19 जुलाई 2026
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शीतली प्राणायाम: बुज़ुर्गों के लिए तन-मन की गर्मी से राहत का आयुष मंत्रालय का नुस्खा

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शीतली प्राणायाम: बुज़ुर्गों के लिए तन-मन की गर्मी से राहत का आयुष मंत्रालय का नुस्खा

सारांश

भीषण गर्मी में बुज़ुर्गों के तन-मन की तपन को शांत करने के लिए आयुष मंत्रालय ने शीतली प्राणायाम की सिफ़ारिश की है। योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ के तहत यह अभ्यास ब्लड प्रेशर, अनिद्रा और चिड़चिड़ेपन में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय बताया गया है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने बुज़ुर्गों के लिए शीतली प्राणायाम को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है।
योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ रखी गई है।
शुरुआत में 5 से 10 बार अभ्यास करें; सुबह-शाम का समय सर्वोत्तम।
नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर नियंत्रण, पाचन सुधार व अनिद्रा में राहत मिलने का दावा।
जीभ को नली के आकार में मोड़कर मुँह से सांस लें, नाक से छोड़ें — यही मूल विधि है।

आयुष मंत्रालय ने देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच बुज़ुर्गों को शारीरिक और मानसिक तपन से राहत देने के लिए शीतली प्राणायाम को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है। यह सिफ़ारिश अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ के अनुरूप है, और इसका लक्ष्य उम्र के हर पड़ाव पर संतुलन व खुशहाली सुनिश्चित करना है।

शीतली प्राणायाम क्या है

यह एक प्राचीन योगिक श्वास अभ्यास है जिसमें जीभ को बाहर निकालकर नली के आकार में मोड़ा जाता है और मुँह से धीरे-धीरे सांस अंदर खींची जाती है। इसके बाद मुँह बंद करके नाक से सांस बाहर छोड़ी जाती है। मंत्रालय के अनुसार यह सरल अभ्यास शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित करता है और तनाव कम करने में सहायक है।

बुज़ुर्गों के लिए क्यों उपयोगी

बढ़ती उम्र में शरीर में गर्मी बढ़ने, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और जोड़ों की समस्याएँ आम हो जाती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, पाचन तंत्र मज़बूत होता है और गर्मियों में होने वाली थकान, जलन तथा मानसिक बेचैनी में कमी आती है। मौसमी बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और बुज़ुर्गों पर पड़ता है, इसलिए इस आयु वर्ग के लिए यह अभ्यास विशेष रूप से अनुशंसित बताया गया है।

सही तरीक़ा और अवधि

अभ्यास के लिए शांत और साफ़ जगह पर आसन लगाकर बैठें, आँखें बंद रखें और शरीर को ढीला छोड़ दें। जीभ को बाहर निकालकर नली जैसा आकार दें, मुँह से धीरे-धीरे सांस अंदर लें, फिर मुँह बंद करके नाक से सांस छोड़ें। शुरुआत में 5 से 10 बार करें और बाद में अवधि बढ़ाई जा सकती है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में सुबह और शाम का समय इस अभ्यास के लिए सबसे उपयुक्त है। उनका कहना है कि यह न केवल शारीरिक गर्मी को कम करता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। बढ़ती उम्र में यह ऊर्जा बनाए रखने और तनाव-मुक्त जीवन जीने में सहायक सिद्ध होता है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि योग दिवस 2026 की थीम पहली बार स्पष्ट रूप से ‘स्वस्थ बुढ़ापे’ पर केंद्रित है, जो भारत की तेज़ी से बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी की ज़रूरतों को रेखांकित करती है। मंत्रालय ऐसे आसान योग अभ्यासों को बढ़ावा दे रहा है जो दवाओं पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक तरीक़े से जीवन-गुणवत्ता सुधार सकें। आने वाले हफ्तों में मंत्रालय द्वारा और भी प्राणायाम व आसन-आधारित सलाहें जारी किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

गैर-औषधीय हस्तक्षेप मूल्यवान हैं, परन्तु इन्हें गंभीर हृदय या रक्तचाप संबंधी स्थितियों में चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। आयुष मंत्रालय की सलाहें तभी प्रभावी होंगी जब वे ज़मीनी स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ एकीकृत हों, न कि केवल मौसमी प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रहें।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीतली प्राणायाम क्या है और इसे कैसे किया जाता है?
शीतली प्राणायाम एक योगिक श्वास अभ्यास है जिसमें जीभ को बाहर निकालकर नली के आकार में मोड़ा जाता है और मुँह से धीरे-धीरे सांस अंदर ली जाती है, फिर मुँह बंद करके नाक से छोड़ी जाती है। यह शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित करने के लिए किया जाता है।
आयुष मंत्रालय ने बुज़ुर्गों को यह अभ्यास क्यों सुझाया है?
भीषण गर्मी में बुज़ुर्गों को शारीरिक और मानसिक तपन, चिड़चिड़ापन व अनिद्रा जैसी समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है। मंत्रालय के अनुसार शीतली प्राणायाम इन समस्याओं को प्राकृतिक तरीक़े से कम करने में सहायक है।
शीतली प्राणायाम के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
मंत्रालय के अनुसार नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, पाचन तंत्र मज़बूत होता है तथा थकान, जलन और तनाव में कमी आती है। यह मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम क्या है?
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ रखी गई है। इसका उद्देश्य उम्र के हर पड़ाव पर स्वास्थ्य, संतुलन और खुशहाली बनाए रखने वाले आसान योग अभ्यासों को बढ़ावा देना है।
शीतली प्राणायाम कब और कितनी बार करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में सुबह और शाम का समय सबसे उपयुक्त है। शुरुआत में 5 से 10 बार करें और अभ्यास बढ़ने के साथ अवधि क्रमशः बढ़ाई जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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