7 अक्टूबर 2026
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नगांव लोकसभा उपचुनाव: 19.05 लाख में से 76% मतदान, भाजपा-कांग्रेस-एआईयूडीएफ में त्रिकोणीय टक्कर

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नगांव लोकसभा उपचुनाव: 19.05 लाख में से 76% मतदान, भाजपा-कांग्रेस-एआईयूडीएफ में त्रिकोणीय टक्कर

सारांश

नगांव लोकसभा उपचुनाव महज एक रिक्त सीट भरने की कवायद नहीं — यह कांग्रेस के गढ़ में भाजपा की सेंधमारी और एआईयूडीएफ के वोट-काटू रोल की असली परीक्षा है। 76% मतदान बताता है कि मतदाता इस चुनाव को असाधारण मान रहे हैं। 9 अक्टूबर का फैसला असम की राजनीति की अगली इबारत लिखेगा।

मुख्य बातें

नगांव लोकसभा उपचुनाव में 6 अक्टूबर 2026 को 19.05 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 76% ने मतदान किया।
मुख्य मुकाबला भाजपा के देवाशीष शर्मा , कांग्रेस के सिबामनी बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के बीच है।
उपचुनाव प्रद्युत बोरदोलोई के 20 मार्च 2026 को लोकसभा से इस्तीफे के बाद कराया गया; वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा से विधायक बने।
कांग्रेस नेता रकीबुल हुसैन ने समागुरी क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
2019 से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा; मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को होगी।

असम की नगांव लोकसभा सीट पर सोमवार, 6 अक्टूबर 2026 को हुए उपचुनाव में 19.05 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 76 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। शाम 5 बजे मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और 9 अक्टूबर को मतगणना में सभी 15 उम्मीदवारों का भाग्य तय होगा। मुख्य मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के बीच है।

मुख्य घटनाक्रम

नगांव संसदीय क्षेत्र में मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम तक आठों विधानसभा खंडों में लगभग सुचारू रूप से चला। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि अंतिम मतदान प्रतिशत और बढ़ सकता है, क्योंकि तय समय से पहले पोलिंग स्टेशन पहुँचे मतदाताओं को भी वोट डालने दिया गया।

मैदान में 15 उम्मीदवार हैं, जिनमें प्रमुख दावेदार हैं — भाजपा के देवाशीष शर्मा, कांग्रेस के सिबामनी बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल। तीनों पार्टियों की सक्रिय उपस्थिति के बावजूद मतदाताओं में उत्साह स्पष्ट दिखा।

उपचुनाव की पृष्ठभूमि

यह उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई के 20 मार्च 2026 को इस्तीफे के बाद आवश्यक हुआ। बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की, जिससे नगांव लोकसभा सीट रिक्त हो गई।

गौरतलब है कि 2019 में बोरदोलोई ने भाजपा के रूपक शर्मा को बेहद कम अंतर से हराया था और 2024 में पुनः भाजपा के सुरेश बोराह को हराकर कांग्रेस ने इस सीट पर पकड़ मजबूत की थी। यानी 2019 से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब असम में भाजपा अपनी राज्यव्यापी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, और एआईयूडीएफ अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने की कोशिश में है। इस त्रिकोणीय मुकाबले में मतविभाजन किसका फायदा और किसका नुकसान करेगा, यह नतीजों से स्पष्ट होगा।

विपक्ष के आरोप और प्रशासन का रुख

कांग्रेस नेता और धुबरी के लोकसभा सदस्य रकीबुल हुसैन ने दिन में आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के कई मतदान केंद्रों में अज्ञात व्यक्ति घुसे और मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने सीधे भाजपा पर इसका आरोप लगाया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव अधिकारियों ने कहा कि पूरे निर्वाचन क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी और मतदान प्रक्रिया समग्र रूप से शांतिपूर्ण रही।

आम जनता और राजनीतिक महत्व

नगांव असम के सबसे महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्रों में से एक है। 76 प्रतिशत मतदान यह संकेत देता है कि मतदाताओं ने इस उपचुनाव को गंभीरता से लिया, जो अक्सर उपचुनावों में कम दिखता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस के लिए यह सीट अपने पास बनाए रखना साख का सवाल है — खासकर तब जब उनके ही पूर्व सांसद ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया। वहीं एआईयूडीएफ की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण इस सीट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

क्या होगा आगे

मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। नतीजे न केवल नगांव की राजनीतिक दिशा बताएंगे, बल्कि असम में तीनों प्रमुख दलों की ताकत का भी वास्तविक आकलन देंगे। यह उपचुनाव आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेतक माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यहाँ मतदाताओं ने संकेत दिया कि दाँव बड़े हैं। असली पहेली यह है कि एआईयूडीएफ की उपस्थिति किसके वोट काटती है — अगर वह कांग्रेस के अल्पसंख्यक आधार में सेंध लगाती है, तो भाजपा बिना बड़े स्विंग के भी जीत सकती है। बोरदोलोई का पाला-बदलना और फिर भाजपा की टिकट पर चुनाव जीतना असम में दलीय निष्ठाओं की नाजुकता का ताज़ा उदाहरण है, और मुख्यधारा की कवरेज इस बारीकियत को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नगांव लोकसभा उपचुनाव क्यों हुआ?
कांग्रेस के तत्कालीन सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने 20 मार्च 2026 को लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे भाजपा में शामिल होकर दिसपुर विधानसभा सीट से जीते, जिससे नगांव सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव अनिवार्य हो गया।
नगांव उपचुनाव में कितना मतदान हुआ और गिनती कब है?
6 अक्टूबर 2026 को हुए मतदान में 19.05 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 76 प्रतिशत ने वोट डाले। मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को होगी।
नगांव उपचुनाव में मुख्य उम्मीदवार कौन हैं?
मैदान में कुल 15 उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा के देवाशीष शर्मा, कांग्रेस के सिबामनी बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के बीच है।
कांग्रेस ने मतदान के दिन क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता और धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन ने आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के कई मतदान केंद्रों में अज्ञात लोग घुसे और भाजपा ने मतदान प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशिश की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नगांव सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
नगांव सीट 2019 से कांग्रेस के पास रही है। 2019 में प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा के रूपक शर्मा को और 2024 में भाजपा के सुरेश बोराह को हराया था। बोरदोलोई के पाला बदलने के बाद अब यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले का अखाड़ा बनी है।
राष्ट्र प्रेस
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