14 सितंबर 2026
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सीएम धामी का सख्त निर्देश: हेल्पलाइन 1905 पर शिकायतें पोर्टल पर नहीं, ज़मीन पर हों बंद

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सीएम धामी का सख्त निर्देश: हेल्पलाइन 1905 पर शिकायतें पोर्टल पर नहीं, ज़मीन पर हों बंद

सारांश

सीएम धामी ने हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा में साफ़ कह दिया — पोर्टल पर 'क्लोज़' दिखना काफी नहीं, असली समाधान चाहिए। 30 दिन से लंबित शिकायतों पर जवाबदेही, 15 दिन में पाइपलाइन ऑडिट और 'फोर्स क्लोज़' पर पाबंदी — यह उत्तराखंड में शिकायत निस्तारण की कसौटी बदलने की कोशिश है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 14 सितंबर 2026 को सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक देहरादून सचिवालय में की।
30 दिन से अधिक लंबित शिकायतों पर विशेष ध्यान और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश।
पाइपलाइन एवं सीवर लाइनों का ऑडिट 15 दिन के भीतर कर रिपोर्ट देने का आदेश।
शिकायतों को 'स्पेशल क्लोज' या 'फोर्स क्लोज' करने पर रोक; शिकायतकर्ता की संतुष्टि अनिवार्य।
180 दिनों से अधिक लंबित शिकायतों की विभागवार स्थिति बैठक में प्रस्तुत की गई।
अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहन और लापरवाह अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की दोहरी नीति घोषित।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 14 सितंबर 2026 को देहरादून स्थित सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन 1905 की विस्तृत समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जन शिकायतों का समाधान केवल पोर्टल पर 'क्लोज़' दर्शाने तक सीमित न रहे — हर शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक, ज़मीनी समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। बैठक में 180 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों की विभागवार स्थिति भी प्रस्तुत की गई।

मुख्य निर्देश और प्राथमिकताएँ

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 30 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों पर विशेष ध्यान दिया जाए। सचिव, विभागाध्यक्ष और जिलाधिकारी नियमित रूप से इनकी समीक्षा करें। जिन शिकायतों का निर्धारित समयावधि के भीतर निस्तारण नहीं हुआ, उनमें संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों को अनावश्यक रूप से 'स्पेशल क्लोज' अथवा 'फोर्स क्लोज' करना स्वीकार्य नहीं होगा। किसी भी शिकायत को बंद करने से पहले यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित कार्रवाई वास्तव में की गई है।

पेयजल, राजस्व और भूमि विवाद पर ज़ोर

धामी ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को 15 दिन के भीतर पाइपलाइन एवं सीवर लाइनों का ऑडिट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। लीकेज और आपूर्ति में व्यवधान जैसी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

राजस्व संबंधी मामलों — विशेष रूप से दाखिल-खारिज के प्रकरणों — में भी सख्ती बरतते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। भूमि धोखाधड़ी से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। सभी जिलाधिकारियों को तहसीलों का औचक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए।

शिकायतकर्ताओं से सीधी बातचीत

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं कई शिकायतकर्ताओं से दूरभाष पर वार्ता कर वास्तविक स्थिति जानी। संजय कुमार रावत ने बताया कि उनके दिवंगत पिता के उपचार से संबंधित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का भुगतान अब तक नहीं हुआ, जबकि शिकायत पोर्टल पर बंद दर्ज थी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पौड़ी गढ़वाल निवासी बेबी कोटनाला ने परित्यक्ता पेंशन लंबे समय से न मिलने की समस्या बताई। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, हरिद्वार निवासी गीता ने बताया कि करीब तीन माह पहले पानी की टंकी बन चुकी है, लेकिन आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार को मौके पर निरीक्षण कर आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा।

देहरादून निवासी शिल्पी सक्सेना ने स्ट्रीट लाइट शिकायत के समाधान पर संतोष जताया, जबकि अल्मोड़ा निवासी आयुष बिष्ट ने छात्रवृत्ति मामले का समाधान होने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति में हुई देरी के कारणों की जाँच के निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित समय पर मिलना सुनिश्चित हो।

जवाबदेही और प्रोत्साहन दोनों

मुख्यमंत्री ने दो-तरफा नीति की बात कही — जन शिकायतों के प्रभावी निस्तारण में अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि अनावश्यक विलंब और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

