सिलचर में एनएचआरसी की समीक्षा बैठक: आयुष्मान में 73% और यूडीआईडी कार्ड में 80% कवरेज
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 20 अगस्त 2026 को सिलचर में जिला अधिकारियों के साथ मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक के बाद कानूनगो ने बताया कि जिला पीएम आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड वितरण में 73 प्रतिशत और दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड जारी करने में 80 प्रतिशत कवरेज हासिल कर चुका है, जो उल्लेखनीय प्रगति है।
मुख्य घटनाक्रम
कानूनगो ने बताया कि यह समीक्षा बैठक कई महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखकर की गई। उन्होंने कहा, 'जिला अधिकारियों के साथ मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर एक समीक्षा बैठक की गई। यह जिला पीएम आयुष्मान योजना को लागू करने में अच्छा काम कर रहा है, जिसमें कार्ड जारी करने के मामले में 73 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया है। दिव्यांग लोगों के लिए लगभग 80 प्रतिशत यूडीआईडी कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं।'
डेटा में अंतर और सुधार के निर्देश
हालाँकि जिले के समग्र प्रदर्शन को सराहा गया, लेकिन कुछ क्षेत्रों में कमियाँ भी सामने आईं। कानूनगो ने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग और शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध स्कूल न जाने वाले बच्चों के डेटा में उल्लेखनीय अंतर पाया गया। इस पर आवश्यक सुधारात्मक निर्देश जारी किए गए हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बाल शिक्षा और मानवाधिकार सुरक्षा को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।
बालिका तस्करी पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति
बैठक में लड़कियों और बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा विशेष रूप से उठाया गया। कानूनगो ने कहा, 'लड़कियों को तस्करी से बचाने के मामले में मेरी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। पिछले डेढ़ साल में मैंने 800 से अधिक लड़कियों को बचाने में मदद की है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तस्करी के मामलों में पहले 24 घंटे सबसे अहम होते हैं और एफआईआर दर्ज करने तथा जाँच शुरू करने में कोई विलंब नहीं होना चाहिए।
बाल अपराध रोकने में शिक्षा की भूमिका
कानूनगो ने बच्चों को स्कूल से जोड़ने को बाल अपराध नियंत्रण का केंद्रीय उपाय बताया। उनके अनुसार, बच्चों का स्कूल जाना ट्रैफिकिंग, बाल विवाह और बाल श्रम जैसे अपराधों को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। गौरतलब है कि असम और पूर्वोत्तर भारत में बालिका तस्करी एक गंभीर चुनौती रही है, और एनएचआरसी की यह पहल इस दिशा में जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास है।
आगे की राह
समीक्षा बैठक के बाद जिला प्रशासन को डेटा अंतर दूर करने और स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एनएचआरसी की यह निगरानी प्रक्रिया आने वाले समय में जिले के मानवाधिकार प्रदर्शन को और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।