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एनडीएमए का 'सचेत' ऐप गुजरात में किसानों-मछुआरों का जीवन रक्षक, मानसून में 70 करोड़ अलर्ट भेजे

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एनडीएमए का 'सचेत' ऐप गुजरात में किसानों-मछुआरों का जीवन रक्षक, मानसून में 70 करोड़ अलर्ट भेजे

सारांश

एनडीएमए का 'सचेत' ऐप गुजरात में आपदा प्रबंधन की तस्वीर बदल रहा है — जियो-फेंसिंग और रियल-टाइम अलर्ट से किसान-मछुआरे समय रहते सुरक्षित हो रहे हैं। इस मानसून में अकेले अहमदाबाद से 70 करोड़ संदेश भेजे गए, जो इस डिजिटल सुरक्षा कवच की ताकत बताते हैं।

मुख्य बातें

एनडीएमए का 'सचेत' ऐप CAP और जियो-फेंसिंग तकनीक पर आधारित है, जो साइक्लोन, बाढ़, आकाशीय बिजली और हीट वेव की रियल-टाइम चेतावनी देता है।
गुजरात के किसान अंबुभाई पटेल और मछुआरे भागुभाई टंडेल ने ऐप को जीवन रक्षक बताया।
सवालिया के अनुसार इस मानसून में 70 करोड़ संदेश विभिन्न चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से भेजे गए।
IMD , CWC और अन्य विभागों के समन्वय से राज्य, जिला, पंचायत और ग्राम स्तर तक अलर्ट पहुँचाए जाते हैं।
ऐप बहुभाषी है और परंपरागत मास मीडिया की तुलना में कहीं तेज़ और लक्षित चेतावनी प्रणाली प्रदान करता है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा विकसित 'सचेत' ऐप और 'सचेत नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल' गुजरात में किसानों, मछुआरों और आम नागरिकों के लिए डिजिटल सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और जियो-फेंसिंग तकनीक पर आधारित यह ऐप साइक्लोन, भारी वर्षा, आकाशीय बिजली, बाढ़ और हीट वेव जैसी आपदाओं की रियल-टाइम चेतावनी सीधे उपयोगकर्ता के मोबाइल तक पहुँचाता है।

कैसे काम करता है सचेत ऐप

भारतीय मौसम विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC) और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से आपदा पूर्वानुमान के आँकड़ों का विश्लेषण कर यह ऐप राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन, पंचायत और ग्राम स्तर तक अलर्ट प्रसारित करता है। टीवी और रेडियो जैसे परंपरागत माध्यमों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक तेज़ और लक्षित है, क्योंकि जियो-फेंसिंग तकनीक केवल प्रभावित भौगोलिक क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं को ही सूचित करती है।

यह ऐप बहुभाषी है, जिससे गुजराती सहित अनेक भाषाओं में अलर्ट प्राप्त किए जा सकते हैं। रियल-टाइम और लोकेशन-आधारित चेतावनी प्रणाली ने राहत एवं बचाव अभियानों के संचालन को भी सुगम बनाया है।

किसानों और मछुआरों की ज़ुबानी

वलसाड के किसान अंबुभाई पटेल ने बताया कि सचेत ऐप से किसानों को मौसम की समय पर जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा, 'हमें पता चलता है कि कब तूफान आने वाला है और कब बारिश होने वाली है। इससे हम समय रहते खेत से घर लौट सकते हैं। अगर फसल तैयार हो तो उसे सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने का मौका मिलता है।'

मछुआरे भागुभाई टंडेल ने कहा कि यह ऐप मछुआरा समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा, 'जब बारिश की आशंका होती है तो उसकी जानकारी पहले ही मिल जाती है, जिससे हम समुद्र में जाने से बच सकते हैं।'

