नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र बनाने पर आदित्य ठाकरे का विरोध, BJP पर जमीन कब्जाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने 23 अगस्त 2026 को मुंबई में मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन के नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को प्रदर्शनी केंद्र में बदलने की प्रस्तावित योजना के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि वह युवाओं और खिलाड़ियों से खेल के मैदान छीन रही है और सार्वजनिक भूमि को निजी हितों के लिए सौंपने की कोशिश कर रही है। इस विरोध के प्रतीक के रूप में 'रेड कार्ड आंदोलन' शुरू किया गया है।
मैदान का इतिहास और विवाद की जड़
ठाकरे के अनुसार, नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ पिछले 10 वर्षों से बच्चों और पेशेवर खिलाड़ियों के लिए फुटबॉल का प्रमुख केंद्र रहा है। यह ज़मीन मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन को विशेष रूप से खेल गतिविधियों के लिए आवंटित की गई थी। उनका आरोप है कि अब इसे प्रदर्शनी केंद्र में बदलकर किसी ट्रस्ट को सौंपे जाने की योजना बनाई जा रही है, जो भूमि के मूल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन है।
निजीकरण और हितों के टकराव का आरोप
ठाकरे ने आरोप लगाया कि बांद्रा में एक विशेष ट्रस्ट और फाउंडेशन, कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण में, खुले भूखंडों और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक और जिला योजना निधियों का उपयोग ऐसे संस्थानों को लाभ पहुँचाने के लिए हो रहा है, जो हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध खेल सुविधाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि उनके निजीकरण और नियंत्रण से है।
मेसी प्रकरण और 'प्रोजेक्ट महादेव' की विफलता
ठाकरे ने विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर लियोनेल मेसी की मुंबई यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें फुटबॉल से जुड़े संगठनों के बजाय क्रिकेट स्टेडियम ले जाया गया, जो उनके अनुसार केवल राजनीतिक प्रचार और फोटो अवसर तक सिमटा रहा। उन्होंने 'प्रोजेक्ट महादेव' का भी उल्लेख किया, जिसकी घोषणा तो की गई थी लेकिन कथित तौर पर आगे नहीं बढ़ सकी — चुने गए बच्चों को वापस उनके स्कूलों में भेज दिया गया।
रेड कार्ड आंदोलन और आगे की राह
ठाकरे ने कहा कि फुटबॉल में गलती या फाउल होने पर रेड कार्ड दिखाया जाता है और इसी प्रतीक के माध्यम से सरकार को संदेश दिया जा रहा है कि वह खेल मैदानों से दूर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में फुटबॉल मैदानों को धीरे-धीरे कंक्रीट की इमारतों में बदला जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए खेल सुविधाएँ सिकुड़ती जा रही हैं। उनके अनुसार जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देना देशहित का अभिन्न हिस्सा है और इस आंदोलन का मकसद खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करना है।