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मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: 4 मौतें, स्वास्थ्य मंत्री निशांत की चुप्पी पर विपक्ष हमलावर

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मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: 4 मौतें, स्वास्थ्य मंत्री निशांत की चुप्पी पर विपक्ष हमलावर

सारांश

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में लगी आग ने चार ज़िंदगियाँ निगल लीं, पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पटना से दिल्ली रवाना होते वक्त एक शब्द नहीं कहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ₹4 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा की है, जबकि विपक्ष ने जवाबदेही और अग्नि सुरक्षा पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

मुख्य बातें

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में 4 जून को तड़के लगभग 3 बजे भीषण आग लगी।
हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई — कृष्णनंदन प्रसाद सिंह (76), गीता देवी (62), शशांक कुमार (30) और उदय कुमार (57)।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार सुबह पटना से दिल्ली रवाना हुए और घटना पर कोई जवाब नहीं दिया।
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल में 4 जून की तड़के लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार सुबह पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए और घटना पर एक शब्द भी नहीं बोले। मंत्री की इस चुप्पी पर विपक्षी दलों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार सुबह पटना एयरपोर्ट पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ पहुँचे। जब पत्रकारों ने उनसे मुजफ्फरपुर अग्निकांड पर प्रतिक्रिया माँगी, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। संजय झा भी मीडिया के सवालों को नज़रअंदाज़ करते हुए वहाँ से निकल गए।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘स्वास्थ्य मंत्री इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।’ उन्होंने जोड़ा कि राज्य में कहीं आग की घटनाएँ हो रही हैं तो कहीं चोरी-डकैती, और सरकार को इन सब पर ध्यान देना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया का घटनास्थल पर न जाना और बयान तक न देना संवेदनहीनता दर्शाता है।

कैसे हुआ हादसा

यह घटना मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के प्रसाद अस्पताल में तड़के लगभग 3 बजे हुई। एक फायर अधिकारी के अनुसार, आग अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में लगी, जिससे घना धुआँ उठा और तेज़ी से पूरे अस्पताल में फैल गया। मरीज़ों, उनके परिजनों और कर्मचारियों के बीच दहशत फैल गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आपातकालीन बचाव दल और स्थानीय निवासियों ने मिलकर इमारत में फंसे मरीज़ों को बाहर निकाला।

मृतकों की पहचान

मृतकों में मीनापुर थाना क्षेत्र के गौरिगामा गाँव निवासी कृष्णनंदन प्रसाद सिंह (76), कथैया थाना क्षेत्र के डिस्टोलिया गाँव की गीता देवी (62), मूल रूप से औराई थाना क्षेत्र के रतनपुर गाँव के और वर्तमान में अहियापुर के न्यूलाल चौक पर रह रहे शशांक कुमार (30) तथा शिवहर ज़िले के तरियानी छपरा थाना क्षेत्र के विशंभरपुर गाँव निवासी उदय कुमार (57) शामिल हैं।

सरकार का कदम

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। हालाँकि, अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन और आईसीयू में आग के कारणों की विस्तृत जाँच पर अभी सरकारी रुख स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में फायर ऑडिट रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार के स्वास्थ्य ढाँचे के दीर्घकालिक संकट का लक्षण है — जहाँ निजी अस्पतालों के फायर ऑडिट और आईसीयू सुरक्षा मानकों का अनुपालन अक्सर काग़ज़ी रह जाता है। चार मौतों के बाद भी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का घटनास्थल पर न जाना और सवालों से बचना राजनीतिक रूप से महँगा पड़ सकता है, ख़ासकर तब जब विपक्ष ने जवाबदेही का मुद्दा उठा दिया है। ₹4 लाख की अनुग्रह राशि ज़रूरी कदम है, पर असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस बार फायर सेफ्टी ऑडिट की वास्तविक रिपोर्ट सार्वजनिक होगी। बिहार में पिछले वर्षों में अस्पताल अग्निकांडों की पुनरावृत्ति बताती है कि सिस्टम-स्तरीय सुधार के बिना मुआवज़ा एक रस्म भर बनकर रह जाता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में आग कब और कहाँ लगी?
यह घटना 4 जून की तड़के लगभग 3 बजे मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के प्रसाद अस्पताल में हुई। फायर अधिकारी के अनुसार, आग अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में लगी और घना धुआँ तेज़ी से पूरे अस्पताल में फैल गया।
हादसे में कितने लोगों की मौत हुई और मृतक कौन हैं?
हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। इनमें कृष्णनंदन प्रसाद सिंह (76), गीता देवी (62), शशांक कुमार (30) और उदय कुमार (57) शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की चुप्पी पर विवाद क्यों है?
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार सुबह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ पटना एयरपोर्ट पहुँचे और दिल्ली रवाना हो गए, लेकिन उन्होंने मुजफ्फरपुर अग्निकांड पर पत्रकारों के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस चुप्पी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से जवाबदेही की माँग की है।
मृतकों के परिजनों को क्या मुआवज़ा मिलेगा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
मरीज़ों को कैसे बचाया गया?
आग लगने से अस्पताल में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। आपातकालीन बचाव दल और स्थानीय निवासियों ने मिलकर इमारत के अंदर फंसे मरीज़ों को बाहर निकाला।
राष्ट्र प्रेस
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