23 जुलाई 2026
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जबलपुर में युवक की चाकू मारकर हत्या, परिवार का आरोप — 108 और 112 सेवाएँ नहीं पहुँचीं समय पर

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जबलपुर में युवक की चाकू मारकर हत्या, परिवार का आरोप — 108 और 112 सेवाएँ नहीं पहुँचीं समय पर

सारांश

जबलपुर के सालीवाड़ा गाँव में रात की बहस चाकू के वार तक पहुँची और एक 30 वर्षीय वेल्डर की जान चली गई। लेकिन परिवार का दर्द सिर्फ हत्या तक नहीं — उनका आरोप है कि 108 और 112 सेवाएँ नाकाम रहीं, और समय पर इलाज मिलता तो शायद नमामि पटेल बच सकते थे।

मुख्य बातें

नमामि पटेल (30 वर्ष, वेल्डर) की बुधवार देर रात जबलपुर के सालीवाड़ा गाँव में कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
आरोपी की पहचान गाँव के ही निवासी घनश्याम केवट के रूप में हुई; गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
परिवार का आरोप — 108 एंबुलेंस और 112 आपातकालीन सेवा समय पर नहीं पहुँची; बरगी अस्पताल की एंबुलेंस भी तकनीकी खराबी के कारण उपलब्ध नहीं थी।
पटेल को निजी वाहन से पहले बरगी स्वास्थ्य केंद्र, फिर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर ले जाया गया, जहाँ रास्ते में ही मृत्यु हो गई।
परिवार का दावा — डॉक्टरों ने कहा कि समय पर इलाज मिलता तो जान बचने की संभावना थी।
बरगी थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया; हत्या का कारण गिरफ्तारी के बाद स्पष्ट होगा।

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सालीवाड़ा गाँव में बुधवार देर रात एक 30 वर्षीय वेल्डर नमामि पटेल की कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि 108 एंबुलेंस सेवा और 112 आपातकालीन सेवा समय पर नहीं पहुँची, जिससे अस्पताल पहुँचने में देरी हुई और जान नहीं बच सकी। बरगी थाना पुलिस ने 23 जुलाई को मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।

घटनाक्रम: रात के खाने के बाद हुई बहस, फिर चाकू से हमला

पुलिस के अनुसार, नमामि पटेल बुधवार देर रात रात का खाना खाने के बाद अपने घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान गाँव के ही निवासी घनश्याम केवट से किसी बात को लेकर बहस हो गई। विवाद बढ़ने पर केवट ने कथित तौर पर पटेल पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही बरगी थाना पुलिस मौके पर पहुँची और प्रारंभिक जाँच शुरू की।

अस्पताल पहुँचाने में देरी — परिवार के गंभीर आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमले के तुरंत बाद उन्होंने कई बार 108 एंबुलेंस सेवा और 112 आपातकालीन हेल्पलाइन पर संपर्क किया, लेकिन समय पर कोई सहायता नहीं मिली। मजबूरन परिवार को पटेल को निजी वाहन से पहले बरगी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ा। परिवार ने यह भी दावा किया कि बरगी अस्पताल की एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण उपलब्ध नहीं थी, जिससे मेडिकल कॉलेज रेफर करने के लिए भी दोबारा निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा।

परिवार ने दावा किया कि उपचार करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो पटेल की जान बचने की संभावना अधिक हो सकती थी। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

मेडिकल कॉलेज ले जाते समय हुई मौत

हालत गंभीर होने पर नमामि पटेल को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। पुलिस के अनुसार, मेडिकल कॉलेज ले जाते समय चोटों की गंभीरता के कारण रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। पटेल की लगभग एक वर्ष पूर्व शादी हुई थी।

पुलिस की कार्रवाई और जाँच की स्थिति

बरगी थाना प्रभारी (एसएचओ) ने बताया कि हत्या का मामला विधिवत दर्ज कर लिया गया है और आरोपी घनश्याम केवट को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हत्या के पीछे की असल वजह आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। एंबुलेंस सेवा की विफलता के आरोपों पर अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आम जनता पर असर और व्यापक सवाल

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा की पहुँच और प्रतिक्रिया समय को लेकर यह पहली शिकायत नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता न मिलना गंभीर आघात के मामलों में मृत्यु दर को बढ़ा देता है। इस मामले में परिवार के आरोपों की जाँच और एंबुलेंस सेवा की जवाबदेही तय होना अब ज़रूरी हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक प्रशासनिक। चाकू का वार किसी एक व्यक्ति ने किया, लेकिन परिवार के आरोप अगर सही हैं तो 108 और 112 जैसी सेवाओं की खामियाँ भी इस त्रासदी में बराबर की भागीदार हैं। मध्य प्रदेश में ग्रामीण आपातकालीन स्वास्थ्य ढाँचे की जवाबदेही का सवाल नया नहीं है, लेकिन हर बार यह किसी की जान जाने के बाद उठता है और फिर दब जाता है। एंबुलेंस की 'तकनीकी खराबी' को महज संयोग मानना उचित नहीं — इसकी स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर में नमामि पटेल की हत्या कैसे हुई?
बुधवार देर रात जबलपुर के सालीवाड़ा गाँव में 30 वर्षीय वेल्डर नमामि पटेल की गाँव के ही निवासी घनश्याम केवट से बहस के बाद कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पटेल रात का खाना खाने के बाद घर के बाहर बैठे थे, तभी विवाद हुआ।
परिवार ने 108 एंबुलेंस सेवा पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिवार का आरोप है कि हमले के बाद उन्होंने कई बार 108 एंबुलेंस और 112 आपातकालीन सेवा पर संपर्क किया, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं मिली। बरगी अस्पताल की एंबुलेंस भी तकनीकी खराबी के कारण उपलब्ध नहीं थी, जिससे उन्हें दोनों बार निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा।
नमामि पटेल को किस अस्पताल में ले जाया गया था?
पटेल को पहले बरगी के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहाँ रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
बरगी थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी घनश्याम केवट को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। पुलिस के अनुसार हत्या का सटीक कारण गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
क्या एंबुलेंस सेवा की विफलता की जाँच होगी?
अभी तक मध्य प्रदेश सरकार या स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंबुलेंस सेवा विफलता के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान या जाँच के आदेश सामने नहीं आए हैं। परिवार के आरोप सार्वजनिक होने के बाद इस मामले में जवाबदेही तय करने की माँग उठ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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