उज्जैन सराफा गर्ल्स स्कूल शिफ्टिंग पर रोक, छात्राओं के विरोध के बाद प्रशासन का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के ऐतिहासिक सराफा गर्ल्स स्कूल को शहर से 10 से 15 किलोमीटर दूर दावतखेड़ी में स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव के विरुद्ध छात्राओं के तीखे विरोध के बाद प्रशासन ने 18 अगस्त 2026 को शिफ्टिंग पर रोक लगाने का निर्णय लिया। छात्राओं की सुरक्षा, लंबी दूरी और दैनिक आवागमन की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया है कि जब तक शहर के भीतर नए भवन की वैकल्पिक व्यवस्था पूरी नहीं हो जाती, तब तक स्कूल अपने मौजूदा परिसर में ही संचालित होता रहेगा।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने बताया कि स्कूल के संबंध में यह निर्णय जनप्रतिनिधियों और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राएं अपनी समस्याएं लेकर प्रशासन के पास पहुँची थीं, परंतु उस दिन कलेक्टर से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद छात्राओं ने वीडियो जारी कर अपनी बात सार्वजनिक की, जिससे मामले पर गंभीरता से विचार हुआ।
फिरोजिया ने कहा कि छात्राओं की परेशानी वास्तविक है — यदि स्कूल करीब 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित होता, तो रोज़ाना आवागमन में भारी असुविधा होती। बस सुविधा उपलब्ध कराने के बावजूद किसी तकनीकी खराबी या अन्य परिस्थिति में छात्राओं को जोखिम उठाना पड़ सकता था।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और भावी योजना
सांसद फिरोजिया ने बताया कि महाकाल क्षेत्र के आसपास भीड़ के कारण छात्राओं को आवागमन में होने वाली परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल के पीछे की ओर सड़क निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नए स्कूल भवन के लिए बजट आवंटित कर दिया है और विधायक तथा कलेक्टर को शहर के मध्य या निकटवर्ती क्षेत्र में उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सांसद ने स्पष्ट किया कि जब तक नई इमारत पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती, तब तक सराफा गर्ल्स स्कूल को वर्तमान स्थान से नहीं हटाया जाएगा।
छात्राओं की प्रतिक्रिया
छात्रा वंशिका चन्द्रावत ने प्रशासन के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विरोध की मुख्य माँग पूरी हो गई है। उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और मीडिया का आभार जताया, जिनके माध्यम से छात्राओं की आवाज़ शहरभर तक और प्रशासन तक पहुँची। वंशिका ने आग्रह किया कि यदि भविष्य में कभी स्थानांतरण आवश्यक हो, तो स्कूल को शहर के भीतर एक से डेढ़ किलोमीटर की परिधि में ही रखा जाए।
छात्रा मोनिका सिसोदिया ने बताया कि विरोध का सबसे बड़ा कारण छात्राओं की सुरक्षा थी। दावतखेड़ी में गर्ल्स और बॉयज स्कूल के एक साथ होने को लेकर कई अभिभावक सहमत नहीं थे। इसके अलावा प्रस्तावित स्थान की दूरी 10 से 12 किलोमीटर होने पर किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी को लेकर भी अभिभावक चिंतित थे।
आम जनता और अभिभावकों पर असर
मोनिका ने कहा कि मौजूदा स्कूल के निकट महाकाल थाना होने और आसपास लोगों की उपस्थिति के कारण छात्राओं को सुरक्षा का भरोसा रहता है। शहर के मध्य में नए स्कूल भवन बनाने के फैसले का उन्होंने स्वागत किया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बालिका शिक्षा तक पहुँच और सुरक्षित आवागमन को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
प्रशासन अब शहर के भीतर उपयुक्त भूमि की पहचान करेगा और नए स्कूल भवन का निर्माण पूरा होने तक सराफा गर्ल्स स्कूल अपने वर्तमान परिसर में ही चलता रहेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट आवंटन और भूमि चिन्हांकन की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब क्रियान्वयन की गति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।