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मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: CDR, SDR और लोकेशन डेटा बेचने वाले रैकेट के 9 गिरफ्तार

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मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: CDR, SDR और लोकेशन डेटा बेचने वाले रैकेट के 9 गिरफ्तार

सारांश

मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया जिसमें फर्जी इंस्टाग्राम 'पुलिस इंस्पेक्टर' से लेकर असली सरकारी कांस्टेबल तक शामिल थे। 50 CDR, 520 SDR और 550 लोकेशन रिकॉर्ड की गैर-कानूनी बिक्री — यह सिर्फ एक जालसाजी नहीं, नागरिकों की निजता पर सीधा हमला है।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-12 ने CDR, SDR, लोकेशन डेटा और IMEI जानकारी की अवैध बिक्री में शामिल रैकेट का भंडाफोड़ किया।
कुल 9 आरोपी गिरफ्तार , जिनमें महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार के 5 लोग शामिल।
गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड और बिहार पुलिस के 2 कांस्टेबल भी हैं।
मुख्य आरोपी इंस्टाग्राम पर 'इंस्पेक्टर संजय' बनकर खोए मोबाइल ढूंढने का झाँसा देता था।
कथित तौर पर 50 CDR, 520 SDR, 550 लोकेशन रिकॉर्ड और 420 IMEI नंबर अवैध रूप से हासिल किए गए।
मामला BNS की कई धाराओं और IT अधिनियम की धाराओं 43(A), 66, 66A के तहत दर्ज।

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-12 ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR), मोबाइल लोकेशन डेटा और IMEI जानकारी की गैर-कानूनी खरीद-फरोख्त करने वाले एक संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार के पाँच लोग शामिल हैं।

रैकेट का तरीका: इंस्टाग्राम से शुरू हुआ जाल

जाँच के अनुसार, ओशिवारा पुलिस स्टेशन इलाके का एक व्यक्ति इंस्टाग्राम पर 'इंस्पेक्टर संजय' के नाम से खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताकर लोगों को ठग रहा था, जबकि वह किसी भी सरकारी पद पर नहीं था। उसने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वह चोरी हुए या खोए हुए मोबाइल फोन ढूंढकर उनके असली मालिकों को वापस दिला सकता है।

पीड़ितों ने उसके पोस्ट में दिए नंबर पर संपर्क किया। कथित पुलिस अधिकारी बनकर उसने फोन वापस दिलाने के बहाने लोगों से पैसे वसूले और गैर-कानूनी तरीके से उनके CDR, SDR और लोकेशन डेटा तक पहुँच बनाई।

गिरफ्तारी और बरामदगी

क्राइम ब्रांच यूनिट-12 की टीम ने 22 जून को जोगेश्वरी वेस्ट में एसवी रोड पर एचपी पेट्रोल पंप के सामने आयशा टॉवर के एंट्री गेट के पास से मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके पास मिले दो मोबाइल फोन की जाँच से पुष्टि हुई कि वह व्यवस्थित ढंग से गोपनीय दूरसंचार डेटा हासिल कर रहा था।

जाँच में सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से 50 CDR, 520 SDR, 550 मोबाइल नंबरों की लोकेशन जानकारी और 420 IMEI नंबरों का डेटा हासिल किया था।

पुलिसकर्मी भी गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों में झारखंड और बिहार पुलिस बल के दो कांस्टेबल भी शामिल हैं। यह तथ्य इस रैकेट की गंभीरता को और बढ़ाता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि सरकारी तंत्र के भीतर से भी संवेदनशील डेटा तक पहुँच बनाई जा रही थी।

गौरतलब है कि दूरसंचार डेटा की अनधिकृत बिक्री न केवल व्यक्तिगत निजता का उल्लंघन है, बल्कि इसका उपयोग जासूसी, ब्लैकमेल और संगठित अपराध में भी किया जा सकता है।

कानूनी कार्रवाई

ओशिवारा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(2), 319(2), 204, 223, 351(2), 112(2), 238 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 43(A), 66 और 66A भी लगाई गई हैं। यह मामला CRPC नंबर 68/2026 और ओशिवारा पुलिस स्टेशन केस नंबर 935/2026 के तहत पंजीकृत है।

आगे क्या होगा

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस डेटा का अंतिम उपयोग कहाँ और किसके लिए हुआ। यह जाँच दूरसंचार डेटा के अवैध व्यापार के व्यापक नेटवर्क को उजागर कर सकती है, जो भारत के कई राज्यों तक फैला हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक बहु-राज्यीय नेटवर्क है जो नागरिकों की डिजिटल निजता को बाज़ारू माल में बदल रहा था। भारत में डेटा सुरक्षा कानून लागू होने के बावजूद दूरसंचार डेटा का यह काला बाज़ार उन खामियों को उजागर करता है जो कानूनी ढाँचे और ज़मीनी प्रवर्तन के बीच मौजूद हैं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई क्राइम ब्रांच ने किस रैकेट का भंडाफोड़ किया?
मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-12 ने CDR, SDR, मोबाइल लोकेशन डेटा और IMEI जानकारी की गैर-कानूनी खरीद-फरोख्त करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में 9 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में कौन-कौन शामिल है?
गिरफ्तार 9 आरोपियों में महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार के नागरिक शामिल हैं, और इनमें से दो झारखंड व बिहार पुलिस बल में कार्यरत कांस्टेबल भी हैं।
मुख्य आरोपी ने ठगी कैसे की?
मुख्य आरोपी इंस्टाग्राम पर 'इंस्पेक्टर संजय' के नाम से खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताकर खोए मोबाइल वापस दिलाने का दावा करता था। पीड़ितों से संपर्क होने पर वह पैसे ऐंठता और उनका CDR, SDR तथा लोकेशन डेटा भी गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर लेता था।
कितना डेटा अवैध रूप से हासिल किया गया?
जाँच के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर 50 CDR, 520 SDR, 550 मोबाइल नंबरों की लोकेशन जानकारी और 420 IMEI नंबरों का डेटा अवैध तरीके से इकट्ठा किया था।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
ओशिवारा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(2), 319(2), 204, 223, 351(2), 112(2), 238 और 3(5) के साथ-साथ IT अधिनियम की धाराओं 43(A), 66 और 66A के तहत मामला दर्ज किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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