नागा शांति दूत निकेटु इरालू का निधन, जेडडब्ल्यूए ने 'नैतिक मार्गदर्शक' को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
अनुभवी नागा शांति कार्यकर्ता और सुलह-समझौते के पैरोकार निकेटु इरालू का निधन 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हो गया। उनके जाने से नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत में शांति-निर्माण की छह दशकों से अधिक लंबी यात्रा का एक अध्याय समाप्त हो गया है। नागालैंड और पूर्वोत्तर के विभिन्न संगठनों और व्यक्तित्वों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
जेडडब्ल्यूए की श्रद्धांजलि
जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेडडब्ल्यूए), दिल्ली ने एक शोक संदेश जारी कर इरालू को नागा लोगों और समूचे पूर्वोत्तर के लिए एक 'नैतिक मार्गदर्शक' बताया। एसोसिएशन ने शांति, आपसी समझ और सुलह के लिए उनकी छह दशकों से अधिक की समर्पित सेवा को याद किया और कहा कि उनके निधन से सद्भाव और एकता की सामूहिक यात्रा में एक अपूरणीय कमी आ गई है।
शांति-निर्माण में अहम भूमिका
इरालू 'फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन' (एफएनआर), 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज' और अपने प्रिय 'केरुन्यू की' (हाउस ऑफ लिसनिंग) जैसे मंचों के माध्यम से राजनीतिक, सामाजिक और जातीय मतभेदों को पाटने का काम करते रहे। बहुत से लोग उन्हें प्यार से 'अंकल निकेटू' कहते थे। उनका घर 'केरुन्यू की' एक ऐसी जगह बन गया था जहाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आकर एक-दूसरे की बात सुन सकते थे और आपसी समझ विकसित कर सकते थे। वे 'नागा रिकॉन्सिलिएशन कमीशन' (नागा मेल-मिलाप आयोग) के अध्यक्ष के रूप में भी सेवा कर चुके थे।
पुरस्कार और सम्मान
शांति-निर्माण और सामाजिक सद्भाव में उनके अतुलनीय योगदान के लिए इरालू को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। 2019 में उन्हें 'डिस्टिंग्विश्ड सीनियर सिटिजन्स अवॉर्ड', 2023 में 'डॉ. भूपेन हजारिका इंटीग्रेशन अवॉर्ड' और 2025 में 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवर अवॉर्ड' से नवाज़ा गया। ये सम्मान इस बात के प्रमाण हैं कि उनके प्रयासों को देश और दुनिया दोनों में मान्यता मिली।
परिवार के प्रति संवेदना
जेडडब्ल्यूए ने इरालू के विनम्र स्वभाव, बुद्धिमानी और मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण को याद करते हुए उनकी पत्नी क्रिस्टीन इरालू, परिवार के सदस्यों, मित्रों और उन सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्हें उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा मिली। एसोसिएशन ने प्रार्थना की कि ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस कठिन घड़ी में शक्ति और सांत्वना प्रदान करें।
विरासत और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब नागालैंड में शांति प्रक्रिया अभी भी नाज़ुक दौर से गुज़र रही है। जेडडब्ल्यूए ने कहा कि इरालू की विरासत — बातचीत, सहानुभूति, क्षमा और आपसी समझ के मूल्यों पर आधारित — शांति और मेल-मिलाप के लिए काम करने वाली आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।