10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी इंस्पेक्टर को दबोचा, 200 से अधिक लोगों से चोरी के मोबाइल के बदले वसूली का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी इंस्पेक्टर को दबोचा, 200 से अधिक लोगों से चोरी के मोबाइल के बदले वसूली का आरोप

सारांश

मुंबई में एक शातिर जालसाज खुद को क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर बताकर IMEI ट्रैकिंग से चोरी के मोबाइल ढूंढता था — और बदले में ₹25,000 तक वसूलता था। 200 से अधिक मामलों के बाद यूनिट 12 ने उसे जोगेश्वरी वेस्ट से दबोचा।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने 24 जून 2025 को जोगेश्वरी वेस्ट से हनजमा मुबारक पाशा सैयद (30) को गिरफ्तार किया।
आरोपी खुद को इंस्पेक्टर संजय बताकर चोरी के मोबाइल रिकवर करने के बदले ₹10,000 से ₹25,000 तक वसूलता था।
पुलिस के अनुसार सैयद ने अब तक 200 से अधिक पीड़ितों से कमीशन वसूला।
आरोपी इंस्टाग्राम पर 'सेलिफर' अकाउंट के जरिए पीड़ितों को फँसाता था।
साथी गौरव परिहार फरार है; पुलिस टेलीकॉम डेटा लीक के कोण की भी जांच कर रही है।
आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन जब्त, जिनमें 30 हैंडसेट के स्क्रीनशॉट मिले।

मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 12 ने 24 जून 2025 को जोगेश्वरी वेस्ट से एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया, जो खुद को क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर संजय बताकर चोरी के मोबाइल फोन ढूंढने के नाम पर लोगों से अवैध वसूली करता था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अब तक 200 से अधिक पीड़ितों से फोन की कीमत का 15 से 20 प्रतिशत — यानी लगभग ₹10,000 से ₹25,000 प्रति मामला — कमीशन के रूप में वसूला।

कैसे हुई गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि जोगेश्वरी वेस्ट निवासी हनजमा मुबारक पाशा सैयद (30 वर्ष) फर्जी पुलिसकर्मी बनकर मोबाइल रिकवरी का अवैध नेटवर्क संचालित कर रहा है। सटीक इनपुट के आधार पर पुलिस ने जोगेश्वरी वेस्ट के एक पेट्रोल पंप के निकट जाल बिछाया और सैयद को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें 30 अलग-अलग हैंडसेट के स्क्रीनशॉट मिले।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे चलता था यह नेटवर्क

जांच में सामने आया कि सैयद इंस्टाग्राम पर 'सेलिफर' नाम के एक अकाउंट के जरिए खोए हुए मोबाइल रिकवर करने का विज्ञापन देता था। फोन चोरी होने पर पीड़ित इस विज्ञापन को देखकर उससे संपर्क करते थे; कुछ मामलों में सैयद खुद ऑनलाइन पीड़ितों तक पहुँचता था।

सैयद सबसे पहले पीड़ित से चोरी हुए मोबाइल का IMEI नंबर हासिल करता था। इसके बाद उन्नत तकनीकी टूल्स और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर हेल्पलाइन की सहायता से वह पता लगाता था कि उस हैंडसेट में फिलहाल कौन-सा सिम कार्ड सक्रिय है। उसका साथी गौरव परिहार — जो अभी फरार है और मुंबई से बाहर बताया जा रहा है — नए उपयोगकर्ता को एक संभावित खरीदार बनकर फोन करता था और बातचीत में उसका नाम-पता जुटा लेता था।

पूरी जानकारी मिलने के बाद सैयद इंस्पेक्टर संजय बनकर नए उपयोगकर्ता को फोन करता और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर हैंडसेट सरेंडर करवाता था। डर के मारे जब नया उपयोगकर्ता फोन सौंप देता, तो सैयद उसे असली मालिक को लौटाकर मोटी फीस वसूल लेता था।

पुलिस की जांच और गंभीर सवाल

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, भले ही इस नेटवर्क ने कई पीड़ितों के फोन वापस दिलाए हों, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी — इसमें फर्जीवाड़ा, डेटा का अनधिकृत इस्तेमाल और जबरन वसूली शामिल है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि सैयद को टेलीकॉम कंपनियों के संवेदनशील डेटा तक पहुँच कैसे मिली, और क्या किसी टेलीकॉम कर्मचारी की इसमें मिलीभगत है।

आगे क्या होगा

मामले की जांच जारी है। फरार साथी गौरव परिहार की तलाश की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार टेलीकॉम डेटा लीक के कोण की गहराई से पड़ताल की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 200 से अधिक मामलों तक यह नेटवर्क बिना किसी शिकायत के कैसे चलता रहा — और क्या पीड़ित फोन वापस मिलने की खुशी में अवैध वसूली को नज़रअंदाज़ करते रहे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में गिरफ्तार फर्जी पुलिस इंस्पेक्टर कौन है?
गिरफ्तार आरोपी का नाम हनजमा मुबारक पाशा सैयद (30 वर्ष) है, जो जोगेश्वरी वेस्ट, मुंबई का रहने वाला है। वह खुद को क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर संजय बताकर चोरी के मोबाइल रिकवर करने के नाम पर लोगों से वसूली करता था।
सैयद चोरी के मोबाइल कैसे ढूंढता था?
सैयद पीड़ित से IMEI नंबर लेकर तकनीकी टूल्स और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर हेल्पलाइन की मदद से सक्रिय सिम कार्ड की जानकारी निकालता था। इसके बाद उसका साथी गौरव परिहार नए उपयोगकर्ता का नाम-पता जुटाता था और सैयद फर्जी इंस्पेक्टर बनकर फोन सरेंडर करवाता था।
आरोपी ने कितने लोगों से वसूली की और कितनी रकम ली?
पुलिस के अनुमान के अनुसार सैयद ने अब तक 200 से अधिक पीड़ितों के मोबाइल रिकवर कर उनसे फोन की कीमत का 15 से 20 प्रतिशत — लगभग ₹10,000 से ₹25,000 प्रति मामला — फीस के रूप में वसूला।
क्या इस मामले में कोई और आरोपी है?
हाँ, सैयद का साथी गौरव परिहार अभी फरार है और मुंबई से बाहर बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और यह भी जांच कर रही है कि किसी टेलीकॉम कर्मचारी की इस नेटवर्क में मिलीभगत तो नहीं थी।
क्या चोरी का मोबाइल ढूंढने के लिए इस तरह की सेवा लेना कानूनी है?
नहीं। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, भले ही फोन वापस मिल जाए, लेकिन इस प्रक्रिया में फर्जी पुलिस पहचान, डेटा का अनधिकृत उपयोग और जबरन वसूली शामिल है — जो सभी दंडनीय अपराध हैं। पीड़ितों को आधिकारिक पुलिस शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले