यूपी 2027 चुनाव: नकवी का दावा — इंडिया गठबंधन के लिए अगले 27 साल तक सत्ता में कोई जगह नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में ही नहीं, बल्कि आने वाले 27 वर्षों तक इंडिया गठबंधन के लिए प्रदेश की सत्ता में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सभी राजनीतिक प्रयोग और समीकरण अंततः विफल साबित होंगे।
अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार
नकवी ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के एक हालिया बयान का जवाब देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बनाने की कोशिश में जुटे कुछ नेताओं को खुद भी भलीभाँति पता है कि 2027 का चुनाव उनके लिए 'केकवॉक' नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'नए-नए शगूफे, नए-नए प्रयोग — ये सारे प्रयास परास्त होंगे और पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे।' गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 403 में से 255 सीटें जीती थीं, जो विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका था।
झारखंड और राहुल गांधी पर निशाना
नकवी ने झारखंड में छात्रों से जुड़े एक मुद्दे का हवाला देते हुए विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जो लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हैं, वे झारखंड में छात्रों के साथ हुई कथित आपराधिक लापरवाही पर चुप्पी साधे बैठे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर इस मामले में 'लीपापोती' करने का आरोप भी लगाया।
महबूबा मुफ्ती के बयान पर प्रतिक्रिया
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के एक बयान पर नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख को कमज़ोर करने की आड़ में देश की साख को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग खुद को 'दिमागी नक्सल' या 'दिमागी एंटी नेशनल' साबित करने पर तुले हैं, जो उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक भूल होगी।
वंदे मातरम् विवाद पर नकवी का पक्ष
नकवी ने वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रगीत आज़ादी से पहले और बाद में भी राजनीतिक विवादों का शिकार रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसे जुनून के साथ गाया जाता था और अंग्रेज़ी हुकूमत ने इस पर प्रतिबंध भी लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में राजनीतिक कारणों से इस गीत के साथ भेदभाव किया गया और इसे 'नफरत भरी निगाहों' से देखना उचित नहीं है।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दलों ने अपनी तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। इंडिया गठबंधन के घटक दल नए सामाजिक समीकरण बनाने में जुटे हैं, जबकि BJP अपने शासन के रिकॉर्ड को प्रचार का आधार बना रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आक्रामक बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य विपक्ष का मनोबल तोड़ना है।