मदर टेरेसा जयंती पर देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, खड़गे से नायडू तक बोले — सेवा ही सच्ची दिव्यता
सारांश
मुख्य बातें
मदर टेरेसा की जयंती पर बुधवार, 26 अगस्त को देशभर के राजनेताओं और मुख्यमंत्रियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नोबेल शांति पुरस्कार और भारत रत्न से सम्मानित इस महान विभूति के जीवन को नेताओं ने करुणा, सेवा और मानवता के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे का संदेश
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर मदर टेरेसा का प्रसिद्ध कथन साझा करते हुए लिखा, 'प्यारे शब्द छोटे और बोलने में आसान हो सकते हैं, लेकिन उनकी गूंज सचमुच कभी खत्म नहीं होती।' उन्होंने कहा कि मदर टेरेसा की अमिट विरासत हमें याद दिलाती है कि दया, सम्मान और दूसरों की देखभाल कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने लिखा कि मदर टेरेसा करुणा का एक स्थायी प्रतीक बनी हुई हैं और जरूरतमंदों के प्रति उनके जीवन भर के समर्पण में हर इंसान के सम्मान में गहरा विश्वास झलकता था। उनका जीवन दया और विनम्रता के साथ सेवा करने की प्रेरणा देता रहेगा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा, 'साथी इंसानों के दुख को दूर करना ही सच्ची दिव्यता है।' उन्होंने मदर टेरेसा के उस समर्पण को याद किया जिसमें उन्होंने गरीबी और प्यार की कमी से जूझ रहे बेसहारा लोगों को अपनाया और सेवा की।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मदर टेरेसा को सेवा, करुणा और मानवता की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उनका सेवाभाव हमें सदैव मानवता के प्रति समर्पित रहने की सीख देता है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP — शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने मदर टेरेसा का कथन उद्धृत किया — 'शांति की शुरुआत मुस्कान से होती है' — और दुखी व पीड़ित लोगों की सेवा को उनका परम लक्ष्य बताया।
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मदर टेरेसा ने अपना संपूर्ण जीवन असहाय, पीड़ित और जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका त्याग, प्रेम और सेवा-भाव सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
मदर टेरेसा की विरासत
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को हुआ था। उन्होंने कोलकाता में दशकों तक गरीबों, बीमारों और असहायों की सेवा की और मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जो आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में सक्रिय है। 1979 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि 2016 में वेटिकन ने उन्हें संत घोषित किया — यह उनकी वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
राजनीतिक एकजुटता का संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण चर्चा में है — फिर भी विभिन्न दलों के नेताओं ने एकस्वर में मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि दी। यह दिखाता है कि सेवा और करुणा के मूल्य दलीय सीमाओं से परे हैं। उनकी जयंती हर वर्ष समाज को मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का अवसर देती है।