जबलपुर में युवक की चाकू मारकर हत्या, परिवार का आरोप — 108 और 112 सेवाएँ नहीं पहुँचीं समय पर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सालीवाड़ा गाँव में बुधवार देर रात एक 30 वर्षीय वेल्डर नमामि पटेल की कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि 108 एंबुलेंस सेवा और 112 आपातकालीन सेवा समय पर नहीं पहुँची, जिससे अस्पताल पहुँचने में देरी हुई और जान नहीं बच सकी। बरगी थाना पुलिस ने 23 जुलाई को मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।
घटनाक्रम: रात के खाने के बाद हुई बहस, फिर चाकू से हमला
पुलिस के अनुसार, नमामि पटेल बुधवार देर रात रात का खाना खाने के बाद अपने घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान गाँव के ही निवासी घनश्याम केवट से किसी बात को लेकर बहस हो गई। विवाद बढ़ने पर केवट ने कथित तौर पर पटेल पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही बरगी थाना पुलिस मौके पर पहुँची और प्रारंभिक जाँच शुरू की।
अस्पताल पहुँचाने में देरी — परिवार के गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमले के तुरंत बाद उन्होंने कई बार 108 एंबुलेंस सेवा और 112 आपातकालीन हेल्पलाइन पर संपर्क किया, लेकिन समय पर कोई सहायता नहीं मिली। मजबूरन परिवार को पटेल को निजी वाहन से पहले बरगी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ा। परिवार ने यह भी दावा किया कि बरगी अस्पताल की एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण उपलब्ध नहीं थी, जिससे मेडिकल कॉलेज रेफर करने के लिए भी दोबारा निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा।
परिवार ने दावा किया कि उपचार करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो पटेल की जान बचने की संभावना अधिक हो सकती थी। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मेडिकल कॉलेज ले जाते समय हुई मौत
हालत गंभीर होने पर नमामि पटेल को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। पुलिस के अनुसार, मेडिकल कॉलेज ले जाते समय चोटों की गंभीरता के कारण रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। पटेल की लगभग एक वर्ष पूर्व शादी हुई थी।
पुलिस की कार्रवाई और जाँच की स्थिति
बरगी थाना प्रभारी (एसएचओ) ने बताया कि हत्या का मामला विधिवत दर्ज कर लिया गया है और आरोपी घनश्याम केवट को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हत्या के पीछे की असल वजह आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। एंबुलेंस सेवा की विफलता के आरोपों पर अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
आम जनता पर असर और व्यापक सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा की पहुँच और प्रतिक्रिया समय को लेकर यह पहली शिकायत नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता न मिलना गंभीर आघात के मामलों में मृत्यु दर को बढ़ा देता है। इस मामले में परिवार के आरोपों की जाँच और एंबुलेंस सेवा की जवाबदेही तय होना अब ज़रूरी हो गया है।