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नौतपा 2025: 25 मई से 2 जून तक 9 दिन भीषण गर्मी, जानें क्या है महत्व और सावधानियाँ

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नौतपा 2025: 25 मई से 2 जून तक 9 दिन भीषण गर्मी, जानें क्या है महत्व और सावधानियाँ

सारांश

25 मई से शुरू हो रहे नौतपा के 9 दिन इस साल और भी कड़े हो सकते हैं — दिल्ली में पहले ही 42°C पार हो चुका है। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से जुड़ी यह परंपरागत अवधि मानसून का पूर्वसंकेत भी मानी जाती है।

मुख्य बातें

नौतपा 2025 की शुरुआत 25 मई से होगी और यह 2 जून तक चलेगा।
नई दिल्ली में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज; दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में और बढ़ने के आसार।
भारत सरकार ने हीटवेव को लेकर पहले ही एडवाइजरी जारी की है।
ज्योतिष मान्यता के अनुसार, नौतपा में भीषण गर्मी मानसून के अच्छे और लंबे होने का संकेत मानी जाती है।
इन 9 दिनों में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य और दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से परहेज की सलाह।
बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें; खूब पानी पिएँ।

नौतपा 2025 इस वर्ष 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलेगा — यानी लगातार 9 दिन देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, नई दिल्ली में मंगलवार को तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, और दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में तापमान और चढ़ने के आसार हैं। भारत सरकार ने हीटवेव को लेकर पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी है।

नौतपा क्या है और यह कब शुरू होता है

'नौतपा' शब्द का अर्थ है नौ दिनों की भारी तपिश। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ज्येष्ठ मास में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। इस वर्ष 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस अवधि में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी और तीव्र गति से पड़ती हैं, जिससे तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है और लू का प्रकोप बढ़ जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा माने जाते हैं। मान्यता है कि सूर्य की प्रबल उपस्थिति में चंद्रमा की शीतलता क्षीण हो जाती है, जिससे इन नौ दिनों में गर्मी का असर और तीव्र हो जाता है।

मानसून और कृषि से नौतपा का संबंध

नौतपा केवल गर्मी की चरम अवस्था नहीं है — यह मानसून और खरीफ फसलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि नौतपा के दौरान जितनी भीषण गर्मी और सूखा पड़ता है, मानसून उतना ही अच्छा और दीर्घकालिक होने की संभावना रहती है। गर्म और शुष्क दिन समुद्री जल को तेजी से गर्म करते हैं, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया में तेज़ी आती है और खरीफ फसलों को पर्याप्त वर्षा मिलती है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में किसान मानसून की दिशा और समय को लेकर पहले से ही सतर्क हैं। गौरतलब है कि नौतपा की यह परंपरागत मान्यता सदियों से भारतीय कृषि-पंचांग का हिस्सा रही है।

नौतपा में धार्मिक और सामाजिक परंपराएँ

धर्म शास्त्रों के अनुसार, नौतपा के दौरान सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। तांबे के लोटे में चावल, गुड़, रोली और लाल फूल डालकर जल अर्पित करने तथा धूप-दीप दिखाने की परंपरा है। इन नौ दिनों में दान-पुण्य को भी अत्यंत फलदायी माना जाता है — जरूरतमंदों को शरबत, सत्तू, ठंडा पानी, पंखा, मौसमी सब्जियाँ और फल दान करने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना और पौसरा लगाना भी पुण्यदायी माना जाता है। भारी या बासी भोजन त्यागकर सात्विक और ताजा भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।

नौतपा में क्या न करें

धर्म शास्त्रों में नौतपा के दौरान विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज की सलाह दी जाती है। कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से भी बचना उचित माना जाता है। दोपहर में — विशेषकर 12 बजे से 4 बजे के बीच — घर से बाहर निकलने और लंबी यात्राएँ करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

स्वास्थ्य सावधानियाँ और हीटवेव से बचाव

इन 9 दिनों में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। खूब पानी पिएँ, छाता साथ रखें और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें। भारत सरकार की हीटवेव एडवाइजरी के अनुसार, दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचना सबसे जरूरी उपाय है। आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ अधिक गंभीर है — जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं। सरकारी एडवाइजरी जारी होना जरूरी कदम है, पर असली सवाल यह है कि शहरी गरीब, दिहाड़ी मजदूर और किसान — जो दोपहर की छुट्टी का विकल्प नहीं चुन सकते — उन तक यह सावधानियाँ कितनी पहुँचती हैं। नौतपा और मानसून के बीच का लोक-विज्ञान भले ही वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित न हो, लेकिन यह भारतीय कृषि समाज की पीढ़ियों की मौसम-साक्षरता का प्रतिबिंब है जिसे नकारा नहीं जा सकता।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नौतपा 2025 कब से कब तक है?
नौतपा 2025 की शुरुआत 25 मई से होगी और यह 2 जून तक चलेगा — कुल 9 दिन। इस दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं, जिससे गर्मी का प्रकोप सबसे अधिक माना जाता है।
नौतपा क्या होता है और इसका क्या महत्व है?
नौतपा वह 9-दिवसीय अवधि है जब ज्येष्ठ मास में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और गर्मी अपने चरम पर होती है। ज्योतिष और लोक-परंपरा में मान्यता है कि नौतपा की भीषण गर्मी अच्छे मानसून और खरीफ फसलों के लिए शुभ संकेत है।
नौतपा और मानसून का क्या संबंध है?
मान्यता है कि नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी और सूखा पड़ता है, मानसून उतना ही मजबूत और लंबा होता है। गर्म और शुष्क दिन समुद्री जल को तेजी से गर्म करते हैं, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया तेज होती है और खरीफ फसलों को अच्छी वर्षा मिलती है।
नौतपा के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें, खूब पानी पिएँ और हल्के रंग के कपड़े पहनें। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें। भारत सरकार ने भी हीटवेव को लेकर एडवाइजरी जारी की है।
नौतपा में कौन-से काम नहीं करने चाहिए?
धर्म शास्त्रों के अनुसार, नौतपा के 9 दिनों में विवाह, सगाई, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने और लंबी यात्राओं से भी परहेज की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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