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एनसीबी अहमदाबाद की बड़ी जीत: गांजा तस्करी में दोषी दो आरोपियों को 10 साल की कठोर कैद

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एनसीबी अहमदाबाद की बड़ी जीत: गांजा तस्करी में दोषी दो आरोपियों को 10 साल की कठोर कैद

सारांश

ओडिशा से गुजरात तक अनानास की आड़ में 523 किलोग्राम गांजे की तस्करी — एनसीबी अहमदाबाद के 2022 के ऑपरेशन को चार साल बाद अदालती मुहर मिली। सूरत की अतिरिक्त जिला अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 को दोनों दोषियों को 10-10 साल की कठोर कैद सुनाई।

मुख्य बातें

एनसीबी अहमदाबाद ने 9 जून 2022 को सूरत के मांगरोल क्षेत्र में 523.450 किलोग्राम गांजा ज़ब्त किया था।
दोनों आरोपी — शेख अकील शेख (मालेगांव, महाराष्ट्र) और अयाज शेख (सूरत, गुजरात) — 3 अक्टूबर 2026 को दोषी ठहराए गए।
सूरत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने प्रत्येक को 10 वर्ष कठोर कैद और ₹1,00,000 जुर्माना सुनाया।
गांजा ओडिशा से गुजरात लाया जा रहा था; अनानास की खेप के नीचे छिपाया गया था।
एनसीबी ने ड्रग सूचना के लिए मानस हेल्पलाइन 1933 पर जनसहयोग की अपील की है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अहमदाबाद को 3 अक्टूबर 2026 को सूरत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत के एक अहम फैसले के रूप में बड़ी कामयाबी मिली, जब अदालत ने 523 किलोग्राम से अधिक गांजे की अंतर-राज्यीय तस्करी के दोषी दो आरोपियों में से प्रत्येक को 10 वर्ष की कठोर कैद और ₹1,00,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यह मामला ओडिशा से गुजरात तक फैले एक सुनियोजित ड्रग नेटवर्क से जुड़ा है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

एनसीबी अधिकारियों को 9 जून 2022 को ठोस खुफिया सूचना मिली, जिसके आधार पर गुजरात के सूरत जिले के मांगरोल क्षेत्र के लिंडियाद गांव में मिथिला इंडस्ट्रीज के सामने निगरानी अभियान चलाया गया। इस दौरान टीम ने देखा कि आरोपी एक टाटा ट्रक से माल को एक महिंद्रा बोलेरो पिकअप में स्थानांतरित कर रहे थे।

तलाशी में अधिकारियों को 17 प्लास्टिक बोरियों में पैक 101 पैकेट मिले, जिनमें कुल 523.450 किलोग्राम गांजा था। यह सामग्री अनानास की खेप के नीचे चालाकी से छिपाकर रखी गई थी — जो तस्करों की सुनियोजित रणनीति का प्रमाण है।

आरोपियों की पहचान और नेटवर्क

गिरफ्तार दोनों आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के मालेगांव निवासी शेख अकील शेख और गुजरात के सूरत निवासी अयाज शेख के रूप में की गई। जाँच में सामने आया कि गांजे को व्यावसायिक मात्रा में ओडिशा से गुजरात लाया जाता था और अवैध बिक्री के लिए एक सुनियोजित आपराधिक तंत्र सक्रिय था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देश में अंतर-राज्यीय ड्रग नेटवर्क की सक्रियता को लेकर कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ सतर्क हैं।

अदालत का फैसला

विस्तृत सुनवाई के बाद, सूरत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 को दोनों आरोपियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने प्रत्येक आरोपी को 10 वर्ष की कठोर कैद और ₹1,00,000 का जुर्माना लगाया। गौरतलब है कि 523 किलोग्राम से अधिक की यह मात्रा एनडीपीएस अधिनियम के तहत 'कमर्शियल क्वांटिटी' की श्रेणी में आती है, जिसमें न्यूनतम 10 वर्ष की कैद का प्रावधान है।

एनसीबी की अपील और हेल्पलाइन

इस फैसले के बाद एनसीबी ने नशे के खिलाफ अभियान में जनता से सहयोग की अपील दोहराई है। एनसीबी के अनुसार, नशीले पदार्थों की बिक्री, परिवहन या व्यापार से जुड़ी कोई भी सूचना मानस-नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर दी जा सकती है। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

यह मामला एनसीबी की उस रणनीति को रेखांकित करता है जिसमें खुफिया-आधारित ऑपरेशन और मज़बूत अदालती अभियोजन को मिलाकर दीर्घकालिक सज़ा सुनिश्चित की जाती है — आने वाले समय में इस मॉडल से और अभियोजन प्रकरणों में तेज़ी आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी के चार साल बाद मिली सजा तस्करी नेटवर्क के लिए पर्याप्त निरोधक है। ओडिशा-गुजरात रूट पर यह पहला बड़ा मामला नहीं है — इस गलियारे पर व्यवस्थागत निगरानी की ज़रूरत बनी हुई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत 'कमर्शियल क्वांटिटी' की सजा तो मिली, लेकिन नेटवर्क के ऊपरी सिरे तक पहुँचना अभी शेष है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीबी अहमदाबाद के इस गांजा तस्करी मामले में क्या हुआ?
सूरत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 को दो आरोपियों — शेख अकील शेख और अयाज शेख — को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10 वर्ष की कठोर कैद और ₹1,00,000 जुर्माना सुनाया। यह मामला जून 2022 में सूरत के मांगरोल में 523.450 किलोग्राम गांजे की ज़ब्ती से जुड़ा है।
गांजा कहाँ से कहाँ तस्करी किया जा रहा था?
जाँच के अनुसार गांजे को ओडिशा से गुजरात तक अंतर-राज्यीय परिवहन के ज़रिये लाया जा रहा था। इसे अनानास की खेप के नीचे छिपाकर टाटा ट्रक से बोलेरो पिकअप में ट्रांसफर किया जा रहा था।
एनडीपीएस एक्ट में 'कमर्शियल क्वांटिटी' पर क्या प्रावधान है?
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत 'कमर्शियल क्वांटिटी' में ड्रग तस्करी पर न्यूनतम 10 वर्ष की कैद और अधिकतम 20 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। गांजे के मामले में 20 किलोग्राम से अधिक की मात्रा कमर्शियल श्रेणी में आती है।
ड्रग तस्करी की जानकारी कहाँ दे सकते हैं?
एनसीबी की मानस-नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन का टोल-फ्री नंबर 1933 है, जहाँ नशीले पदार्थों की बिक्री, परिवहन या व्यापार से जुड़ी जानकारी दी जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
इस मामले में एनसीबी का ऑपरेशन कैसे हुआ?
9 जून 2022 को एनसीबी अहमदाबाद को ठोस खुफिया सूचना मिली, जिस पर सूरत के मांगरोल क्षेत्र के लिंडियाद गांव में मिथिला इंडस्ट्रीज के सामने निगरानी अभियान चलाया गया। टीम ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा जब वे एक ट्रक से बोलेरो में गांजे के पैकेट स्थानांतरित कर रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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