शीतली प्राणायाम: गर्मी में तन और मन को रखें ठंडा, जानें सही विधि

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शीतली प्राणायाम: गर्मी में तन और मन को रखें ठंडा, जानें सही विधि

सारांश

गर्मी के इस मौसम में शीतली प्राणायाम एक अद्भुत उपाय है। जानें कैसे यह श्वास तकनीक तन और मन को ठंडक पहुंचाने में मदद करती है।

मुख्य बातें

शीतली प्राणायाम से तन और मन को ठंडक मिलती है।
यह गर्मियों में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रभावी है।
सही तरीके से करने पर यह मानसिक शांति देता है।
रोजाना 5 से 10 मिनट का अभ्यास करना चाहिए।
विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इस समय देशभर में गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है। चिलचिलाती धूप, उमस और लू के थपेड़ों के चलते स्वास्थ्य को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में तन और मन को ठंडक प्रदान करने का एक सरल और प्राकृतिक उपाय है शीतली प्राणायाम

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा प्रमोट किया गया यह योगिक श्वास अभ्यास गर्मियों में बहुत प्रभावी होता है। यह शरीर को आंतरिक रूप से ठंडक पहुंचाता है और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत देता है। शीतली प्राणायाम का नाम ही इसके गुणों को दर्शाता है, यह शरीर और मन को शीतल (ठंडा) बनाए रखता है।

यह एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें जीभ को नलिका (ट्यूब) की भांति मोड़कर या गोल करके मुंह से हवा अंदर खींची जाती है। ठंडी हवा सीधे गले और शरीर में प्रवाहित होती है, जिससे तुरंत ठंडक का अनुभव होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ रोजाना 5 से 10 मिनट इसे करने की सलाह देते हैं।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, शीतली प्राणायाम कई तरीकों से लाभकारी है। यह लू और हीट स्ट्रोक से बचाता है। तनाव, चिंता और गुस्से को कम करता है, जिससे मन शांत रहता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह अत्यंत उपयोगी है। पेट की गर्मी कम होती है, जिससे एसिडिटी, कब्ज, गैस और कच्ची डकार जैसी समस्याएं घटती हैं। उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए भी यह फायदेमंद है। यह हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

इसके अतिरिक्त, शीतली प्राणायाम त्वचा को भी चमकदार बनाता है। गर्मी से उत्पन्न रैशेज और जलन में भी राहत मिलती है। रात को सोने से पहले इसे करने से गहरी और अच्छी नींद आती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शीतली प्राणायाम के लिए सुबह खाली पेट एक शांत स्थान पर सुखासन या पद्मासन में बैठें। जीभ को बाहर निकालकर नलिका की तरह मोड़ें (या होंठों से गोल करें)। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे ठंडी हवा अंदर खींचें। फिर सांस को कुछ सेकंड रोकें और नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इसे 5 से 10 बार दोहराना चाहिए।

सर्दी-जुकाम, दमा या गले की समस्याओं वाले व्यक्तियों को योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही इसे करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो गर्मियों में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है। इसे अपनाने से व्यक्ति न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, बल्कि मानसिक शांति भी पा सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीतली प्राणायाम क्या है?
यह एक योगिक श्वास तकनीक है, जिसमें जीभ को नलिका की तरह मोड़कर ठंडी हवा को अंदर खींचा जाता है।
शीतली प्राणायाम के क्या लाभ हैं?
यह लू, तनाव, पेट की गर्मी और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से राहत देता है।
कितनी बार शीतली प्राणायाम करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ रोजाना 5 से 10 मिनट करने की सलाह देते हैं।
क्या शीतली प्राणायाम सभी के लिए सुरक्षित है?
सर्दी-जुकाम, दमा या गले की समस्याओं वाले व्यक्तियों को योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही इसे करना चाहिए।
शीतली प्राणायाम करने का सही समय क्या है?
सुबह खाली पेट इसे करने का सबसे बेहतर समय है।
राष्ट्र प्रेस
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