नाड़ी शोधन प्राणायाम: कफ विकार और मानसिक तनाव दोनों में राहत, आयुष मंत्रालय ने किया रेखांकित
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस 2025 (21 जून) से पहले नाड़ी शोधन प्राणायाम को विशेष रूप से प्रमोट करना शुरू किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह प्राणायाम मानसिक शांति, एकाग्रता और शारीरिक संतुलन के लिए सबसे सुरक्षित एवं प्रभावशाली तकनीकों में से एक है। नई दिल्ली से जारी मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में इसे 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' अभियान का अहम हिस्सा बताया गया है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम क्या है
नाड़ी शोधन प्राणायाम को वैकल्पिक नासिका श्वास प्राणायाम भी कहा जाता है। इसमें एक नासिका छिद्र से श्वास ली जाती है और दूसरे से छोड़ी जाती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक इतनी सरल है कि नए अभ्यासी भी इसे बिना किसी कठिनाई के अपना सकते हैं। यह योग की मूलभूत प्रक्रियाओं में गिना जाता है और किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मुख्य स्वास्थ्य लाभ
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नाड़ी शोधन के नियमित अभ्यास से सर्दी, खाँसी और बलगम जैसे कफ संबंधी विकारों में उल्लेखनीय राहत मिलती है। साथ ही यह मन को स्थिर करता है और तनाव व चिंता के स्तर को कम करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके नियमित अभ्यास से मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में संतुलन बनता है, जिससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार होता है। आंतरिक ऊर्जा के प्रवाह को बेहतर बनाने में भी यह सहायक बताया गया है।
किनके लिए विशेष रूप से उपयोगी
योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्राणायाम उन लोगों के लिए खासतौर पर लाभकारी है जो ऑफिस वर्क, पढ़ाई या मानसिक दबाव वाली दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और मानसिक अस्थिरता को दूर करने में यह बेहद उपयोगी सिद्ध होता है। गौरतलब है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भारत में तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिसके मद्देनज़र ऐसी सरल और निःशुल्क तकनीकों का महत्व और बढ़ जाता है।
अभ्यास का सही तरीका
विशेषज्ञों की सलाह है कि सुबह खाली पेट 10-15 मिनट का अभ्यास शुरुआत के लिए पर्याप्त है। धीरे-धीरे इसे 20-30 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। बेहतर परिणामों के लिए योग गुरुओं के मार्गदर्शन में सही तकनीक सीखने की सलाह दी जाती है।
आयुष मंत्रालय का अभियान
मंत्रालय का 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' संकल्प इस वर्ष विश्व योग दिवस की थीम के अनुरूप है। इस अभियान के तहत नाड़ी शोधन सहित कई अन्य प्राणायाम तकनीकों को आम जनता तक पहुँचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 21 जून 2025 को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस से पहले देशभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।