21 अगस्त 2026
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नागा शांति दूत निकेटु इरालू का निधन, जेडडब्ल्यूए ने 'नैतिक मार्गदर्शक' को दी श्रद्धांजलि

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नागा शांति दूत निकेटु इरालू का निधन, जेडडब्ल्यूए ने 'नैतिक मार्गदर्शक' को दी श्रद्धांजलि

सारांश

नागालैंड की शांति यात्रा के सबसे विश्वसनीय स्तंभों में से एक निकेटु इरालू अब नहीं रहे। छह दशकों की सेवा, तीन बड़े पुरस्कार और 'केरुन्यू की' जैसा अनूठा संवाद-मंच — उनकी विरासत उस पूर्वोत्तर के लिए दिशा-संकेत बनी रहेगी जो अभी भी स्थायी शांति की तलाश में है।

मुख्य बातें

नागा शांति कार्यकर्ता निकेटु इरालू का निधन 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुआ।
जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेडडब्ल्यूए) , दिल्ली ने उन्हें नागा लोगों का 'नैतिक मार्गदर्शक' बताते हुए श्रद्धांजलि दी।
इरालू फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन (एफएनआर) , इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज और 'केरुन्यू की' (हाउस ऑफ लिसनिंग) से जुड़े रहे।
वे नागा रिकॉन्सिलिएशन कमीशन के अध्यक्ष भी रह चुके थे।
उन्हें 2019 में 'डिस्टिंग्विश्ड सीनियर सिटिजन्स अवॉर्ड', 2023 में 'डॉ.
भूपेन हजारिका इंटीग्रेशन अवॉर्ड' और 2025 में 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवर अवॉर्ड' मिला।
उनकी पत्नी क्रिस्टीन इरालू सहित परिवार के प्रति नागालैंड और पूर्वोत्तर के संगठनों ने संवेदना व्यक्त की।

अनुभवी नागा शांति कार्यकर्ता और सुलह-समझौते के पैरोकार निकेटु इरालू का निधन 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हो गया। उनके जाने से नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत में शांति-निर्माण की छह दशकों से अधिक लंबी यात्रा का एक अध्याय समाप्त हो गया है। नागालैंड और पूर्वोत्तर के विभिन्न संगठनों और व्यक्तित्वों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

जेडडब्ल्यूए की श्रद्धांजलि

जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेडडब्ल्यूए), दिल्ली ने एक शोक संदेश जारी कर इरालू को नागा लोगों और समूचे पूर्वोत्तर के लिए एक 'नैतिक मार्गदर्शक' बताया। एसोसिएशन ने शांति, आपसी समझ और सुलह के लिए उनकी छह दशकों से अधिक की समर्पित सेवा को याद किया और कहा कि उनके निधन से सद्भाव और एकता की सामूहिक यात्रा में एक अपूरणीय कमी आ गई है।

शांति-निर्माण में अहम भूमिका

इरालू 'फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन' (एफएनआर), 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज' और अपने प्रिय 'केरुन्यू की' (हाउस ऑफ लिसनिंग) जैसे मंचों के माध्यम से राजनीतिक, सामाजिक और जातीय मतभेदों को पाटने का काम करते रहे। बहुत से लोग उन्हें प्यार से 'अंकल निकेटू' कहते थे। उनका घर 'केरुन्यू की' एक ऐसी जगह बन गया था जहाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आकर एक-दूसरे की बात सुन सकते थे और आपसी समझ विकसित कर सकते थे। वे 'नागा रिकॉन्सिलिएशन कमीशन' (नागा मेल-मिलाप आयोग) के अध्यक्ष के रूप में भी सेवा कर चुके थे।

पुरस्कार और सम्मान

शांति-निर्माण और सामाजिक सद्भाव में उनके अतुलनीय योगदान के लिए इरालू को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। 2019 में उन्हें 'डिस्टिंग्विश्ड सीनियर सिटिजन्स अवॉर्ड', 2023 में 'डॉ. भूपेन हजारिका इंटीग्रेशन अवॉर्ड' और 2025 में 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवर अवॉर्ड' से नवाज़ा गया। ये सम्मान इस बात के प्रमाण हैं कि उनके प्रयासों को देश और दुनिया दोनों में मान्यता मिली।

परिवार के प्रति संवेदना

जेडडब्ल्यूए ने इरालू के विनम्र स्वभाव, बुद्धिमानी और मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण को याद करते हुए उनकी पत्नी क्रिस्टीन इरालू, परिवार के सदस्यों, मित्रों और उन सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्हें उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा मिली। एसोसिएशन ने प्रार्थना की कि ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस कठिन घड़ी में शक्ति और सांत्वना प्रदान करें।

विरासत और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब नागालैंड में शांति प्रक्रिया अभी भी नाज़ुक दौर से गुज़र रही है। जेडडब्ल्यूए ने कहा कि इरालू की विरासत — बातचीत, सहानुभूति, क्षमा और आपसी समझ के मूल्यों पर आधारित — शांति और मेल-मिलाप के लिए काम करने वाली आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि व्यक्तिगत विश्वसनीयता से आती थी। 'केरुन्यू की' जैसे अनौपचारिक संवाद-मंच अक्सर वह काम कर देते हैं जो राजनयिक मेज़ें नहीं कर पातीं — और इरालू इसके जीते-जागते उदाहरण थे। सवाल यह है कि उनके बाद यह भूमिका कौन निभाएगा, क्योंकि नागालैंड में शांति वार्ता अभी भी अनिश्चितता के दौर में है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निकेटु इरालू कौन थे?
निकेटु इरालू एक वरिष्ठ नागा शांति कार्यकर्ता और सुलह-समझौते के पैरोकार थे, जिन्होंने नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत में छह दशकों से अधिक समय तक शांति और आपसी समझ के लिए काम किया। वे 'नागा रिकॉन्सिलिएशन कमीशन' के अध्यक्ष और 'फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन' से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व थे।
निकेटु इरालू का निधन कब और कहाँ हुआ?
निकेटु इरालू का निधन 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुआ। उनके निधन पर नागालैंड और पूर्वोत्तर के विभिन्न संगठनों ने शोक व्यक्त किया।
'केरुन्यू की' क्या था?
'केरुन्यू की' का अर्थ है 'हाउस ऑफ लिसनिंग' — यह निकेटु इरालू का घर था जो विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों के लिए एक संवाद-मंच बन गया था। यहाँ अलग-अलग राजनीतिक, सामाजिक और जातीय पृष्ठभूमि के लोग एक-दूसरे की बात सुनने और आपसी समझ विकसित करने के लिए एकत्र होते थे।
निकेटु इरालू को कौन-से प्रमुख पुरस्कार मिले?
इरालू को 2019 में 'डिस्टिंग्विश्ड सीनियर सिटिजन्स अवॉर्ड', 2023 में 'डॉ. भूपेन हजारिका इंटीग्रेशन अवॉर्ड' और 2025 में 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था।
जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन ने इरालू को किस रूप में याद किया?
जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेडडब्ल्यूए), दिल्ली ने इरालू को नागा लोगों और पूरे पूर्वोत्तर के लिए एक 'नैतिक मार्गदर्शक' बताया। एसोसिएशन ने उनके विनम्र स्वभाव, बुद्धिमानी और मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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