विशेषज्ञों की राय

अहमदाबाद मौसम विभाग के निदेशक अशोक कुमार दास ने बताया कि इस ऐप के माध्यम से मौसम की जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, जिससे लोगों को समय-समय पर सटीक मौसम संबंधी सूचनाएँ मिलती रहती हैं।

राहत निदेशक एस.सी. सवालिया ने बताया कि अहमदाबाद में इस वर्ष के मानसून के दौरान विभिन्न चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से लगभग 70 करोड़ संदेश नागरिकों तक पहुँचाए गए हैं — जो इस डिजिटल आपदा प्रबंधन प्रणाली की व्यापक पहुँच को दर्शाता है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि प्राकृतिक आपदाओं में जान-माल की क्षति का एक बड़ा कारण समय पर सूचना का अभाव होता है। सचेत ऐप ने इस कमी को दूर करने का काम किया है। गुजरात जैसे राज्य में, जहाँ तटीय क्षेत्रों में मछुआरे और कृषि-प्रधान इलाकों में किसान प्रतिकूल मौसम के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं, यह ऐप लाखों परिवारों की सुरक्षा में सहायक बन रहा है।

आगे की राह

एनडीएमए की यह पहल देश के अन्य आपदा-प्रवण राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। रियल-टाइम डेटा, बहुविभागीय समन्वय और स्थानीय भाषाओं में अलर्ट की त्रिस्तरीय व्यवस्था आपदा प्रबंधन को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीक-आधारित प्रणालियों का विस्तार भारत की आपदा न्यूनीकरण क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने वास्तव में उन लोगों तक पहुँचे जिन्हें सबसे अधिक ज़रूरत थी। असली परीक्षा तब होगी जब इस प्रणाली को नेटवर्क-वंचित तटीय और आदिवासी क्षेत्रों में भी उतनी ही प्रभावशीलता से तैनात किया जाए।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनडीएमए का 'सचेत' ऐप क्या है?
सचेत ऐप राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा विकसित एक डिजिटल आपदा चेतावनी प्रणाली है, जो CAP और जियो-फेंसिंग तकनीक के ज़रिए साइक्लोन, बाढ़, आकाशीय बिजली और हीट वेव जैसी आपदाओं की रियल-टाइम सूचना सीधे उपयोगकर्ता के मोबाइल पर भेजती है। यह बहुभाषी है और राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक अलर्ट पहुँचाने में सक्षम है।
गुजरात में सचेत ऐप किसानों और मछुआरों की कैसे मदद करता है?
किसानों को तूफान या भारी बारिश से पहले अलर्ट मिलने से वे समय रहते खेत से लौट सकते हैं और तैयार फसल को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा सकते हैं। मछुआरों को समुद्र में जाने से पहले मौसम की चेतावनी मिल जाती है, जिससे वे जोखिम से बच सकते हैं।
इस मानसून में सचेत और अन्य प्रणालियों से कितने अलर्ट भेजे गए?
राहत निदेशक एस.सी. सवालिया के अनुसार, अहमदाबाद में इस वर्ष के मानसून के दौरान विभिन्न चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से लगभग 70 करोड़ संदेश नागरिकों तक पहुँचाए गए।
सचेत ऐप में अलर्ट कहाँ से आते हैं?
भारतीय मौसम विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC) और अन्य विभागों के समन्वय से आपदा पूर्वानुमान के आँकड़ों का विश्लेषण कर सचेत ऐप और पोर्टल के ज़रिए राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन, पंचायत और ग्राम स्तर तक अलर्ट भेजे जाते हैं।
सचेत ऐप परंपरागत चेतावनी प्रणालियों से बेहतर कैसे है?
टीवी और रेडियो जैसे माध्यमों से आपदा अलर्ट भेजने और उस पर प्रतिक्रिया में अधिक समय लगता है। सचेत ऐप जियो-फेंसिंग तकनीक से केवल प्रभावित क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं को रियल-टाइम और लक्षित चेतावनी देता है, जिससे राहत-बचाव अभियान भी तेज़ होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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