25 अगस्त 2026
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नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र बनाने पर आदित्य ठाकरे का विरोध, BJP पर जमीन कब्जाने का आरोप

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नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र बनाने पर आदित्य ठाकरे का विरोध, BJP पर जमीन कब्जाने का आरोप

सारांश

मुंबई में 10 साल पुराने फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र बनाने की योजना के खिलाफ आदित्य ठाकरे मैदान में उतरे हैं। BJP पर निजीकरण और जमीन कब्जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने 'रेड कार्ड आंदोलन' छेड़ा है — सवाल यह है कि मुंबई में युवाओं के लिए खेल की जगह बचेगी या नहीं।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने 23 अगस्त 2026 को नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र बनाने की योजना का विरोध किया।
यह मैदान पिछले 10 वर्षों से बच्चों और पेशेवर खिलाड़ियों के लिए फुटबॉल का प्रमुख केंद्र रहा है।
ठाकरे ने BJP पर आरोप लगाया कि ज़मीन को एक ट्रस्ट को सौंपने की योजना सार्वजनिक भूमि के निजीकरण का मामला है।
बांद्रा में ट्रस्ट और फाउंडेशन पर सार्वजनिक व जिला योजना निधियों के दुरुपयोग का आरोप; हितों के टकराव का सवाल उठाया।
'रेड कार्ड आंदोलन' शुरू किया गया, जो सरकार को खेल मैदानों से दूर रहने का प्रतीकात्मक संदेश है।
'प्रोजेक्ट महादेव' की विफलता और मेसी की मुंबई यात्रा को राजनीतिक प्रचार तक सीमित रखने का भी आरोप लगाया।

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने 23 अगस्त 2026 को मुंबई में मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन के नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र में बदलने की प्रस्तावित योजना के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि वह युवाओं और खिलाड़ियों से खेल के मैदान छीन रही है और सार्वजनिक भूमि को निजी हितों के लिए सौंपने की कोशिश कर रही है। इस विरोध के प्रतीक के रूप में 'रेड कार्ड आंदोलन' शुरू किया गया है।

मैदान का इतिहास और विवाद की जड़

ठाकरे के अनुसार, नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ पिछले 10 वर्षों से बच्चों और पेशेवर खिलाड़ियों के लिए फुटबॉल का प्रमुख केंद्र रहा है। यह ज़मीन मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन को विशेष रूप से खेल गतिविधियों के लिए आवंटित की गई थी। उनका आरोप है कि अब इसे प्रदर्शनी केंद्र में बदलकर किसी ट्रस्ट को सौंपे जाने की योजना बनाई जा रही है, जो भूमि के मूल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन है।

निजीकरण और हितों के टकराव का आरोप

ठाकरे ने आरोप लगाया कि बांद्रा में एक विशेष ट्रस्ट और फाउंडेशन, कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण में, खुले भूखंडों और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक और जिला योजना निधियों का उपयोग ऐसे संस्थानों को लाभ पहुँचाने के लिए हो रहा है, जो हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध खेल सुविधाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि उनके निजीकरण और नियंत्रण से है।

मेसी प्रकरण और 'प्रोजेक्ट महादेव' की विफलता

ठाकरे ने विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर लियोनेल मेसी की मुंबई यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें फुटबॉल से जुड़े संगठनों के बजाय क्रिकेट स्टेडियम ले जाया गया, जो उनके अनुसार केवल राजनीतिक प्रचार और फोटो अवसर तक सिमटा रहा। उन्होंने 'प्रोजेक्ट महादेव' का भी उल्लेख किया, जिसकी घोषणा तो की गई थी लेकिन कथित तौर पर आगे नहीं बढ़ सकी — चुने गए बच्चों को वापस उनके स्कूलों में भेज दिया गया।

रेड कार्ड आंदोलन और आगे की राह

ठाकरे ने कहा कि फुटबॉल में गलती या फाउल होने पर रेड कार्ड दिखाया जाता है और इसी प्रतीक के माध्यम से सरकार को संदेश दिया जा रहा है कि वह खेल मैदानों से दूर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में फुटबॉल मैदानों को धीरे-धीरे कंक्रीट की इमारतों में बदला जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए खेल सुविधाएँ सिकुड़ती जा रही हैं। उनके अनुसार जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देना देशहित का अभिन्न हिस्सा है और इस आंदोलन का मकसद खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ भूमि का व्यावसायिक या राजनीतिक पुनर्उपयोग जमीनी खेल विकास की कीमत पर होता दिखता है। आदित्य ठाकरे के आरोप गंभीर हैं, लेकिन 'रेड कार्ड आंदोलन' की असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह सड़क पर दबाव बनाए रखता है या चुनावी मौसम में एक और प्रतीकात्मक विरोध बनकर रह जाता है। मेसी प्रकरण और 'प्रोजेक्ट महादेव' की विफलता इस बात की याद दिलाती है कि मुंबई में फुटबॉल के नाम पर बड़ी घोषणाएँ होती रही हैं, लेकिन जमीनी बदलाव कम।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ विवाद क्या है?
मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन के नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र में बदलने की प्रस्तावित योजना को लेकर विवाद उठा है। यह मैदान पिछले 10 वर्षों से बच्चों और पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए उपयोग में है और इसे मूलतः खेल गतिविधियों के लिए आवंटित किया गया था।
आदित्य ठाकरे ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
आदित्य ठाकरे ने BJP पर आरोप लगाया है कि वह इस सार्वजनिक खेल भूमि को एक ट्रस्ट को सौंपकर निजी हितों को लाभ पहुँचाना चाहती है। उनका यह भी कहना है कि बांद्रा में कुछ ट्रस्ट और फाउंडेशन कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण में सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
'रेड कार्ड आंदोलन' क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'रेड कार्ड आंदोलन' शिवसेना (यूबीटी) द्वारा इस विवाद के विरोध में शुरू किया गया प्रतीकात्मक अभियान है। फुटबॉल में रेड कार्ड फाउल के लिए दिखाया जाता है — इसी प्रतीक के माध्यम से सरकार को संदेश दिया जा रहा है कि वह खेल मैदानों से दूर रहे और खिलाड़ियों के अधिकारों का सम्मान करे।
'प्रोजेक्ट महादेव' क्या था और यह क्यों विफल हुआ?
ठाकरे के अनुसार 'प्रोजेक्ट महादेव' एक फुटबॉल विकास परियोजना थी जिसकी घोषणा की गई थी लेकिन कथित तौर पर आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने दावा किया कि चुने गए बच्चों को वापस उनके स्कूलों में भेज दिया गया और परियोजना से जोड़ने का काम रुक गया।
मुंबई में फुटबॉल मैदानों की स्थिति कैसी है?
आदित्य ठाकरे के अनुसार मुंबई में फुटबॉल मैदानों को धीरे-धीरे कंक्रीट की इमारतों में बदला जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए खेल सुविधाएँ सिकुड़ती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने करीबी लोगों को मैदान और सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है जबकि आम खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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