27 जून 2026
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राम मंदिर चढ़ावा घोटाले और गाजा नीति पर कांग्रेस का हमला, अखिलेश प्रताप सिंह ने SC निगरानी में जांच की मांग की

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राम मंदिर चढ़ावा घोटाले और गाजा नीति पर कांग्रेस का हमला, अखिलेश प्रताप सिंह ने SC निगरानी में जांच की मांग की

सारांश

कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की। साथ ही गाजा पर भारत की विदेश नीति को पारंपरिक मूल्यों से भटका बताते हुए सोनिया गांधी की आलोचना का समर्थन किया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने 27 जून 2026 को राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी की जांच को निष्पक्ष नहीं बताया।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में हो।
आरोप लगाया कि एफआईआर में केवल छोटे कर्मचारियों के नाम हैं; ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं।
कांग्रेस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग की, कहा — लोगों का भरोसा नहीं बचा।
गाजा मुद्दे पर सोनिया गांधी की विदेश नीति आलोचना का समर्थन किया; भारत के परंपरागत स्वतंत्र रुख को बनाए रखने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल, आरोप — प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है।

कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने 27 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार पर दोहरे मोर्चे पर हमला बोला — श्रीराम मंदिर चढ़ावा मामले में चल रही जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए और गाजा संघर्ष पर भारत की विदेश नीति को पारंपरिक मूल्यों से भटका हुआ बताते हुए। उन्होंने पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।

राम मंदिर चढ़ावा मामले में क्या है आरोप

अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि जब कांग्रेस ने इस मामले को पहली बार सार्वजनिक किया था, तब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया था। उनके अनुसार, जैसे-जैसे मामले की परतें खुलती गईं, करोड़ों रुपए के कथित घोटालों की बातें सामने आने लगीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और बाद में जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। उनका कहना है कि मंदिर ट्रस्ट शुरुआत से ही भूमि खरीद और अन्य वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं के आरोपों के घेरे में रहा है।

एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल

कांग्रेस नेता ने एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, दर्ज एफआईआर में केवल छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि ट्रस्ट में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से काम करती दिखाई नहीं दे रही।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ट्रस्ट के ही एक सदस्य ने इस मामले को साधारण चोरी नहीं, बल्कि 'मंदिर के चढ़ावे पर डाका' बताया था। इस संदर्भ में उन्होंने मौजूदा ट्रस्ट को भंग करने की मांग की, यह कहते हुए कि उस पर लोगों का भरोसा नहीं बचा है।

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल

अखिलेश प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पूरे प्रकरण में चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, इसीलिए शीर्ष स्तर पर मौन साधा गया है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामले पहले से ही राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं और विपक्ष जवाबदेही की माँग करता रहा है।

गाजा मुद्दे पर विदेश नीति की आलोचना

गाजा संघर्ष पर कांग्रेस संसदीय दल की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की आलोचना का समर्थन करते हुए अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सोनिया गांधी ने जो बातें उठाई हैं, वे पूरी तरह उचित हैं। उनके अनुसार, भारत की विदेश नीति हमेशा से मूल्यों और संतुलन पर आधारित रही है तथा देश ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में स्वतंत्र और स्वायत्त दृष्टिकोण अपनाया है।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरागत विदेश नीति किसी भी देश के सामने झुकने की नहीं रही और वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता तथा संतुलित कूटनीतिक छवि को बनाए रखना आवश्यक है। आलोचकों का कहना है कि गाजा मुद्दे पर भारत का रुख उसकी ऐतिहासिक फिलिस्तीन समर्थक स्थिति से अलग दिखाई देता है।

कांग्रेस की मांगें और आगे की राह

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले में सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच, मौजूदा ट्रस्ट को भंग करने और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की माँग पर अडिग है। विदेश नीति के मोर्चे पर पार्टी चाहती है कि भारत अपने स्थापित मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र कूटनीतिक रुख अपनाए। दोनों मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि विपक्ष ने यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया जब ट्रस्ट गठन के शुरुआती दौर में अनियमितताओं की चर्चा थी। एसआईटी में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई का आरोप गंभीर है और इसे सत्यापित करने की जरूरत है — यदि सच है, तो यह जांच की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। गाजा पर विदेश नीति की आलोचना भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की परंपरा के संदर्भ में वैध बहस है, लेकिन इसे घरेलू राजनीतिक हमले के साथ जोड़ना इसकी गंभीरता को कमज़ोर कर सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा मामले में कांग्रेस क्या मांग कर रही है?
कांग्रेस ने मांग की है कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। साथ ही पार्टी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की भी मांग की है।
एसआईटी की जांच पर कांग्रेस को क्या आपत्ति है?
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह का आरोप है कि दर्ज एफआईआर में केवल छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि ट्रस्ट में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार एसआईटी निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से काम करती नहीं दिख रही।
गाजा मुद्दे पर कांग्रेस की क्या स्थिति है?
कांग्रेस का कहना है कि गाजा संघर्ष पर भारत की विदेश नीति देश के पारंपरिक मूल्यों और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख से भटक रही है। पार्टी ने पूर्व कांग्रेस संसदीय दल अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति संबंधी आलोचना का समर्थन किया है।
राम मंदिर ट्रस्ट पर पहले भी आरोप लगे हैं?
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, भूमि खरीद और अन्य वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। ट्रस्ट के ही एक सदस्य ने कथित तौर पर इस मामले को 'मंदिर के चढ़ावे पर डाका' बताया था, हालांकि ट्रस्ट ने शुरुआत में किसी गड़बड़ी से इनकार किया था।
प्रधानमंत्री मोदी की इस मामले में क्या भूमिका बताई जा रही है?
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पूरे प्रकरण में चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, जो कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों को बचाने के प्रयास की ओर संकेत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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