फीडबैक तंत्र को और मज़बूत करने के भी निर्देश दिए गए — शिकायतकर्ता से मिले फीडबैक के आधार पर निस्तारण की गुणवत्ता का आकलन होगा। गौरतलब है कि पोर्टल पर विभिन्न विभागों और नोडल अधिकारियों की कार्रवाई की मॉनिटरिंग की व्यवस्था पहले से मौजूद है।

आगे की राह

यह समीक्षा ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड में पेयजल, भूमि विवाद और पेंशन जैसी बुनियादी समस्याएँ हेल्पलाइन पर आने वाली सबसे अधिक शिकायतों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री धामी का यह कदम दिखाता है कि शासन की जवाबदेही को केवल डिजिटल पोर्टल की संख्या से नहीं, बल्कि नागरिकों की वास्तविक संतुष्टि से आँका जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि आगामी हफ्तों में पाइपलाइन ऑडिट और लंबित शिकायतों के निस्तारण में कितनी ज़मीनी तेज़ी आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रियान्वयन में होगा — क्योंकि उत्तराखंड में पोर्टल पर शिकायतें 'बंद' दिखाने और वास्तव में समस्या हल होने के बीच की खाई कोई नई बात नहीं है। 'फोर्स क्लोज़' पर रोक और शिकायतकर्ता की संतुष्टि को मापदंड बनाना सही दिशा है, लेकिन यह तभी काम करेगा जब फीडबैक तंत्र स्वतंत्र हो और अधिकारियों पर दबाव न हो। पेंशन से वंचित बेबी कोटनाला या चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए भटकते संजय कुमार रावत जैसे मामले बताते हैं कि तंत्र में संवेदनशीलता की कमी संरचनात्मक है, महज़ व्यक्तिगत लापरवाही नहीं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम हेल्पलाइन 1905 क्या है और यह कैसे काम करती है?
सीएम हेल्पलाइन 1905 उत्तराखंड सरकार का नागरिक शिकायत निवारण पोर्टल है, जिस पर आमजन राजस्व, पेयजल, पेंशन, छात्रवृत्ति जैसी समस्याएँ दर्ज करा सकते हैं। शिकायत संबंधित विभाग को भेजी जाती है और नोडल अधिकारी द्वारा निस्तारण के बाद पोर्टल पर बंद दर्ज की जाती है।
मुख्यमंत्री धामी ने 14 सितंबर 2026 की समीक्षा में क्या मुख्य निर्देश दिए?
धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 30 दिन से लंबित शिकायतों पर जवाबदेही तय हो, शिकायतों को 'फोर्स क्लोज़' न किया जाए और 15 दिन में पाइपलाइन ऑडिट रिपोर्ट दी जाए। साथ ही शिकायतकर्ता की वास्तविक संतुष्टि को निस्तारण का मापदंड बनाने को कहा गया।
'फोर्स क्लोज़' और 'स्पेशल क्लोज़' क्या होता है और इस पर रोक क्यों लगाई गई?
'फोर्स क्लोज़' और 'स्पेशल क्लोज़' वे प्रक्रियाएँ हैं जिनसे अधिकारी समस्या का वास्तविक समाधान किए बिना शिकायत को पोर्टल पर बंद दर्शा देते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर रोक लगाई क्योंकि इससे शिकायतकर्ता की समस्या अनसुलझी रहती है और हेल्पलाइन का उद्देश्य विफल होता है।
पेयजल संबंधी शिकायतों पर क्या विशेष कार्रवाई का निर्देश दिया गया?
मुख्यमंत्री ने पेयजल को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को 15 दिन के भीतर पाइपलाइन और सीवर लाइनों का ऑडिट कर रिपोर्ट देने को कहा। लीकेज, आपूर्ति में व्यवधान और नई टंकियों से आपूर्ति शुरू न होने जैसी समस्याओं का समयबद्ध समाधान अनिवार्य किया गया।
बैठक में 180 दिनों से लंबित शिकायतों का मुद्दा क्यों उठाया गया?
बैठक में 180 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों की विभागवार स्थिति प्रस्तुत की गई, जो तंत्र में गहरी जड़ें जमाए विलंब को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसे पुराने प्रकरणों की नियमित विभागीय मॉनिटरिंग हो और लंबित रहने के कारणों की भी समीक्षा की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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