छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त, CM विष्णुदेव साय बोले — बस्तर में अब भय नहीं, विश्वास है
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 21 अक्टूबर 2026 को कहा कि राज्य अब नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उस टिप्पणी के संदर्भ में दी, जिसमें शाह ने कोबरा, सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के साहस की सराहना करते हुए दशकों पुराने नक्सलवाद के खात्मे का उल्लेख किया था।
मुख्यमंत्री साय का संदेश
अमित शाह की पोस्ट को साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृहमंत्री अमित शाह की संकल्प शक्ति से छत्तीसगढ़ आज नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास का नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने कहा — 'जहाँ कभी भय था, वहाँ अब विश्वास है, बच्चों के सपने हैं और परिवारों के बेहतर कल की उम्मीदें हैं।' यह बदलाव कोबरा, सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के वीर जवानों के अदम्य साहस से साकार हुआ है।
बस्तर के जवानों को नमन
साय ने बस्तर के उन जवानों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवारों से दूर, कठिनतम परिस्थितियों में अपनी जान की बाजी लगाई, ताकि बस्तर के हर परिवार के जीवन में शांति और खुशहाली लौट सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, 'बस्तर की हर मुस्कान में इन वीरों के त्याग, समर्पण और शहादत का अंश है।'
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र इन वीर जवानों और उनके परिवारों का सदैव ऋणी रहेगा, और उनकी सरकार शहीद जवानों के परिवारों के सम्मान तथा कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
पुलिस स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर साय ने अपने दूसरे पोस्ट में मातृभूमि की रक्षा और जनसेवा में प्राण न्यौछावर करने वाले अमर वीरों को कोटि-कोटि नमन अर्पित किया। उन्होंने कहा कि इन बलिदानियों की स्मृति सरकार और समाज को कर्तव्यपथ पर निष्ठापूर्वक आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।
नक्सल-मुक्ति का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, विशेष रूप से बस्तर संभाग, दशकों से माओवादी हिंसा का केंद्र रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाए गए संयुक्त सुरक्षा अभियानों के बाद हाल के वर्षों में नक्सली घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार बस्तर में बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर ज़ोर दे रही है। विश्लेषकों के अनुसार, सुरक्षा उपायों के साथ-साथ विकासात्मक पहलों का समन्वय इस बदलाव की कुंजी रही है।
आगे देखें तो राज्य सरकार का ध्यान अब उन क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर केंद्रित है, जहाँ लंबे समय तक नक्सली प्रभाव के कारण विकास अवरुद्ध रहा।