एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक संसद पुस्तकालय भवन में, मानसून सत्र के अंतिम 10 दिनों की रणनीति पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक 4 अगस्त को संसद पुस्तकालय भवन (पीएलबी), नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक में संसद के मानसून सत्र के शेष 10 दिनों के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन की सदन रणनीति पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सत्र अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है और विधायी एजेंडा दबाव में है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
एनडीए के सभी घटक दलों के सांसद इस बैठक में उपस्थित हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद बताई गई। उल्लेखनीय है कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सांसदों ने — जो पूर्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में थे — दूसरी बार इस बैठक में भाग लिया।
मानसून सत्र में विधायी एजेंडा और विपक्ष का रुख
एनडीए के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मानसून सत्र के शेष दिनों में कई लंबित विधेयकों को सदन में पेश कर पारित कराने की तैयारी में है। दूसरी तरफ, विपक्षी दलों द्वारा परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान चोरी मामले जैसे विवादास्पद मुद्दों पर व्यवधान जारी रहने की आशंका है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से सदन में बार-बार हंगामा और स्थगन देखने को मिला है।
'मंगल मिलन' बैठक क्या है
'मंगल मिलन' एनडीए संसदीय दल की पुनर्गठित साप्ताहिक रणनीति बैठक है, जिसका उद्देश्य रचनात्मक बहस को बढ़ावा देना और गठबंधन के भीतर समन्वय को सुदृढ़ करना है। यह बैठक शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच सदन में बोलने की भूमिकाओं के वितरण को भी सुनिश्चित करती है।
एनसीपीआई सांसदों की प्रतिक्रिया
एनसीपीआई के कई सांसदों ने, जिन्होंने पहली बार इस बैठक में हिस्सा लिया था, सत्तारूढ़ गठबंधन की 'संगठित प्रणाली' की सराहना की थी। उनकी दूसरी बार की उपस्थिति एनडीए के साथ उनके बढ़ते एकीकरण को दर्शाती है।
आगे क्या होगा
सरकार और विपक्ष दोनों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने की संभावना के बीच, मानसून सत्र के तीसरे सप्ताह में तीखे राजनीतिक टकराव के साथ-साथ विधायी गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनडीए अपने लंबित विधेयकों को पारित कराने में कहाँ तक सफल रहता है।