मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी इंस्पेक्टर को दबोचा, 200 से अधिक लोगों से चोरी के मोबाइल के बदले वसूली का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 12 ने 24 जून 2025 को जोगेश्वरी वेस्ट से एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया, जो खुद को क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर संजय बताकर चोरी के मोबाइल फोन ढूंढने के नाम पर लोगों से अवैध वसूली करता था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अब तक 200 से अधिक पीड़ितों से फोन की कीमत का 15 से 20 प्रतिशत — यानी लगभग ₹10,000 से ₹25,000 प्रति मामला — कमीशन के रूप में वसूला।
कैसे हुई गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि जोगेश्वरी वेस्ट निवासी हनजमा मुबारक पाशा सैयद (30 वर्ष) फर्जी पुलिसकर्मी बनकर मोबाइल रिकवरी का अवैध नेटवर्क संचालित कर रहा है। सटीक इनपुट के आधार पर पुलिस ने जोगेश्वरी वेस्ट के एक पेट्रोल पंप के निकट जाल बिछाया और सैयद को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें 30 अलग-अलग हैंडसेट के स्क्रीनशॉट मिले।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे चलता था यह नेटवर्क
जांच में सामने आया कि सैयद इंस्टाग्राम पर 'सेलिफर' नाम के एक अकाउंट के जरिए खोए हुए मोबाइल रिकवर करने का विज्ञापन देता था। फोन चोरी होने पर पीड़ित इस विज्ञापन को देखकर उससे संपर्क करते थे; कुछ मामलों में सैयद खुद ऑनलाइन पीड़ितों तक पहुँचता था।
सैयद सबसे पहले पीड़ित से चोरी हुए मोबाइल का IMEI नंबर हासिल करता था। इसके बाद उन्नत तकनीकी टूल्स और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर हेल्पलाइन की सहायता से वह पता लगाता था कि उस हैंडसेट में फिलहाल कौन-सा सिम कार्ड सक्रिय है। उसका साथी गौरव परिहार — जो अभी फरार है और मुंबई से बाहर बताया जा रहा है — नए उपयोगकर्ता को एक संभावित खरीदार बनकर फोन करता था और बातचीत में उसका नाम-पता जुटा लेता था।
पूरी जानकारी मिलने के बाद सैयद इंस्पेक्टर संजय बनकर नए उपयोगकर्ता को फोन करता और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर हैंडसेट सरेंडर करवाता था। डर के मारे जब नया उपयोगकर्ता फोन सौंप देता, तो सैयद उसे असली मालिक को लौटाकर मोटी फीस वसूल लेता था।
पुलिस की जांच और गंभीर सवाल
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, भले ही इस नेटवर्क ने कई पीड़ितों के फोन वापस दिलाए हों, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी — इसमें फर्जीवाड़ा, डेटा का अनधिकृत इस्तेमाल और जबरन वसूली शामिल है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि सैयद को टेलीकॉम कंपनियों के संवेदनशील डेटा तक पहुँच कैसे मिली, और क्या किसी टेलीकॉम कर्मचारी की इसमें मिलीभगत है।
आगे क्या होगा
मामले की जांच जारी है। फरार साथी गौरव परिहार की तलाश की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार टेलीकॉम डेटा लीक के कोण की गहराई से पड़ताल की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ था।