7 जुलाई 2026
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एनएचआरसी 9 जुलाई को हरियाणा ईंट-भट्ठों में बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की वर्चुअल सुनवाई करेगा

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एनएचआरसी 9 जुलाई को हरियाणा ईंट-भट्ठों में बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की वर्चुअल सुनवाई करेगा

सारांश

एनएचआरसी 9 जुलाई 2026 को हरियाणा के ईंट-भट्ठों में बंधुआ मजदूरी के 86 कथित मामलों की वर्चुअल सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की अध्यक्षता में यह सुनवाई 1997 से सुप्रीम कोर्ट द्वारा सौंपी गई निगरानी जिम्मेदारी के तहत होगी — और राज्य सरकार से जवाबदेही माँगी जाएगी।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) 9 जुलाई 2026 को हरियाणा के ईंट-भट्ठों से जुड़े बंधुआ मजदूरी के 86 कथित मामलों की ऑनलाइन सुनवाई करेगा।
सुनवाई की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी.
रामासुब्रमणियन करेंगे।
राज्य के मुख्य सचिव , श्रम आयुक्त और सभी संबंधित जिलाधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करेगा।
मुक्त मजदूरों के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण, पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की स्थिति भी जाँची जाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 मई 1997 को इस कानून की निगरानी की जिम्मेदारी एनएचआरसी को सौंपी थी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) 9 जुलाई 2026 को हरियाणा के विभिन्न जिलों में स्थित ईंट-भट्ठों से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई करेगा। इस वर्चुअल सुनवाई की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन करेंगे और इसमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहेंगे।

सुनवाई में कौन होगा उपस्थित

आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव या उनके प्रतिनिधि, श्रम आयुक्त और संबंधित सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

इस रिपोर्ट में बंधुआ मजदूरों की पहचान, उन्हें मुक्त कराने की प्रक्रिया और ई-श्रम पोर्टल पर उनके पंजीकरण की स्थिति से संबंधित जानकारी शामिल होगी। ई-श्रम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार का प्रमुख पंजीकरण मंच है।

मुख्य घटनाक्रम और कानूनी पृष्ठभूमि

सुनवाई के दौरान आयोग उन शिकायतों पर जिलाधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा करेगा, जो एनएचआरसी ने पहले उन्हें भेजी थीं। साथ ही बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के प्रावधानों और बंधुआ मुक्ति मोर्चा तथा एशियाड मजदूर मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 11 मई 1997 को इस कानून और अपने आदेशों के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी एनएचआरसी को सौंपी थी। यह सुनवाई उसी दीर्घकालिक निगरानी ढाँचे के अंतर्गत हो रही है।

पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस

आयोग पुनर्वास पैकेजों की स्थिति की भी समीक्षा करेगा, जिसमें आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और वैकल्पिक रोजगार के अवसरों की जानकारी शामिल होगी। मुक्त कराए गए मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए ई-श्रम पोर्टल पर उनके पंजीकरण की प्रगति पर भी चर्चा होगी।

इसके अतिरिक्त, संबंधित जिलों में बंधुआ मजदूरी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

आम जनता और मजदूरों पर असर

यह सुनवाई हरियाणा के उन हजारों प्रवासी और स्थानीय श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो कथित तौर पर ईंट-भट्ठों में शोषणकारी परिस्थितियों में काम करने को विवश हैं। ऐसे श्रमिक अक्सर अग्रिम ऋण के जाल में फँसकर बंधुआ मजदूरी में धकेल दिए जाते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब असंगठित क्षेत्र में श्रम अधिकारों की निगरानी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। एनएचआरसी की यह पहल बंधुआ मजदूरी उन्मूलन के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

आगे क्या होगा

9 जुलाई 2026 की सुनवाई के बाद आयोग संबंधित जिलाधिकारियों और राज्य सरकार को आगे की कार्रवाई के निर्देश जारी कर सकता है। अनुपालन में कमी पाए जाने पर एनएचआरसी राज्य सरकार से जवाब-तलब करने का अधिकार रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्या मुक्त मजदूर वास्तव में स्थायी आजीविका पा सके? ई-श्रम पंजीकरण एक कदम है, पर बिना सत्यापन-योग्य पुनर्वास परिणामों के यह महज कागजी खानापूर्ति बन सकती है। एनएचआरसी की यह पहल तभी सार्थक होगी जब वह अनुपालन न करने वाले अधिकारियों पर ठोस जवाबदेही तय करे।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी 9 जुलाई को किन मामलों की सुनवाई करेगा?
एनएचआरसी 9 जुलाई 2026 को हरियाणा के विभिन्न जिलों में स्थित ईंट-भट्ठों से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की वर्चुअल सुनवाई करेगा। इस सुनवाई की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन करेंगे।
इस सुनवाई में हरियाणा सरकार से क्या अपेक्षित है?
राज्य के मुख्य सचिव या उनके प्रतिनिधि, श्रम आयुक्त और सभी संबंधित जिलाधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे बंधुआ मजदूरों की पहचान, मुक्ति, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण और पुनर्वास की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपेक्षा है।
एनएचआरसी को बंधुआ मजदूरी मामलों की निगरानी का अधिकार कैसे मिला?
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 मई 1997 को बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 और अपने आदेशों के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी एनएचआरसी को सौंपी थी। बंधुआ मुक्ति मोर्चा और एशियाड मजदूर मामलों में दिए गए न्यायालय के निर्देश इस निगरानी का आधार हैं।
मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के लिए क्या प्रावधान हैं?
आयोग आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और वैकल्पिक रोजगार के अवसरों सहित पुनर्वास पैकेजों की स्थिति की समीक्षा करेगा। मुक्त मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए ई-श्रम पोर्टल पर उनके पंजीकरण की प्रगति भी जाँची जाएगी।
ई-श्रम पोर्टल क्या है और बंधुआ मजदूरों के लिए यह क्यों जरूरी है?
ई-श्रम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार का प्रमुख पंजीकरण पोर्टल है। बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए श्रमिकों का इस पोर्टल पर पंजीकरण उन्हें सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और लाभों तक पहुँच दिलाने के लिए आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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