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बारामूला में एनआईए की बड़ी कार्रवाई: यूएपीए आरोपी शाहीन अहमद लोन की 7.5 मरला जमीन कुर्क

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बारामूला में एनआईए की बड़ी कार्रवाई: यूएपीए आरोपी शाहीन अहमद लोन की 7.5 मरला जमीन कुर्क

सारांश

एनआईए ने बारामूला के कनिसपोरा गांव में यूएपीए आरोपी शाहीन अहमद लोन की 7.5 मरला जमीन कुर्क की। अवैध हथियार मामले में गिरफ्तार लोन फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। यह कार्रवाई विशेष एनआईए अदालत के 30 अप्रैल के आदेश पर हुई।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 17 जून को बारामूला के कनिसपोरा गांव में यूएपीए आरोपी की संपत्ति कुर्क की।
कुर्क संपत्ति सर्वे नंबर 1192 के तहत दर्ज 7.5 मरला भूमि है।
आरोपी शाहीन अहमद लोन अवैध हथियार मामले में गिरफ्तार होकर तिहाड़ जेल, नई दिल्ली में बंद है।
कार्रवाई एनआईए केस आरसी-01/2020/एनआईए/जेएमयू और यूएपीए धारा 33(1) के तहत की गई।
विशेष एनआईए अदालत, जम्मू के 30 अप्रैल के आदेश के बाद यह कुर्की संभव हुई।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बुधवार, 17 जून को जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी शाहीन अहमद लोन की अचल संपत्ति कुर्क की। यह कार्रवाई विशेष एनआईए अदालत, जम्मू द्वारा 30 अप्रैल को जारी आदेश के अनुपालन में की गई।

कुर्की का विवरण

कुर्क की गई संपत्ति उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के कनिसपोरा गांव में स्थित है। यह भूमि सर्वे नंबर 1192 के तहत दर्ज 7.5 मरला की अचल संपत्ति है। शाहीन अहमद लोन, स्वर्गीय नजीर अहमद लोन के पुत्र हैं और उसी गांव के निवासी हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई एनआईए केस आरसी-01/2020/एनआईए/जेएमयू के संदर्भ में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 33(1) के तहत की गई है। सूत्रों के अनुसार, शाहीन अहमद लोन को अवैध हथियारों से जुड़े एक मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह वर्तमान में नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में है।

एनआईए की भूमिका और जम्मू-कश्मीर में गतिविधियां

राष्ट्रीय जांच एजेंसी भारत की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2008 में एनआईए अधिनियम के अंतर्गत की गई थी। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। एजेंसी आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी, तथा नकली मुद्रा नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच करती है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में एनआईए ने आतंकी फंडिंग, अलगाववादी नेटवर्क और आतंकवादी हमलों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच की है। संपत्ति कुर्की की यह प्रक्रिया आतंकी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जाती है।

आगे क्या होगा

कुर्क की गई संपत्ति अब विशेष एनआईए अदालत की निगरानी में रहेगी और मामले की सुनवाई जारी रहने के साथ इस पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा लिया जाएगा। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में एनआईए की सक्रियता और यूएपीए के प्रवर्तन को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु आलोचक लंबे समय से यह सवाल उठाते रहे हैं कि बिना अंतिम दोषसिद्धि के संपत्ति कुर्की न्यायिक संतुलन को प्रभावित करती है। जम्मू-कश्मीर में ऐसी कार्रवाइयों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि एजेंसी मुकदमे के साथ-साथ आर्थिक दबाव की नीति पर भी चल रही है — जिसकी प्रभावशीलता अंततः न्यायालय के अंतिम निर्णयों से ही आंकी जाएगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने बारामूला में किसकी संपत्ति कुर्क की?
एनआईए ने बारामूला जिले के कनिसपोरा गांव निवासी यूएपीए आरोपी शाहीन अहमद लोन की 7.5 मरला अचल संपत्ति कुर्क की है। शाहीन अहमद लोन, स्वर्गीय नजीर अहमद लोन के पुत्र हैं और अवैध हथियार मामले में पहले से गिरफ्तार हैं।
यह कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई?
यह कुर्की गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 33(1) के तहत एनआईए केस आरसी-01/2020/एनआईए/जेएमयू में की गई। विशेष एनआईए अदालत, जम्मू ने 30 अप्रैल को इसका आदेश जारी किया था।
शाहीन अहमद लोन अभी कहां है?
शाहीन अहमद लोन वर्तमान में नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में बंद है। उसे अवैध हथियारों से जुड़े मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
यूएपीए के तहत संपत्ति कुर्की क्यों की जाती है?
यूएपीए की धारा 33(1) एनआईए को आतंकवाद से जुड़े मामलों में आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार देती है। इसका उद्देश्य आतंकी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को कमजोर करना और अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करना है।
जम्मू-कश्मीर में एनआईए किस तरह के मामलों की जांच करती है?
जम्मू-कश्मीर में एनआईए आतंकी फंडिंग, अलगाववादी नेटवर्क, अवैध हथियारों की तस्करी और आतंकवादी हमलों से जुड़े मामलों की जांच करती है। एजेंसी 2008 में स्थापित हुई थी और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है।
राष्ट्र प्रेस
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