नगांव लोकसभा उपचुनाव 2026: सुबह 9 बजे तक 17.68% मतदान, त्रिकोणीय मुकाबले में 19 लाख मतदाता
सारांश
मुख्य बातें
असम की नगांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। 2,112 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग में सुबह 9 बजे तक 17.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया जा चुका था। करीब 19.02 लाख मतदाता इस उपचुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मतदाता मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से पहुँच रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबाशीष शर्मा ने मतदान शुरू होते ही मायोंग हायर सेकेंडरी स्कूल में वोट डाला। मतदान के बाद भावुक हुए शर्मा ने मतदाताओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की और कहा कि 'लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोट डालना बेहद जरूरी है।' भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की उम्मीदवार सिबामोनी बोरा ने जाजोरी मजगांव में अपना वोट डाला और जीत का पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों समुदायों का समर्थन मिलेगा।
इस उपचुनाव में तीसरे प्रमुख प्रत्याशी के रूप में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल मैदान में हैं, जिससे यह मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है। वरिष्ठ नेताओं में मोरीगांव के विधायक रामाकांत देउरी ने देओबागुरी प्राइमरी स्कूल में और रूपोहीहाट के विधायक नुरुल हुदा ने रौमारी मकतब स्कूल में मंगलवार सुबह मतदान किया।
ईवीएम तकनीकी खराबी
मोरीगांव जिले के पूर्वी सिधाबारी में बूथ नंबर 72 पर मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में तकनीकी खराबी आने से थोड़ी देर के लिए मतदान रुका। अधिकारियों के अनुसार, पाँच वोट पड़ने के बाद मशीन ने काम करना बंद कर दिया। मतदाता बूथ पर ही प्रतीक्षा करते रहे और मशीन ठीक होने के बाद मतदान पुनः शुरू हो गया।
उपचुनाव की पृष्ठभूमि
यह उपचुनाव तब आवश्यक हुआ जब तत्कालीन कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने 20 मार्च को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे, जहाँ उन्हें जीत मिली। इससे नगांव लोकसभा सीट रिक्त हो गई और चुनाव आयोग को उपचुनाव कराना पड़ा।
ऐतिहासिक चुनावी आँकड़े
गौरतलब है कि नगांव सीट 2019 से कांग्रेस के पास रही है। 2019 के आम चुनाव में बोरदोलोई ने भाजपा के रूपक शर्मा को बेहद कम अंतर से हराया था — उस चुनाव में कांग्रेस को 49.53 प्रतिशत और भाजपा को 48.41 प्रतिशत वोट मिले थे। 2024 में बोरदोलोई ने 7,88,850 वोट (यानी 51.29 प्रतिशत) हासिल कर भाजपा के सुरेश बोरा को पराजित किया था, जिन्हें 5,76,619 वोट मिले थे। इस तरह 2.12 लाख से अधिक वोटों की बढ़त के साथ कांग्रेस ने 2024 में अपनी स्थिति मजबूत की थी।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब असम में भाजपा की राजनीतिक पकड़ मजबूत हो रही है और कांग्रेस अपना पुराना गढ़ बचाने की कोशिश कर रही है। AIUDF के बदरुद्दीन अजमल की मौजूदगी से मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में वोटों के बँटवारे की संभावना भी बनी है, जो चुनावी समीकरण को पेचीदा बना सकती है। मतगणना के बाद यह स्पष्ट होगा कि बोरदोलोई के दलबदल का असर मतदाताओं पर कितना पड़ा।