10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अखिलेश की 'चालाकी' 2027 में पड़ेगी भारी: मुख्तार अब्बास नकवी का पलटवार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अखिलेश की 'चालाकी' 2027 में पड़ेगी भारी: मुख्तार अब्बास नकवी का पलटवार

सारांश

BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने अखिलेश यादव की 'चालाकी' को 2027 चुनाव में उनके लिए ही 'चक्रव्यूह' बताया। मोहन यादव के बचाव में उतरे अखिलेश के रुख पर यह तीखा पलटवार, जिहाद विवाद और आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ के बीच आया — और राजनीतिक तापमान कई पायदान ऊपर चढ़ा दिया।

मुख्य बातें

मुख्तार अब्बास नकवी ने 24 जून 2025 को कहा कि अखिलेश यादव की 'चालाकी' उन्हें 2027 चुनाव में नुकसान पहुँचाएगी।
अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का बचाव करते हुए कथित भूमि घोटाले को BJP की आंतरिक साजिश बताया था।
नकवी ने मौलाना अरशद मदनी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जिहाद संबंधी बयानों को 'हो-हल्ला' करार दिया।
नकवी ने 25 जून 1975 के आपातकाल का उल्लेख कर कांग्रेस पर संविधान की 'हत्या' का आरोप लगाया।
नकवी ने बताया कि आपातकाल के दौरान 17 वर्ष की आयु में वे जेल गए थे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने 24 जून 2025 को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि वे जिस 'चालाकी और चतुराई के चक्रव्यूह' में दूसरों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं, उसमें खुद ही उलझ जाएंगे। यह बयान उस विवाद के बीच आया है जिसमें अखिलेश ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे कथित भूमि घोटाले के आरोपों को BJP की आंतरिक साजिश करार दिया था।

मुख्य विवाद: मोहन यादव और कथित भूमि घोटाला

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन से जुड़े कथित घोटाले के आरोप हाल ही में सामने आए हैं, जिसके बाद सियासी गहमागहमी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में अप्रत्याशित रुख अपनाते हुए मोहन यादव का बचाव किया और दावा किया कि BJP तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदलने की रणनीति के तहत इस मामले को हवा दे रही है।

गौरतलब है कि एक विपक्षी दल के नेता का सत्तारूढ़ दल के मुख्यमंत्री का बचाव करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

नकवी का पलटवार: 2027 चुनाव का हवाला

नकवी ने नई दिल्ली में बातचीत में कहा, 'इस तरह की चालाकी और चतुराई के चक्रव्यूह में अखिलेश यादव खुद ही फंस जाएंगे। उन्हें इससे किसी भी प्रकार का फायदा नहीं मिलने वाला है, खासकर 2027 के चुनाव में।'

नकवी का यह बयान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से करीब दो वर्ष पहले आया है, जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जिहाद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर प्रतिक्रिया

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान और मौलाना अरशद मदनी के उस कथित बयान पर — जिसमें कहा गया था कि जिहाद करना हर मुसलमान का हक है — नकवी ने कहा, 'ये लोग जिहाद के नाम पर हो-हल्ला करने वाले हैं। देश की जनता अब इन्हें समझ चुकी है। इनके दिमाग में थोड़ी गर्मी है, जो कुछ समय में निकल जाएगी।'

नकवी ने यह भी कहा कि कुछ लोग जिहाद के नाम पर फसाद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आम जनता इसे स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में गैर-मुस्लिम बहुल देशों की तुलना में सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है और यहाँ मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक, आर्थिक और शैक्षणिक अधिकार सुरक्षित हैं।

अल्पसंख्यक अधिकारों पर चिंता जताने वालों को नकवी ने सुझाव दिया कि वे पाकिस्तान जाकर वहाँ अल्पसंख्यकों की स्थिति देखें।

आपातकाल पर कांग्रेस को घेरा

नकवी ने 25 जून 1975 को लागू हुए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस दिन कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए संविधान की 'हत्या' की थी और यह कलंक आज भी उसके दामन पर मौजूद है।

नकवी ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, 'मैं उस समय 17 वर्ष का था, जब जेल गया था। हमारे जैसे कई नौजवान, जो कॉलेज में पढ़ते थे, जेल भेजे गए थे।' उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग आज संविधान की दुहाई देते हैं, उन्हें आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के हनन के लिए देश से माफी माँगनी चाहिए।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं और BJP व सपा दोनों अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हैं। मोहन यादव विवाद में अखिलेश के रुख को लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी अलग-अलग व्याख्याएँ कर रहे हैं। नकवी का यह पलटवार संकेत देता है कि BJP इस मुद्दे को आगामी चुनावों तक जीवित रखने की मंशा रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और BJP इसे तुरंत भुनाने में जुट गई। नकवी का '2027 चुनाव' का संदर्भ बताता है कि BJP इस बयान को उत्तर प्रदेश में सपा की विश्वसनीयता पर हमले के हथियार के रूप में देख रही है। जिहाद और आपातकाल — दोनों मुद्दों को एक ही प्रेस वार्ता में उठाना यह दर्शाता है कि BJP एक साथ कई मोर्चों पर विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। असली सवाल यह है कि क्या अखिलेश का यह 'असाधारण बचाव' उनके मतदाताओं को रणनीतिक लगेगा या भ्रमित करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्तार अब्बास नकवी ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाया?
नकवी ने कहा कि अखिलेश यादव 'चालाकी और चतुराई के चक्रव्यूह' में खुद फंस जाएंगे और इस रणनीति से उन्हें 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में कोई फायदा नहीं होगा। यह बयान अखिलेश के मोहन यादव बचाव वाले रुख के जवाब में आया।
अखिलेश यादव ने मोहन यादव का बचाव क्यों किया?
अखिलेश यादव ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे कथित भूमि घोटाले के आरोप BJP की आंतरिक साजिश का हिस्सा हैं, जिसके तहत पार्टी तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदलना चाहती है। हालाँकि यह दावा कथित तौर पर उनका अपना आकलन है।
नकवी ने जिहाद विवाद पर क्या कहा?
नकवी ने मौलाना अरशद मदनी के उस कथित बयान — कि जिहाद हर मुसलमान का हक है — को 'हो-हल्ला' करार दिया और कहा कि देश की जनता ऐसे लोगों को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि जिहाद के नाम पर फसाद फैलाने की कोशिश करने वालों को खुद नुकसान उठाना पड़ेगा।
नकवी ने आपातकाल का उल्लेख क्यों किया?
25 जून 1975 को लागू हुए आपातकाल की वर्षगाँठ के संदर्भ में नकवी ने कांग्रेस पर संविधान की 'हत्या' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग आज संविधान की बात करते हैं, उन्हें आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के हनन के लिए माफी माँगनी चाहिए।
2027 उत्तर प्रदेश चुनाव के संदर्भ में इस विवाद का क्या महत्व है?
नकवी का बयान संकेत देता है कि BJP अखिलेश के इस 'असाधारण रुख' को 2027 चुनाव प्रचार में मुद्दा बनाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश में सपा और BJP के बीच सीधी टक्कर को देखते हुए यह बयानबाजी आगामी चुनावी रणनीति की शुरुआती झलक मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले