एनएचआरसी का बड़ा निर्देश: नवरात्रि, दिवाली और छठ पर स्ट्रीट वेंडर्स को न हटाएं, दें वैकल्पिक जगह
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 5 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा के दौरान स्थानीय वेंडर्स, स्ट्रीट वेंडर्स, फेरीवालों, कुम्हारों और छोटे व्यापारियों को बिना उचित कारण के न हटाया जाए और न ही उनकी आजीविका छीनी जाए। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि सुरक्षा कारणों से किसी स्थान को खाली कराना अनिवार्य हो, तो वेंडर्स को सामान बेचने के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान मुहैया कराया जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला देशभर के विभिन्न शहरों में त्योहारी मौसम के दौरान स्थानीय वेंडर्स और फेरीवालों को मनमाने ढंग से हटाने, उनका सामान जब्त करने, अनुचित जुर्माना लगाने और उत्पीड़न की लगातार शिकायतों से उपजा है। पिछले वर्ष त्योहारों के दौरान, सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी बेंच ने इस विषय का स्वतः संज्ञान लिया था और संबंधित राज्यों तथा स्थानीय अधिकारियों को जाँच एवं आवश्यक कार्रवाई का आदेश दिया था।
गौरतलब है कि इस वर्ष भी आयोग ने पाया कि स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है, जिसके चलते एनएचआरसी को दोबारा हस्तक्षेप करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब नवरात्रि उत्सव आरंभ हो चुके हैं और दिवाली तथा छठ पूजा नज़दीक हैं — वह अवधि जब लाखों छोटे विक्रेता अपनी वार्षिक आय का बड़ा हिस्सा कमाते हैं।
आयोग के प्रमुख निर्देश
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा के त्योहारी मौसम में वेंडर्स को उनके स्थापित स्थानों से बेदखल नहीं किया जाए। यदि अग्नि सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के कारण किसी स्थान को खाली कराना ज़रूरी हो, तो प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह वेंडर्स को तत्काल उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए।
आयोग ने यह भी आदेश दिया है कि वेंडर्स का सामान मनमाने ढंग से जब्त न किया जाए। उत्पीड़न, जबरन वसूली या अनावश्यक हस्तक्षेप की शिकायतें मिलने पर कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई की जाए।
सरकार से अपेक्षा: 'वोकल फॉर लोकल' को अमल में लाएं
एनएचआरसी ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे 'वोकल फॉर लोकल' की भावना के तहत स्थानीय वेंडर्स, पारंपरिक व्यवसायों और स्थानीय उत्पादों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दें। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया है कि वे इन निर्देशों को जिला मजिस्ट्रेटों, नगर निकायों, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों तक तत्काल पहुँचाएं और इनके अनुपालन को सुनिश्चित करें।
अनुपालन रिपोर्ट की समय-सीमा
आयोग ने स्पष्ट किया है कि लंबित मामलों में की गई अतिरिक्त या पूरक कार्रवाई की रिपोर्ट 18 अक्टूबर 2026 तक जमा की जाए। यह समय-सीमा इस बात का संकेत है कि आयोग इस बार केवल निर्देश जारी करके नहीं रुकेगा, बल्कि पालन की जाँच भी करेगा।
आम जनता और वेंडर्स पर असर
देशभर में लाखों स्ट्रीट वेंडर्स, कुम्हार और फेरीवाले त्योहारी सीज़न में अपनी वार्षिक कमाई का बड़ा हिस्सा अर्जित करते हैं। इस निर्देश से उन्हें प्रशासनिक मनमानी से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि एनएचआरसी का यह हस्तक्षेप असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के मानवाधिकारों की रक्षा में एक अहम कदम है — खासकर तब, जब यह वर्ग औपचारिक कानूनी संरक्षण से अक्सर वंचित रह जाता है।