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उत्तराखंड की 12 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे CM धामी, प्रगति पोर्टल से होगी निगरानी

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उत्तराखंड की 12 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे CM धामी, प्रगति पोर्टल से होगी निगरानी

सारांश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने प्रगति पोर्टल के ज़रिए 12 बड़ी परियोजनाओं की व्यक्तिगत निगरानी का ऐलान किया है — समय-सीमा और लागत नियंत्रण पर ज़ोर देते हुए। साथ ही सिलक्यारा टनल ऑपरेशन को ब्रिक्स मंच पर मिली सराहना को उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की अंतरराष्ट्रीय पहचान बताया।

मुख्य बातें

CM पुष्कर सिंह धामी ने 8 जून 2026 को देहरादून में कहा कि प्रगति पोर्टल के ज़रिए राज्य की 12 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है।
समीक्षा में चमोली , पिथौरागढ़ सहित अन्य सीमांत जिलों की परियोजनाएँ शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने तय समय-सीमा में परियोजनाएँ पूरी करने पर ज़ोर दिया — विलंब से लागत और आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता जताई।
ब्रिक्स सम्मेलन में उत्तराखंड के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना मिली।
सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार 17 दिनों तक काम करने वाले सभी लोगों को धामी ने बधाई दी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 8 जून 2026 को देहरादून में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य में चल रही 12 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा प्रगति पोर्टल के माध्यम से की जा रही है, ताकि किसी भी विसंगति को तत्काल दूर किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्वयं इन परियोजनाओं की निगरानी करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि विकास कार्यों में कोई अवरोध न आए।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि इन परियोजनाओं में चमोली, पिथौरागढ़ सहित अन्य सीमांत जिलों की परियोजनाएँ प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियाँ आपसी तालमेल बनाकर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में जुटी हैं, जिससे विकास की गति में किसी प्रकार की बाधा न पड़े।

समय-सीमा और लागत नियंत्रण पर ज़ोर

धामी ने आंतरिक प्रक्रियाओं में विलंब को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य है, क्योंकि समय बढ़ने से लागत बढ़ती है और सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।

ब्रिक्स सम्मेलन में उत्तराखंड मॉडल की सराहना

मुख्यमंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तराखंड के मॉडल को इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से स्थान मिला और उसकी सराहना की गई। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में ही सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।

सिलक्यारा ऑपरेशन को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

धामी ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने सिलक्यारा टनल अभियान में लगातार 17 दिनों तक रात-दिन काम किया — आम नागरिकों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक। यह ऑपरेशन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड अपनी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को गति देने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह निगरानी तंत्र केवल कागज़ी रहेगा या ज़मीन पर बदलाव लाएगा। उत्तराखंड में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि की समस्या नई नहीं है — खासकर सीमांत जिलों में जहाँ भौगोलिक चुनौतियाँ पहले से ही काम को कठिन बनाती हैं। सिलक्यारा टनल की अंतरराष्ट्रीय सराहना उत्तराखंड की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन यह भी याद रहे कि वह संकट पहले स्थान पर निर्माण-संबंधी चूक के कारण ही उत्पन्न हुआ था। बिना स्वतंत्र जवाबदेही ढाँचे के, समीक्षा बैठकें परिणाम की गारंटी नहीं बन सकतीं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM धामी किन 12 परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से उत्तराखंड में चल रही 12 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा हो रही है, जिनमें चमोली, पिथौरागढ़ सहित सीमांत जिलों की परियोजनाएँ प्रमुख रूप से शामिल हैं। परियोजनाओं के नामों का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
प्रगति पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है?
प्रगति पोर्टल एक डिजिटल निगरानी मंच है जिसके ज़रिए सरकारी परियोजनाओं की प्रगति को ट्रैक किया जाता है। उत्तराखंड सरकार इसका उपयोग परियोजनाओं में विसंगतियाँ पहचानने और समय-सीमा के भीतर काम पूरा कराने के लिए कर रही है।
परियोजनाओं में देरी से क्या नुकसान होता है?
CM धामी के अनुसार, समय बढ़ने से परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है, जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इसीलिए तय समय-सीमा में काम पूरा करना और आंतरिक प्रक्रियाओं में विलंब न होने देना प्राथमिकता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में उत्तराखंड के किस मॉडल की सराहना हुई?
ब्रिक्स सम्मेलन में उत्तराखंड के समग्र विकास और आपदा प्रबंधन मॉडल को सराहा गया, जिसमें सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन विशेष रूप से चर्चा में रहा। CM धामी ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और सभी सहयोगी संस्थाओं को दिया।
सिलक्यारा टनल ऑपरेशन कितने दिनों तक चला था?
सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार 17 दिनों तक चला था, जिसमें आम नागरिकों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक सभी ने रात-दिन काम किया। यह अभियान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के एक सफल उदाहरण के रूप में पहचाना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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