेर जोन्नो फाउंडेशन ने निष्पक्ष जाँच, कानूनी कार्रवाई और सभी संस्थानों में यौन उत्पीड़न रोकथाम समितियों की माँग की।
संगठन की चेतावनी: डर और सामाजिक कलंक के कारण वास्तविक मामलों की संख्या दर्ज मामलों से कहीं अधिक हो सकती है।

बांग्लादेश में 8 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 के बीच मात्र 16 दिनों में 6 मदरसों में बच्चों के साथ कथित दुष्कर्म, दुष्कर्म के प्रयास और यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं, जिससे देशभर में व्यापक जनाक्रोश फैल गया है। पीड़ितों में 7 वर्ष तक की उम्र के मासूम बच्चे शामिल हैं और आरोप है कि कई पीड़ितों को घटनाएँ उजागर न करने की धमकी दी गई थी। ढाका, गाजीपुर, सावर, कुस्टिया और पाबना समेत कई इलाकों से ये मामले सामने आए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

गाजीपुर के गाछा इलाके स्थित दारुल हेदायाह कौमी मदरसा में शिक्षक एमडी ओलिउल्लाह इस्लाम (23) पर आरोप है कि उसने एक 8 वर्षीय छात्रावासी छात्र के साथ 10, 11 और 12 अक्टूबर की रात लगातार दुष्कर्म किया और उसे चुप रहने की धमकी दी। बच्चे ने 13 अक्टूबर को अपनी माँ को घटना बताई, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ।

पुलिस ने 22 अक्टूबर को ओलिउल्लाह और मदरसा प्रबंधन समिति के सदस्य मोहम्मद मिजान (38) को गिरफ्तार कर लिया और अगले दिन दोनों को जेल भेज दिया गया। एक अन्य आरोपी एमडी अब्दुल कुद्दूस शेख (45) अभी भी फरार बताया जा रहा है।

टोंगी स्थित कारीउल कुरान इंटरनेशनल मदरसा के शिक्षक मोसलेम अहमद (30) पर 19 अक्टूबर को पहली कक्षा में पढ़ने वाली 7 वर्षीय बच्ची के यौन उत्पीड़न का आरोप है। पीड़िता के परिवार का दावा है कि बच्ची को मारपीट की धमकी दी गई थी, जिसके चलते वह तीन दिन तक मदरसे नहीं गई और बाद में माता-पिता को घटना बताई।

सावर के एक मदरसे के संचालक और प्रधान शिक्षक अब्दुल बारी (50) पर 21 अक्टूबर को 13 वर्षीय छात्रावासी छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप है। आरोपी ने कथित तौर पर छात्रा को जान से मारने की धमकी भी दी थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के धार्मिक मामलों के मंत्री काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद ने इन घटनाओं को 'बेहद दुखद और शर्मनाक' बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। हालाँकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि केवल बयानों से काम नहीं चलेगा — ठोस संरचनात्मक सुधार ज़रूरी हैं।

मानवाधिकार संगठनों की माँग

ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन मानुषेर जोन्नो फाउंडेशन ने निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रभावी यौन उत्पीड़न रोकथाम समितियों के गठन की माँग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि वास्तविक मामलों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि डर, सामाजिक कलंक और दबाव के कारण अनेक बच्चे शिकायत दर्ज नहीं कराते।

संगठन की कार्यकारी निदेशक शाहीन अनाम ने कहा, 'किसी भी बच्चे को उन लोगों से डरना नहीं चाहिए जो उसकी देखभाल और शिक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। जब कोई बच्चा उत्पीड़न की शिकायत करता है, तो हमें उसकी बात सुननी चाहिए, तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।' उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे ऐसे मामलों में खुलकर सामने आएँ।

आम जनता पर असर

इन घटनाओं के बाद कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए, आरोपित शिक्षकों पर हमले किए गए और तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएँ भी सामने आईं। पीड़ितों में लड़के और लड़कियाँ दोनों शामिल हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में बच्चों के खिलाफ अपराधों पर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्या होगा आगे

मानवाधिकार संगठनों ने माँग की है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए और प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में यौन उत्पीड़न रोकथाम समितियाँ गठित की जाएँ। सरकार के वादों की असल परीक्षा इन माँगों पर अमल से होगी — और इस मामले में बांग्लादेश का बच्चों के अधिकारों का रिकॉर्ड जाँच के दायरे में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक प्रणालीगत खामी की कहानी कहती हैं — जहाँ धार्मिक शैक्षणिक संस्थानों पर निगरानी की संरचना अभी भी बेहद कमज़ोर है। मंत्री का 'शर्मनाक' वाला बयान सहानुभूति तो जताता है, लेकिन जवाबदेही का ढाँचा खड़ा नहीं करता। मानुषेर जोन्नो फाउंडेशन की यह चेतावनी — कि वास्तविक संख्या दर्ज मामलों से कहीं अधिक है — उस खामोशी की ओर इशारा करती है जो धमकी, डर और सामाजिक दबाव से पैदा होती है। असली सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश सरकार मदरसों के लिए वही जवाबदेही मानक लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति रखती है जो किसी भी अन्य शैक्षणिक संस्थान पर लागू होते हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश के मदरसों में यौन उत्पीड़न के मामले कब और कहाँ सामने आए?
8 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 के बीच 16 दिनों में बांग्लादेश के 6 मदरसों में बच्चों के साथ कथित दुष्कर्म, दुष्कर्म के प्रयास और यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए। ये घटनाएँ गाजीपुर, ढाका के सावर, टोंगी, कुस्टिया और पाबना समेत कई इलाकों में हुईं।
इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
गाजीपुर के दारुल हेदायाह कौमी मदरसा मामले में पुलिस ने 22 अक्टूबर को शिक्षक एमडी ओलिउल्लाह इस्लाम और मदरसा प्रबंधन सदस्य मोहम्मद मिजान को गिरफ्तार कर अगले दिन जेल भेज दिया। एक अन्य आरोपी एमडी अब्दुल कुद्दूस शेख अभी भी फरार बताया जा रहा है।
मानुषेर जोन्नो फाउंडेशन ने क्या माँगें रखी हैं?
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन मानुषेर जोन्नो फाउंडेशन ने निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सभी शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न रोकथाम समितियों के गठन की माँग की है। संगठन ने यह भी चेताया है कि वास्तविक मामलों की संख्या दर्ज मामलों से कहीं अधिक हो सकती है।
बांग्लादेश सरकार ने इन घटनाओं पर क्या कहा?
धार्मिक मामलों के मंत्री काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद ने इन घटनाओं को 'बेहद दुखद और शर्मनाक' बताया और कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। हालाँकि, मानवाधिकार संगठनों ने केवल विरोध प्रदर्शन और बयानों को अपर्याप्त बताते हुए ठोस निगरानी तंत्र की माँग की है।
इन घटनाओं में पीड़ित बच्चे किस उम्र के हैं और उन्हें कैसे चुप कराया गया?
पीड़ितों में 7 वर्ष तक की उम्र के बच्चे शामिल हैं और इनमें लड़के व लड़कियाँ दोनों हैं। आरोप है कि कई बच्चों को घटनाएँ उजागर न करने के लिए मारपीट और जान से मारने तक की धमकियाँ दी गईं, जिसके कारण बच्चे दिनों तक चुप रहे।
राष्ट्र प्रेस
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