22 सितंबर 2026
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नैनीताल में दूषित पानी से बीमारी फैली, CM धामी के आदेश पर 6 इंजीनियर सस्पेंड

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नैनीताल में दूषित पानी से बीमारी फैली, CM धामी के आदेश पर 6 इंजीनियर सस्पेंड

सारांश

नैनीताल के जियोलीकोट में दूषित पानी से फैली बीमारी के बाद CM धामी ने तत्काल एक्शन लिया — जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 इंजीनियर निलंबित। लेकिन असली सवाल यह है कि पहाड़ी जिलों में पेयजल निगरानी तंत्र इतना कमज़ोर क्यों है।

मुख्य बातें

नैनीताल जिले के जियोलीकोट और आसपास के गाँवों में दूषित पेयजल से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 22 सितंबर 2026 को जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की पुष्टि की।
उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 इंजीनियर निलंबित किए गए।
निलंबित अधिकारियों में हल्द्वानी , नैनीताल और भीमताल के इंजीनियर शामिल हैं।
नैनीताल जल संस्थान के कार्यकारी अभियंता को औपचारिक चेतावनी जारी की गई।
प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की प्रतिबद्धता जताई।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में जियोलीकोट और आसपास के गाँवों में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि इस संकट के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान हो चुकी है और उनके विरुद्ध प्रारंभिक कार्रवाई की जा चुकी है। उनके आदेश पर उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

घटनाक्रम: कैसे फैली बीमारी

जियोलीकोट क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति दूषित होने की वजह से जल-जनित बीमारी फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई। स्थानीय स्तर पर स्थिति गंभीर होने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई आगे बढ़ी।

यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

देहरादून में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा, 'जियोलीकोट इलाके की घटना बहुत दुखद है और निश्चित रूप से सभी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कर दी गई है और पहले चरण में कार्रवाई की गई है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।

किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

निलंबित किए गए अधिकारियों में हल्द्वानी जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के एक सहायक अभियंता और एक अतिरिक्त सहायक अभियंता शामिल हैं।

इसके अलावा भीमताल पेयजल निगम के एक कार्यकारी अभियंता, एक प्रभारी सहायक अभियंता और एक कनिष्ठ अभियंता को भी जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया है। सभी पर अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही का आरोप है।

नैनीताल जल संस्थान के कार्यकारी अभियंता को औपचारिक चेतावनी जारी की गई है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की चूक पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता पर असर और आगे की राह

जियोलीकोट और निकटवर्ती गाँवों के निवासियों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की तत्काल प्राथमिकता बन गई है। गौरतलब है कि पहाड़ी जिलों में पाइपलाइन रखरखाव और जल परीक्षण की नियमित व्यवस्था अक्सर अपर्याप्त रहती है, और यह घटना उसी संरचनात्मक कमज़ोरी की ओर ध्यान खींचती है।

प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल आपूर्ति की निगरानी बढ़ाई जाएगी और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे ऐसी चूक न हो। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल निलंबन पर्याप्त नहीं — दीर्घकालिक समाधान के लिए नियमित जल परीक्षण और जवाबदेही ढाँचे को मजबूत बनाना ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी सुविचारित जवाबदेही ढाँचे का हिस्सा — उत्तराखंड में पेयजल संकट हर कुछ वर्षों में नई सुर्खी बनता है और हर बार कुछ अधिकारियों की बलि चढ़ाकर मामला रफा-दफा हो जाता है। असली प्रश्न यह है कि पहाड़ी जिलों में जल परीक्षण की नियमित व्यवस्था और पाइपलाइन रखरखाव का ऑडिट कब किया गया था। जब तक संरचनात्मक कमज़ोरियों — अपर्याप्त बजट, स्टाफिंग की कमी, नियमित जल-गुणवत्ता परीक्षण का अभाव — को नहीं सुधारा जाता, निलंबन महज़ एक दोहराया जाने वाला अनुष्ठान बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नैनीताल में दूषित पानी से कितने लोग बीमार हुए?
जियोलीकोट और आसपास के गाँवों में दूषित पेयजल की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और जल-जनित बीमारी फैलने की आशंका उत्पन्न हुई। अधिकारिक रूप से प्रभावित लोगों की सटीक संख्या अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
CM धामी ने नैनीताल जल संकट पर क्या कार्रवाई की?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 इंजीनियरों को निलंबित किया गया। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया और धामी ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्राथमिकता है।
कौन से इंजीनियर निलंबित किए गए हैं?
निलंबित किए गए 6 अधिकारियों में हल्द्वानी जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के एक सहायक अभियंता और एक अतिरिक्त सहायक अभियंता, तथा भीमताल पेयजल निगम के एक कार्यकारी अभियंता, एक प्रभारी सहायक अभियंता और एक कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं।
जियोलीकोट में पानी दूषित क्यों हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई की निगरानी में अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरती गई। निलंबित इंजीनियरों पर आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में चूक का आरोप है; हालाँकि दूषण के सटीक तकनीकी कारण की जाँच अभी जारी है।
क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई कदम उठाए जाएंगे?
प्रशासन ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल आपूर्ति की निगरानी बढ़ाई जाएगी और अधिकारियों को पेयजल गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। नैनीताल जल संस्थान के कार्यकारी अभियंता को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
राष्ट्र प्रेस
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