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पुणे: 14 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म, 67 वर्षीय चाचा गिरफ्तार; POCSO के तहत मामला दर्ज

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पुणे: 14 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म, 67 वर्षीय चाचा गिरफ्तार; POCSO के तहत मामला दर्ज

सारांश

पुणे के भादलवाड़ी गांव में 14 वर्षीय मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग के साथ उसके 67 वर्षीय चाचे ने कथित दुष्कर्म किया — आरोपी POCSO के तहत गिरफ्तार। उसी दिन वाराणसी POCSO अदालत ने CBI के एक अलग मामले में दोषी रवि कुमार पटेल को आजीवन कारावास सुनाया।

मुख्य बातें

पुणे के भादलवाड़ी गांव में 14 वर्षीय मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म की घटना शुक्रवार को सामने आई।
आरोपी शिवाजी चंद्रकांत दणाने (उम्र 67 वर्ष ), पीड़िता का सगा चाचा, को POCSO अधिनियम और BNS की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।
शिकायत पीड़िता की माँ मंगल तुपे ने दर्ज कराई; जाँच सहायक पुलिस निरीक्षक सोमनाथ शेंडगे कर रहे हैं।
वाराणसी POCSO अदालत ने गुरुवार को रवि कुमार पटेल को बाल यौन शोषण के मामले में आजीवन कारावास और ₹2 लाख 75 हजार जुर्माना सुनाया।
CBI ने यह मामला जून 2022 में CSAM से जुड़े आरोपों के आधार पर दर्ज किया था, जो जाँच में गंभीर यौन उत्पीड़न तक पहुँचा।

पुणे जिले के इंदापुर तहसील स्थित भादलवाड़ी गांव में एक 14 वर्षीय मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग लड़की के साथ उसके 67 वर्षीय सगे चाचे ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। भिगवण पुलिस स्टेशन में शुक्रवार को मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, आरोपी शिवाजी चंद्रकांत दणाने (उम्र 67 वर्ष) ने पीड़िता की मानसिक अक्षमता और नाबालिग होने का फायदा उठाते हुए अपने घर के भीतर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। घटना की शिकायत पीड़िता की माँ मंगल तुपे ने दर्ज कराई।

भिगवण पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। आगे की जाँच सहायक पुलिस निरीक्षक सोमनाथ शेंडगे कर रहे हैं।

वाराणसी POCSO अदालत का फैसला

इसी क्रम में, वाराणसी की POCSO अदालत ने गुरुवार को बाल यौन शोषण के एक अलग मामले में दोषी रवि कुमार पटेल को आजीवन कारावास और ₹2 लाख 75 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, अदालत ने पटेल को IPC, POCSO अधिनियम और IT अधिनियम के तहत दुष्कर्म, गंभीर यौन उत्पीड़न, बच्चे का पोर्नोग्राफिक उद्देश्यों के लिए उपयोग, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) रखने और आपराधिक साजिश जैसे संगीन अपराधों का दोषी पाया।

CBI जाँच की पृष्ठभूमि

यह मामला CBI ने जून 2022 में दर्ज किया था। शुरुआत में आरोप इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से CSAM एकत्र करने, प्रसारित करने और प्रकाशित करने तक सीमित थे। जाँच आगे बढ़ने पर CBI को पता चला कि आरोपी ने एक नाबालिग के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न भी किया है।

आम जनता पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। गौरतलब है कि POCSO अधिनियम के तहत दोषसिद्धि दर में सुधार के बावजूद, दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर बच्चे अपराधियों के आसान निशाने पर रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवार के भीतर के आरोपी होने की वजह से शिकायत दर्ज कराने में देरी होती है।

क्या होगा आगे

पुणे मामले में भिगवण पुलिस आरोपी से पूछताछ जारी रखेगी और न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल करेगी। वाराणसी में रवि कुमार पटेल को सुनाई गई सजा बाल यौन अपराध मामलों में POCSO अदालतों की सख्त कार्रवाई का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मानसिक रूप से अक्षम पीड़ितों के मामलों में शिकायत दर्ज होने में अक्सर देरी होती है क्योंकि पीड़िता अपनी व्यथा स्वयं बयान करने में असमर्थ होती है। वाराणसी में CBI अदालत का आजीवन कारावास का फैसला एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली सवाल यह है कि दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल, आँगनवाड़ी और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर क्या निगरानी तंत्र मौजूद है — जो अभी भी अपर्याप्त दिखता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे दिव्यांग नाबालिग दुष्कर्म मामले में क्या हुआ?
पुणे के इंदापुर तहसील के भादलवाड़ी गांव में 14 वर्षीय मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग लड़की के साथ उसके 67 वर्षीय सगे चाचे शिवाजी चंद्रकांत दणाने ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। पीड़िता की माँ मंगल तुपे की शिकायत पर भिगवण पुलिस ने आरोपी को POCSO अधिनियम और BNS के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपी शिवाजी चंद्रकांत दणाने के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जाँच सहायक पुलिस निरीक्षक सोमनाथ शेंडगे कर रहे हैं।
वाराणसी POCSO अदालत ने किसे और क्या सजा सुनाई?
वाराणसी की POCSO अदालत ने गुरुवार को रवि कुमार पटेल को बाल यौन शोषण के मामले में आजीवन कारावास और ₹2 लाख 75 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई। CBI ने यह मामला जून 2022 में CSAM से जुड़े आरोपों के आधार पर दर्ज किया था।
CBI ने रवि कुमार पटेल के खिलाफ किन अपराधों में दोष सिद्ध किया?
CBI के अनुसार अदालत ने पटेल को दुष्कर्म, गंभीर यौन उत्पीड़न, बच्चे का पोर्नोग्राफिक उद्देश्यों के लिए उपयोग, CSAM रखने और आपराधिक साजिश के अपराधों में IPC, POCSO अधिनियम और IT अधिनियम के तहत दोषी पाया। जाँच में शुरुआती CSAM के आरोपों से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ था।
दिव्यांग नाबालिगों को यौन अपराधों से बचाने के लिए क्या कानूनी प्रावधान हैं?
POCSO अधिनियम के तहत नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराध के मामलों में कठोर सजा का प्रावधान है, और पीड़िता की मानसिक अक्षमता को गंभीर परिस्थिति माना जाता है। इसके अलावा BNS में भी ऐसे मामलों के लिए विशेष धाराएँ हैं जो अपराध की गंभीरता के अनुसार दंड निर्धारित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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