करेली अस्पताल में एम्बुलेंस की कथित देरी से अंशु पटेल की मौत, मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कठघरे में
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करेली सरकारी अस्पताल में 2 अगस्त 2026 को एक युवक की मौत ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। मृतक की पहचान अंशु पटेल के रूप में हुई है, जिसके दोस्तों का आरोप है कि समय पर एम्बुलेंस और पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में लोगों ने खुला आक्रोश जताया और जिला प्रशासन से जवाब माँगा।
घटनाक्रम: कैसे हुई देरी
दोस्तों के मुताबिक, अंशु पटेल ने जहरीला पदार्थ खा लिया था और उसने खुद अपने दोस्त रोहित को फोन कर अपनी लोकेशन बताई। रोहित अपने साथियों के साथ तत्काल मौके पर पहुँचा, लेकिन कच्चे रास्ते के कारण वाहन सीधे वहाँ तक नहीं जा सका। सभी लोग करीब 200 मीटर पैदल दौड़कर अंशु तक पहुँचे और उसे किसी तरह करेली सरकारी अस्पताल लेकर आए।
मृतक के दोस्त शशांक पटेल ने बताया कि अस्पताल पहुँचने के बाद करीब एक घंटे तक सरकारी एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और सीएमओ को कई बार फोन किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि एक गंभीर मरीज के लिए भी केवल 'प्रोसेस' चलाने की बात होती रही।
एम्बुलेंस और उपकरणों की कमी के आरोप
रोहित ने बताया कि अस्पताल के बाहर खड़ी एम्बुलेंस के नंबरों पर फोन किया गया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। अंततः एक मेडिकल स्टोर की मदद से निजी एम्बुलेंस का इंतजाम किया गया, जो नरसिंहपुर से आई — तब तक काफी देर हो चुकी थी। दोस्तों का कहना है कि यदि समय रहते मरीज को जिला अस्पताल भेज दिया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
कथित तौर पर अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर तो मौजूद था, लेकिन उसे मरीज तक पहुँचाने के लिए जरूरी उपकरण समय पर उपलब्ध नहीं हो सके। आरोप है कि डॉक्टर और स्टाफ जरूरी सामान खोजते रहे, जिससे इलाज में और देरी हुई।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने इन आरोपों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सफाई दी कि अस्पताल की ओर से हर संभव प्रयास किया गया। उनके अनुसार, डॉ. अनीता पटेल ने मरीज का इलाज करने की पूरी कोशिश की और करीब 25 मिनट तक लगातार सीपीआर देकर उसे बचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने माना कि उस दिन सरकारी एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुँच सकी, क्योंकि वह हाईवे या किसी अन्य क्षेत्र में व्यस्त थी। डॉक्टर ने यह भी कहा कि मरीज को प्राथमिक उपचार देकर जिला अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी और सभी जरूरी कॉल का रिकॉर्ड दर्ज है।
आम जनता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्तता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि सरकारी एम्बुलेंस सेवा की अनुपलब्धता और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरणों की कमी की शिकायतें राज्य के विभिन्न जिलों से समय-समय पर आती रही हैं। स्थानीय लोगों ने माँग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
आगे क्या होगा
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मृतक के परिजन और दोस्त न्याय की माँग को लेकर अड़े हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वह एम्बुलेंस सेवा की उपलब्धता और अस्पताल में उपकरणों की स्थिति की समीक्षा करे, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए।