शीतली प्राणायाम: बुज़ुर्गों के लिए तन-मन की गर्मी से राहत का आयुष मंत्रालय का नुस्खा
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच बुज़ुर्गों को शारीरिक और मानसिक तपन से राहत देने के लिए शीतली प्राणायाम को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है। यह सिफ़ारिश अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग’ के अनुरूप है, और इसका लक्ष्य उम्र के हर पड़ाव पर संतुलन व खुशहाली सुनिश्चित करना है।
शीतली प्राणायाम क्या है
यह एक प्राचीन योगिक श्वास अभ्यास है जिसमें जीभ को बाहर निकालकर नली के आकार में मोड़ा जाता है और मुँह से धीरे-धीरे सांस अंदर खींची जाती है। इसके बाद मुँह बंद करके नाक से सांस बाहर छोड़ी जाती है। मंत्रालय के अनुसार यह सरल अभ्यास शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित करता है और तनाव कम करने में सहायक है।
बुज़ुर्गों के लिए क्यों उपयोगी
बढ़ती उम्र में शरीर में गर्मी बढ़ने, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और जोड़ों की समस्याएँ आम हो जाती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, पाचन तंत्र मज़बूत होता है और गर्मियों में होने वाली थकान, जलन तथा मानसिक बेचैनी में कमी आती है। मौसमी बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और बुज़ुर्गों पर पड़ता है, इसलिए इस आयु वर्ग के लिए यह अभ्यास विशेष रूप से अनुशंसित बताया गया है।
सही तरीक़ा और अवधि
अभ्यास के लिए शांत और साफ़ जगह पर आसन लगाकर बैठें, आँखें बंद रखें और शरीर को ढीला छोड़ दें। जीभ को बाहर निकालकर नली जैसा आकार दें, मुँह से धीरे-धीरे सांस अंदर लें, फिर मुँह बंद करके नाक से सांस छोड़ें। शुरुआत में 5 से 10 बार करें और बाद में अवधि बढ़ाई जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में सुबह और शाम का समय इस अभ्यास के लिए सबसे उपयुक्त है। उनका कहना है कि यह न केवल शारीरिक गर्मी को कम करता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। बढ़ती उम्र में यह ऊर्जा बनाए रखने और तनाव-मुक्त जीवन जीने में सहायक सिद्ध होता है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि योग दिवस 2026 की थीम पहली बार स्पष्ट रूप से ‘स्वस्थ बुढ़ापे’ पर केंद्रित है, जो भारत की तेज़ी से बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी की ज़रूरतों को रेखांकित करती है। मंत्रालय ऐसे आसान योग अभ्यासों को बढ़ावा दे रहा है जो दवाओं पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक तरीक़े से जीवन-गुणवत्ता सुधार सकें। आने वाले हफ्तों में मंत्रालय द्वारा और भी प्राणायाम व आसन-आधारित सलाहें जारी किए जाने की संभावना है।