सोनिया गांधी की किताब पर नकवी का तंज: 'संस्मरण है या सियासीकरण, लेखक-प्रकाशक तय करें'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की किताब पर छिड़े विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नकवी ने कहा कि यह मामला लेखक और प्रकाशक के बीच का है और वे ही तय करेंगे कि यह वास्तविक संस्मरण है या उसका राजनीतिकरण।
किताब विवाद पर नकवी का रुख
नकवी ने कहा, 'यह सोनिया गांधी का संस्मरण है या कल्पना है, ये तो लेखक और प्रकाशक के बीच की बात है। प्रकाशक और लेखक ही तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। मुझे लगता है कि इसमें किसी को राजनीति करने की जरूरत नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि यदि संस्मरण के नाम पर कल्पनाएँ लिखी जा रही हैं और उनमें 'फर्जी और मनगढ़ंत किस्से-कहानियाँ' हों, तो प्रकाशक की भी जिम्मेदारी बनती है।
महिला आरक्षण और विशेष सत्र पर बयान
महिला आरक्षण परिसीमन के लिए विशेष संसद सत्र बुलाने की तैयारी पर नकवी ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि देश और समाज से जुड़े कामकाज को संसद में पूरा किया जाए। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, 'अफसोस की बात है कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल बहस और चर्चा से अधिक हंगामा करते हैं।' नकवी ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया संसदीय व्यवस्था, संविधान और लोकतंत्र — सभी पर सवाल खड़े करता है, जो उसके लिए भी हितकर नहीं है।
PM मोदी के मध्य एशिया दौरे पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार दिवसीय मध्य एशिया दौरे पर नकवी ने कहा कि मोदी ने अपने कार्यकाल में वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, 'चाहे सुरक्षा का मुद्दा हो या समाज और देश की समृद्धि का — भारत को मजबूती मिले, इस दिशा में वो लगातार काम करते रहे हैं।'
कर्नाटक वाल्मीकि घोटाले पर हमला
कर्नाटक के वाल्मीकि घोटाले पर BJP नेता ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। नकवी ने कहा, 'कांग्रेस और भ्रष्टाचार का गहरा याराना है — ये दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इतिहास इतना दागी रहा है कि उसका वर्तमान भी उसी राह पर है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर वाल्मीकि विकास निगम घोटाले को लेकर दबाव बना हुआ है।
आगे क्या
सोनिया गांधी की किताब पर विवाद थमने के आसार कम हैं, क्योंकि BJP और कांग्रेस दोनों इसे अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे से जोड़ रहे हैं। संसद के विशेष सत्र की तैयारी और महिला आरक्षण परिसीमन का मुद्दा आने वाले हफ्तों में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।