21 अक्टूबर 2026
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छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त, CM विष्णुदेव साय बोले — बस्तर में अब भय नहीं, विश्वास है

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छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त, CM विष्णुदेव साय बोले — बस्तर में अब भय नहीं, विश्वास है

सारांश

दशकों बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर में बदलाव की बात हो रही है — CM विष्णुदेव साय ने पुलिस स्मृति दिवस पर कहा कि जहाँ कभी भय था, वहाँ अब विश्वास है। कोबरा, सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के बलिदान से यह परिवर्तन संभव हुआ है।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 21 अक्टूबर 2026 को कहा कि राज्य नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास का नया अध्याय लिख रहा है।
उन्होंने यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कोबरा , सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस की सराहना वाली पोस्ट पर दी।
बस्तर में 'जहाँ कभी भय था, वहाँ अब विश्वास है' — साय ने बच्चों के सपनों और परिवारों की उम्मीदों का उल्लेख किया।
पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री ने शहीद जवानों के परिवारों के सम्मान और कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
राज्य सरकार का अब ध्यान नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर केंद्रित है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 21 अक्टूबर 2026 को कहा कि राज्य अब नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उस टिप्पणी के संदर्भ में दी, जिसमें शाह ने कोबरा, सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के साहस की सराहना करते हुए दशकों पुराने नक्सलवाद के खात्मे का उल्लेख किया था।

मुख्यमंत्री साय का संदेश

अमित शाह की पोस्ट को साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृहमंत्री अमित शाह की संकल्प शक्ति से छत्तीसगढ़ आज नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास का नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने कहा — 'जहाँ कभी भय था, वहाँ अब विश्वास है, बच्चों के सपने हैं और परिवारों के बेहतर कल की उम्मीदें हैं।' यह बदलाव कोबरा, सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के वीर जवानों के अदम्य साहस से साकार हुआ है।

बस्तर के जवानों को नमन

साय ने बस्तर के उन जवानों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवारों से दूर, कठिनतम परिस्थितियों में अपनी जान की बाजी लगाई, ताकि बस्तर के हर परिवार के जीवन में शांति और खुशहाली लौट सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, 'बस्तर की हर मुस्कान में इन वीरों के त्याग, समर्पण और शहादत का अंश है।'

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र इन वीर जवानों और उनके परिवारों का सदैव ऋणी रहेगा, और उनकी सरकार शहीद जवानों के परिवारों के सम्मान तथा कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

पुलिस स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि

पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर साय ने अपने दूसरे पोस्ट में मातृभूमि की रक्षा और जनसेवा में प्राण न्यौछावर करने वाले अमर वीरों को कोटि-कोटि नमन अर्पित किया। उन्होंने कहा कि इन बलिदानियों की स्मृति सरकार और समाज को कर्तव्यपथ पर निष्ठापूर्वक आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

नक्सल-मुक्ति का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, विशेष रूप से बस्तर संभाग, दशकों से माओवादी हिंसा का केंद्र रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाए गए संयुक्त सुरक्षा अभियानों के बाद हाल के वर्षों में नक्सली घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार बस्तर में बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर ज़ोर दे रही है। विश्लेषकों के अनुसार, सुरक्षा उपायों के साथ-साथ विकासात्मक पहलों का समन्वय इस बदलाव की कुंजी रही है।

आगे देखें तो राज्य सरकार का ध्यान अब उन क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर केंद्रित है, जहाँ लंबे समय तक नक्सली प्रभाव के कारण विकास अवरुद्ध रहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'नक्सलवाद से मुक्ति' का दावा सत्यापन माँगता है — आँकड़े बताते हैं कि हिंसा में कमी आई है, किंतु पूर्ण उन्मूलन और टिकाऊ शांति में अंतर होता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या सुरक्षा सफलता के साथ-साथ बस्तर के आदिवासी समुदायों को रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ वास्तविक रूप से मिल रही हैं। पुलिस स्मृति दिवस के भावनात्मक संदर्भ में यह संदेश देना सामरिक रूप से सटीक है, पर जब तक पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण के ठोस आँकड़े सामने नहीं आते, यह बयानबाजी और वास्तविकता के बीच की खाई को नहीं पाट सकता।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद से मुक्त होने का क्या अर्थ है?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, केंद्र और राज्य के संयुक्त सुरक्षा अभियानों के बाद छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, में माओवादी हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। सरकार इसे 'नक्सलवाद से मुक्ति' के रूप में प्रस्तुत कर रही है और अब विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि दशकों पुराने नक्सलवाद को समाप्त करने में कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी इस अभियान में अद्भुत शौर्य दिखाया है। इसी पोस्ट को मुख्यमंत्री साय ने साझा कर अपनी प्रतिक्रिया दी।
पुलिस स्मृति दिवस क्यों मनाया जाता है?
पुलिस स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को उन पुलिस जवानों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने देश की सुरक्षा और नागरिकों की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
बस्तर में अब क्या बदलाव हो रहे हैं?
सरकारी दावों के अनुसार, जहाँ पहले नक्सली हिंसा के कारण विकास अवरुद्ध था, वहाँ अब बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है।
कोबरा और सीआरपीएफ की इस अभियान में क्या भूमिका रही?
कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) और सीआरपीएफ के जवानों ने छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ मिलकर नक्सल-विरोधी अभियानों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री साय और गृहमंत्री शाह दोनों ने इन जवानों के साहस और बलिदान को इस बदलाव की आधारशिला बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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