क्या 'नाड़ी शोधन' दिल और दिमाग की सेहत के लिए वरदान है? सही विधि और सावधानियों को जानें
सारांश
Key Takeaways
- नाड़ी शोधन प्राणायाम मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
- इसका अभ्यास सभी उम्र के लोग कर सकते हैं।
- विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है अगर कोई गंभीर समस्या है।
- सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करना सर्वोत्तम है।
- सांस लेना-छोड़ना सहज होना चाहिए।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। योग और प्राणायाम शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस संदर्भ में, 'नाड़ी शोधन प्राणायाम' एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय के रूप में सामने आया है।
यह प्राणायाम न केवल श्वास को संतुलित करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह प्राणायाम सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं। हालांकि, यदि किसी को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो इसे करने से पहले एक विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।
आयुष मंत्रालय ने इस योगासन के महत्व पर भी प्रकाश डाला है। उनके मुताबिक, 'नाड़ी शोधन प्राणायाम' तनाव और चिंता को कम करने, मानसिक शांति प्रदान करने, एकाग्रता बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने, फेफड़ों को स्वस्थ रखने, रक्त संचार में सुधार करने और पाचन क्रिया को ठीक करने में सहायक है, जिससे मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है। इसे करने की विधि में एक नासिका से सांस लेना और दूसरी से छोड़ना शामिल है, और धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए।
इसका अभ्यास करने के लिए योग मेट पर सीधे बैठ जाएं। दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें और बायीं नासिका से गहरी सांस लें। फिर दाहिने हाथ की अनामिका और कनिष्ठा उंगली से बायीं नासिका को बंद कर दाहिनी नासिका से सांस छोड़ें। फिर दाहिनी नासिका से सांस लें और बायीं से छोड़ें। इस प्रक्रिया को दोहराएं। एक चक्र पूरा होने पर दोनों नासिकाओं से सामान्य श्वास लें। प्रारंभ में इसका अभ्यास 5 से 10 मिनट तक करना चाहिए।
सुबह के समय खाली पेट इसका अभ्यास सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि, कुछ सावधानियां बरतना भी आवश्यक है। इस प्राणायाम को कभी जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। सांस लेना-छोड़ना हमेशा सहज और स्वाभाविक होना चाहिए। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, या गंभीर नाक की समस्याओं वाले व्यक्तियों को योग प्रशिक्षक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।