मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: 4 मौतें, स्वास्थ्य मंत्री निशांत की चुप्पी पर विपक्ष हमलावर
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल में 4 जून की तड़के लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार सुबह पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए और घटना पर एक शब्द भी नहीं बोले। मंत्री की इस चुप्पी पर विपक्षी दलों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार सुबह पटना एयरपोर्ट पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ पहुँचे। जब पत्रकारों ने उनसे मुजफ्फरपुर अग्निकांड पर प्रतिक्रिया माँगी, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। संजय झा भी मीडिया के सवालों को नज़रअंदाज़ करते हुए वहाँ से निकल गए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘स्वास्थ्य मंत्री इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।’ उन्होंने जोड़ा कि राज्य में कहीं आग की घटनाएँ हो रही हैं तो कहीं चोरी-डकैती, और सरकार को इन सब पर ध्यान देना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया का घटनास्थल पर न जाना और बयान तक न देना संवेदनहीनता दर्शाता है।
कैसे हुआ हादसा
यह घटना मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के प्रसाद अस्पताल में तड़के लगभग 3 बजे हुई। एक फायर अधिकारी के अनुसार, आग अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में लगी, जिससे घना धुआँ उठा और तेज़ी से पूरे अस्पताल में फैल गया। मरीज़ों, उनके परिजनों और कर्मचारियों के बीच दहशत फैल गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आपातकालीन बचाव दल और स्थानीय निवासियों ने मिलकर इमारत में फंसे मरीज़ों को बाहर निकाला।
मृतकों की पहचान
मृतकों में मीनापुर थाना क्षेत्र के गौरिगामा गाँव निवासी कृष्णनंदन प्रसाद सिंह (76), कथैया थाना क्षेत्र के डिस्टोलिया गाँव की गीता देवी (62), मूल रूप से औराई थाना क्षेत्र के रतनपुर गाँव के और वर्तमान में अहियापुर के न्यूलाल चौक पर रह रहे शशांक कुमार (30) तथा शिवहर ज़िले के तरियानी छपरा थाना क्षेत्र के विशंभरपुर गाँव निवासी उदय कुमार (57) शामिल हैं।
सरकार का कदम
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। हालाँकि, अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन और आईसीयू में आग के कारणों की विस्तृत जाँच पर अभी सरकारी रुख स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में फायर ऑडिट रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।