आरजी कर अस्पताल में युवक की मौत: परिजनों ने लगाया चिकित्सीय लापरवाही का आरोप, जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 16 अगस्त 2026 को एक बार फिर चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर आरोप सामने आया है, जब हावड़ा जिले के राजचंद्रपुर निवासी युवक प्रीतम रॉय की सड़क दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण यह जान गई।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार शाम करीब 5:30 बजे प्रीतम रॉय को एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद आरजी कर ट्रॉमा केयर सेंटर लाया गया था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनके दोनों पैरों की हड्डियाँ और कमर की बाईं हड्डी टूट गई थी। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज को 'हेमोरेजिक शॉक' हुआ और शनिवार रात करीब 10:30 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
मृतक के परिवार के सदस्य शौविक सरकार ने रविवार को अस्पताल प्रशासन पर सीधे तौर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों ने अस्पताल परिसर से ही सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी से घटना की जांच करने और राज्य के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की अपील की।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
अस्पताल के सुपरिटेंडेंट सप्तर्षि चटर्जी ने कहा कि परिजनों की शिकायत की जांच की जा रही है। हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आरजी कर का विवादों से पुराना नाता
यह ऐसे समय में आया है जब आरजी कर अस्पताल पहले से ही गंभीर विवादों के घेरे में है। इससे पहले मार्च 2026 में दमदम निवासी अरूप बनर्जी की आरजी कर ट्रॉमा केयर बिल्डिंग की लिफ्ट में फंसने से मौत हो गई थी, जिसमें प्रशासन पर निगरानी में लापरवाही के आरोप लगे थे।
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को इसी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उस समय समाज के विभिन्न वर्गों ने न्याय की माँग को लेकर व्यापक आंदोलन, रात भर के विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल की थी। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढाँचे पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
उस दौर में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने प्रशासन के साथ बैठक में बुनियादी ढाँचे के विकास और निगरानी व्यवस्था सुधारने जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी और आश्वासन भी लिए थे। आलोचकों का कहना है कि वे आश्वासन अब तक पूरी तरह ज़मीन पर नहीं उतरे।
आम जनता और मरीजों पर असर
यह घटना पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में ट्रॉमा केयर की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। आरजी कर जैसे प्रमुख सरकारी अस्पताल पर आम नागरिक — विशेषकर कम आय वर्ग — निर्भर रहते हैं, और बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले इस भरोसे को कमज़ोर करते हैं।
क्या होगा आगे
अस्पताल प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है, परंतु परिजन और सामाजिक संगठन उच्च-स्तरीय जाँच और जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना अहम होगा कि क्या इस बार सरकार केवल आश्वासन तक सीमित रहती है या ठोस संरचनात्मक बदलाव लाती है।