8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुजफ्फरपुर में लीची की तीन नई किस्में विकसित: गंडकी संपदा, योगिता और लालिमा जुलाई तक देंगी स्वाद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुजफ्फरपुर में लीची की तीन नई किस्में विकसित: गंडकी संपदा, योगिता और लालिमा जुलाई तक देंगी स्वाद

सारांश

मुजफ्फरपुर के राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र ने पाँच साल की मेहनत से तीन नई लेट-वेरायटी किस्में तैयार की हैं — गंडकी संपदा, योगिता और लालिमा — जो लीची का सीज़न जुलाई मध्य तक खींचेंगी और किसानों को बेहतर दाम व लंबे बिक्री अवसर देंगी।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर ने पाँच वर्षों के शोध के बाद तीन नई लीची किस्में विकसित की हैं।
नई किस्में हैं — गंडकी संपदा , गंडकी योगिता और गंडकी लालिमा ; तीनों 'लेट वेरायटी' हैं।
ये किस्में जून से जुलाई मध्य तक बाज़ार में उपलब्ध रहेंगी, जबकि शाही और चाइना लीची का सीज़न मिलाकर केवल 25 दिन का होता है।
मोटे छिलके के कारण फल परिवहन में सुरक्षित रहते हैं और जल्दी खराब नहीं होते।
गंडकी लालिमा को रांची से लाकर विकसित किया गया है; गंडकी योगिता के पेड़ बौने आकार के हैं।
किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं और जागरूकता अभियान जारी है।

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के वैज्ञानिकों ने करीब पाँच वर्षों के गहन शोध के बाद लीची की तीन नई प्रजातियाँ विकसित की हैं — गंडकी संपदा, गंडकी योगिता और गंडकी लालिमा। ये तीनों 'लेट वेरायटी' किस्में हैं, जो जून से जुलाई मध्य तक बाज़ार में उपलब्ध रहेंगी और बिहार के लीची सीज़न को उल्लेखनीय रूप से विस्तार देंगी।

नई किस्मों की ज़रूरत क्यों पड़ी

अब तक मुजफ्फरपुर की बागवानी मुख्यतः शाही और चाइना लीची तक सीमित थी। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.डी. पांडेय के अनुसार, शाही लीची का सीज़न मई के अंत में शुरू होकर लगभग 15 दिनों तक चलता है, जबकि चाइना लीची उसके बाद केवल 10 दिनों तक बाज़ार में रहती है। इस छोटे सीज़न के कारण किसानों को सीमित समय में ही अपनी फसल बेचनी पड़ती थी, जिससे उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाते थे।

तीनों नई किस्मों की विशेषताएँ

गंडकी संपदा का पल्प मलाईदार, सफ़ेद, नरम और रसीला होता है। इस किस्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि फल फटने की समस्या नहीं होती, जिससे भंडारण और परिवहन दोनों आसान हो जाते हैं।

गंडकी योगिता के पेड़ बौने आकार के होते हैं और यह किस्म जुलाई मध्य में पककर तैयार होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें सुगंध, मिठास और अम्लता का बेहतरीन संतुलन पाया जाता है।

गंडकी लालिमा को रांची से लाकर विकसित किया गया है। यह जून मध्य में तैयार होती है और इसका पल्प अत्यंत रसीला बताया जाता है।

किसानों को क्या फ़ायदा होगा

तीनों नई किस्मों का छिलका शाही और चाइना लीची की तुलना में काफ़ी मोटा होता है, जिससे फल परिवहन के दौरान सुरक्षित रहते हैं और जल्दी खराब नहीं होते। विशेषज्ञों का मानना है कि किसान इन फलों को पेड़ पर अधिक समय तक सुरक्षित रख सकेंगे, जिससे उन्हें बाज़ार में बेहतर समय पर और अच्छे दाम पर बिक्री का अवसर मिलेगा। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब लीची उत्पादक किसान सीमित सीज़न के कारण मूल्य अस्थिरता से जूझते रहे हैं।

रखरखाव और उपलब्धता

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इन नई प्रजातियों की देखभाल के लिए किसी विशेष तकनीक की आवश्यकता नहीं है — इनका रखरखाव शाही और चाइना लीची जैसा ही है। वर्तमान में किसानों को इन किस्मों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और उन्हें पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

आगे की राह

इस शोध का मूल उद्देश्य लीची के सीमित सीज़न को विस्तार देना और किसानों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है। यदि ये किस्में व्यापक पैमाने पर अपनाई जाती हैं, तो बिहार के लीची उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और किसानों की आमदनी दोनों में सुधार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

योगिता और लालिमा का विकास वैज्ञानिक दृष्टि से उत्साहजनक है, लेकिन असली परीक्षा खेत स्तर पर अपनाई की दर होगी। बिहार में नई कृषि किस्मों के प्रसार की गति ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है — पौधे उपलब्ध कराना और किसानों का वास्तव में उन्हें अपनाना दो अलग बातें हैं। यदि आपूर्ति शृंखला और कोल्ड स्टोरेज बुनियादी ढाँचा इन विस्तारित सीज़न किस्मों के अनुरूप नहीं बदला, तो मोटे छिलके का लाभ भी सीमित रह सकता है। सरकार और केंद्र को किसान-जागरूकता के साथ-साथ बाज़ार संपर्क पर भी समान ज़ोर देना होगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरपुर में विकसित लीची की तीन नई किस्में कौन सी हैं?
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर ने गंडकी संपदा, गंडकी योगिता और गंडकी लालिमा नामक तीन नई किस्में विकसित की हैं। ये तीनों 'लेट वेरायटी' हैं और जून से जुलाई मध्य तक उपलब्ध रहेंगी।
नई लीची किस्में कब से बाज़ार में मिलेंगी?
ये तीनों नई किस्में जून से जुलाई मध्य तक बाज़ार में उपलब्ध रहेंगी। गंडकी लालिमा जून मध्य में तैयार होती है, जबकि गंडकी योगिता जुलाई मध्य तक पकती है।
नई लीची किस्मों से किसानों को क्या फ़ायदा होगा?
इन किस्मों का मोटा छिलका फल को परिवहन के दौरान सुरक्षित रखता है और खराब होने की दर कम करता है। साथ ही, जून-जुलाई में पकने से किसानों को बाज़ार में बेहतर समय और अच्छे दाम पर बिक्री का अवसर मिलेगा।
गंडकी संपदा, गंडकी योगिता और गंडकी लालिमा में क्या अंतर है?
गंडकी संपदा का पल्प मलाईदार और रसीला है तथा फल फटते नहीं। गंडकी योगिता के पेड़ बौने होते हैं और इसमें सुगंध, मिठास व अम्लता का संतुलन है। गंडकी लालिमा रांची से लाकर विकसित की गई है और इसका पल्प अत्यंत रसीला है।
क्या इन नई लीची किस्मों की देखभाल कठिन है?
नहीं, वैज्ञानिकों के अनुसार इन नई किस्मों की देखभाल के लिए किसी विशेष तकनीक की आवश्यकता नहीं है। इनका रखरखाव शाही और चाइना लीची जैसा ही है, जिससे किसान आसानी से इन्हें अपना सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले