क्या पीएसएलवी-सी62 मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी हुई?
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नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज सुबह लॉन्च किए गए पीएसएलवी-सी62 मिशन में रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा है। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि इस मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है।
पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) रॉकेट को ईओएस-एन1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और उसके साथ भेजे गए 15 अन्य छोटे उपग्रहों को सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित करना था। यह प्रक्षेपण सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले प्रक्षेपण पैड (एफएलपी) से किया गया।
प्रक्षेपण के बाद मीडिया से बात करते हुए इसरो के प्रमुख ने कहा कि तीसरे चरण के अंत में रॉकेट के मार्ग में गड़बड़ी देखी गई, जिससे मिशन आगे नहीं बढ़ सका।
उन्होंने कहा कि तीसरे चरण तक रॉकेट ने पूरी तरह से सही काम किया, लेकिन उसके बाद उड़ान में हल्का बदलाव आया। उन्होंने जानकारी दी कि वैज्ञानिकों की टीम सभी ग्राउंड स्टेशनों से मिले आंकड़ों का अध्ययन कर रही है।
डॉ. नारायणन ने बताया कि पीएसएलवी चार चरणों वाला रॉकेट होता है। इसका पहला चरण ठोस ईंधन का होता है, दूसरा तरल ईंधन का, तीसरा फिर ठोस ईंधन का और चौथा फिर तरल ईंधन का होता है। तीसरे चरण के अंत तक रॉकेट का प्रदर्शन अनुमान के अनुसार था।
उन्होंने बताया कि तीसरे चरण के अंत में रॉकेट में हलचल दिखी और उसका मार्ग बदल गया। इसी कारण मिशन सफल नहीं हो पाया। पूरी जांच के बाद ही अगले कदम की जानकारी दी जाएगी।
इससे पहले मई 2025 में लॉन्च हुए पीएसएलवी-सी61 मिशन में भी तीसरे चरण में तकनीकी समस्या आई थी। उस मिशन का उद्देश्य ईओएस-09 उपग्रह को 505 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका।
पीएसएलवी-सी62 मिशन साल 2026 का पहला अंतरिक्ष प्रक्षेपण था और यह पीएसएलवी की 64वीं उड़ान थी।
ईओएस-एन1 उपग्रह, जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है, का उद्देश्य खेती, शहरों की योजना और पर्यावरण पर नजर रखने की भारत की क्षमता को मजबूत करना था।
इस मिशन के तहत स्पेन की एक स्टार्टअप द्वारा विकसित केआईडी या केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर का भी प्रदर्शन किया जाना था, जो एक छोटे पुनःप्रवेश यान का प्रारूप है।
यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड द्वारा किया गया नौवां कमर्शियल मिशन था।
यह लॉन्च पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट का उपयोग करने वाला पांचवां मिशन था, जिसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर लगे थे।
पीएसएलवी अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। इसके प्रमुख मिशनों में चंद्रयान-1, मंगल कक्षा मिशन, आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट शामिल हैं। वर्ष 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रह लॉन्च कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।