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निफ्टी-सेंसेक्स में लगातार चौथे सप्ताह तेजी, कच्चे तेल की गिरावट और फेड की नरमी से बाजार को मिला सहारा

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निफ्टी-सेंसेक्स में लगातार चौथे सप्ताह तेजी, कच्चे तेल की गिरावट और फेड की नरमी से बाजार को मिला सहारा

सारांश

कच्चे तेल की कीमतों में राहत और फेड की नरम टिप्पणी ने भारतीय बाजार को लगातार चौथे सप्ताह ऊपर रखा। निफ्टी 24,270 और सेंसेक्स 77,763 पर बंद हुए। स्मॉलकैप ने 2.05% की छलांग लगाई, जो व्यापक बाजार में बढ़ते भरोसे का संकेत है।

मुख्य बातें

निफ्टी 50 सप्ताह में 0.89% चढ़कर 24,270 पर बंद; सेंसेक्स 0.86% मजबूत होकर 77,763 पर।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने 2.05% की उल्लेखनीय साप्ताहिक बढ़त दर्ज की।
रियल एस्टेट , फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर शीर्ष पर; पीएसयू बैंक और ऊर्जा शेयर पिछड़े।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव घटने और फेड चेयरमैन की नरम टिप्पणी से कच्चे तेल में गिरावट आई।
अगले सप्ताह निफ्टी के लिए 24,400 रेजिस्टेंस और 24,000 मजबूत सपोर्ट स्तर।
निवेशकों की नजर FOMC मिनट्स , Q1 नतीजों और भारत-जापान व्यापार वार्ता पर।

भारतीय शेयर बाजार में 4 जुलाई 2025 को समाप्त सप्ताह के दौरान लगातार चौथी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की नरम टिप्पणी प्रमुख उत्प्रेरक रहे। निफ्टी 50 ने सप्ताह भर में 0.89 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.86 प्रतिशत मजबूत हुआ।

साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े

निफ्टी 50 सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 0.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,270 पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह की कुल बढ़त 0.89 प्रतिशत रही। बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 262 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 77,763 पर बंद हुआ और साप्ताहिक आधार पर 0.86 प्रतिशत मजबूत हुआ।

व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स सप्ताह के दौरान 0.64 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने 2.05 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की — यह संकेत देते हुए कि निवेशकों की रुचि केवल लार्जकैप तक सीमित नहीं रही।

सेक्टोरल प्रदर्शन: रियल एस्टेट-फार्मा आगे, पीएसयू बैंक पिछड़े

सेक्टोरल मोर्चे पर रियल एस्टेट, फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, पीएसयू बैंक और ऊर्जा क्षेत्र के शेयर अपेक्षाकृत कमजोर रहे। आईटी सेक्टर में भी उल्लेखनीय रिकवरी देखी गई।

विश्लेषकों के अनुसार, शॉर्ट कवरिंग और एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने में भारतीय आईटी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है, जिससे आईटी शेयरों को सहारा मिला।

वैश्विक कारक: फेड की नरमी और कच्चे तेल में राहत

सप्ताह की शुरुआत सतर्कता के माहौल में हुई थी। अमेरिका और ईरान के बीच शांति व्यवस्था की स्थिरता पर संदेह, आगामी तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली और मानसून की धीमी शुरुआत ने शुरुआती दिनों में दबाव बनाए रखा।

हालांकि, सप्ताह के अंत तक परिस्थितियाँ बदल गईं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की नरम टिप्पणी और अमेरिका के कमजोर श्रम बाजार के आँकड़ों ने वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीदें मजबूत कीं।

भारत-जापान शिखर सम्मेलन से निवेशकों में उत्साह

घरेलू स्तर पर भारत-जापान शिखर सम्मेलन को लेकर भी बाजार में सकारात्मक माहौल रहा। निवेशकों को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहयोग और प्रस्तावित रुपया-येन भुगतान व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में प्रगति होगी।

आगे की राह: तकनीकी स्तर और प्रमुख जोखिम

विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले सप्ताह में निफ्टी के लिए 24,400 निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) स्तर रहेगा, जबकि 24,200 पहला महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) स्तर माना जा रहा है। इसके नीचे 24,000 मजबूत सपोर्ट का स्तर होगा। बैंक निफ्टी के लिए 57,500–57,600 का दायरा प्रमुख सपोर्ट और 58,200–58,300 रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।

निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, मानसून की प्रगति, बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज वृद्धि और जापान, ब्रिटेन तथा अमेरिका के साथ भारत की चल रही व्यापार वार्ताओं पर रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि कमाई के अनुमानों में कटौती, मानसून से जुड़ी महंगाई की चिंताएँ और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की सतर्कता जैसे जोखिम बने हुए हैं, लेकिन इनका बड़ा हिस्सा पहले ही बाजार में समाहित हो चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी नींव मुख्यतः बाहरी कारकों — कच्चे तेल की कीमतों और फेड की भाषा — पर टिकी है, न कि घरेलू आय वृद्धि पर। गौरतलब है कि पहली तिमाही के नतीजों से पहले कमाई के अनुमानों में कटौती का सिलसिला जारी है, जो इस रैली की स्थायित्व पर सवाल खड़ा करता है। स्मॉलकैप में 2.05% की उछाल खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का संकेत है — यह उत्साह तब तक ठीक है जब तक FII की सतर्कता और मानसून की अनिश्चितता मिलकर धारणा को पलट न दें। बाजार की असली परीक्षा Q1 नतीजों के मौसम में होगी।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स कितना चढ़े?
4 जुलाई 2025 को समाप्त सप्ताह में निफ्टी 50 ने 0.89% और बीएसई सेंसेक्स ने 0.86% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की। शुक्रवार को निफ्टी 24,270 और सेंसेक्स 77,763 पर बंद हुए।
शेयर बाजार में इस सप्ताह तेजी के क्या कारण रहे?
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की नरम टिप्पणी तथा कमजोर अमेरिकी श्रम बाजार के आँकड़ों ने वैश्विक ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ाई। इसके अलावा भारत-जापान शिखर सम्मेलन को लेकर भी बाजार में सकारात्मक माहौल रहा।
किन सेक्टरों ने सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन किया?
रियल एस्टेट, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर इस सप्ताह के शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहे, जबकि पीएसयू बैंक और ऊर्जा क्षेत्र के शेयर अपेक्षाकृत कमजोर रहे। आईटी सेक्टर में भी उल्लेखनीय रिकवरी देखी गई।
अगले सप्ताह निफ्टी के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर क्या हैं?
विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,400 निकटतम रेजिस्टेंस स्तर है, जबकि 24,200 पहला सपोर्ट और 24,000 मजबूत सपोर्ट स्तर है। बैंक निफ्टी के लिए 57,500–57,600 सपोर्ट और 58,200–58,300 रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।
आगे बाजार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?
निवेशकों की नजर FOMC बैठक के मिनट्स, भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, मानसून की प्रगति और जापान, ब्रिटेन तथा अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ताओं पर रहेगी। FII की सतर्कता और मानसून से जुड़ी महंगाई की चिंताएँ भी प्रमुख जोखिम बनी हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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