31 जुलाई 2026
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कर्नाटक को 2014-2026 के बीच मिले ₹4 लाख करोड़: निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के 'भेदभाव' के दावे को नकारा

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कर्नाटक को 2014-2026 के बीच मिले ₹4 लाख करोड़: निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के 'भेदभाव' के दावे को नकारा

सारांश

निर्मला सीतारमण ने आंकड़ों की फेहरिस्त पेश कर कर्नाटक के 'भेदभाव' वाले दावे को सीधे चुनौती दी — 2014-2026 में ₹4 लाख करोड़ का कर-बंटवारा, यूपीए काल के ₹82,000 करोड़ से पाँच गुना अधिक। वित्त वर्ष 2026-27 में अकेले ₹63,000 करोड़ का प्रावधान, जो यूपीए के पूरे दशक से 76% ज़्यादा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 14 जून 2026 को कर्नाटक को मिले केंद्रीय फंड के आंकड़े सार्वजनिक किए।
2014 से 2026 के बीच कर-बंटवारे के तहत कर्नाटक को लगभग ₹4 लाख करोड़ मिले — यूपीए काल के ₹82,000 करोड़ से करीब पाँच गुना अधिक।
अनुदान और सहायता के रूप में 2014-2026 में ₹2.71 लाख करोड़ मिले, जबकि यूपीए काल में यह राशि ₹60,000 करोड़ थी।
50 वर्षों की ब्याज मुक्त ऋण योजना के तहत 2021 से अब तक कर्नाटक को ₹18,000 करोड़ से अधिक की सहायता।
वित्त वर्ष 2026-27 में कर-हिस्सेदारी के रूप में ₹63,000 करोड़ का प्रावधान — यूपीए के पूरे दशक से 76% अधिक।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 14 जून 2026 को ठोस आंकड़ों के साथ यह स्थापित किया कि कर्नाटक को केंद्र से अब तक का सर्वाधिक वित्तीय आवंटन मिला है — और इस तरह राज्य की कांग्रेस सरकार के उस दावे को सीधे खारिज किया जिसमें कहा जाता रहा है कि राज्य केंद्र को भारी राजस्व देता है, लेकिन उसके अनुपात में धन वापस नहीं पाता। वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत कर-बंटवारे के माध्यम से 2014 से 2026 के बीच कर्नाटक को लगभग ₹4 लाख करोड़ प्राप्त हुए हैं।

यूपीए बनाम एनडीए: आंकड़ों की तुलना

सीतारमण ने केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर एक विस्तृत तुलनात्मक तस्वीर पेश की। उनके अनुसार, यूपीए शासनकाल के 10 वर्षों में कर-बंटवारे के तहत कर्नाटक को केवल ₹82,000 करोड़ मिले थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह राशि बढ़कर लगभग ₹4 लाख करोड़ हो गई — अर्थात लगभग पाँच गुना अधिक।

अनुदान और सहायता के मद में भी अंतर उतना ही स्पष्ट है। यूपीए के 10 वर्षों में कर्नाटक को इस मद में लगभग ₹60,000 करोड़ मिले, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह राशि ₹2.71 लाख करोड़ रही।

ब्याज मुक्त ऋण योजना और कोविड के बाद की रणनीति

वित्त मंत्री ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह माना कि राज्यों की आर्थिक मज़बूती के बिना राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बनाए रखना संभव नहीं है। इसी सोच के तहत केंद्र ने सभी राज्यों के लिए 50 वर्षों की ब्याज मुक्त ऋण योजना शुरू की।

इस योजना के अंतर्गत 2021 से अब तक कर्नाटक को ₹18,000 करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि वित्त आयोग की किसी अनिवार्यता के तहत नहीं, बल्कि राज्यों में पूंजीगत निवेश और विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दी गई है।

वित्त वर्ष 2026-27 का प्रावधान

सीतारमण ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में केवल कर-हिस्सेदारी के रूप में कर्नाटक को ₹63,000 करोड़ मिलने का प्रावधान है। उनके दावे के अनुसार, यह एकल वर्ष की राशि यूपीए शासन के पूरे 10 वर्षों में मिले फंड से 76 प्रतिशत अधिक है।

सहकारी संघवाद और 'विकसित भारत' का लक्ष्य

वित्त मंत्री ने हाल ही में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक का संदर्भ देते हुए कहा कि उसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए थे और प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि केंद्र और राज्य मिलकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करेंगे। सीतारमण ने यह भी कहा कि भारत के विकास की यात्रा में केंद्र और राज्यों दोनों की साझी भूमिका है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध — विशेषकर दक्षिणी राज्यों और केंद्र के बीच — एक संवेदनशील राजनीतिक विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि राज्य जितना केंद्र को देता है, उतना वापस नहीं पाता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बहस अधूरी है जब तक 'प्रति रुपया योगदान बनाम प्रति रुपया वापसी' का अनुपात सामने न आए — क्योंकि कर्नाटक का मूल तर्क कुल राशि को लेकर नहीं, बल्कि उसके राजस्व योगदान के सापेक्ष हिस्सेदारी को लेकर है। वित्त आयोग का फॉर्मूला जनसंख्या और पिछड़ेपन को प्राथमिकता देता है, जिससे स्वाभाविक रूप से विकसित राज्यों को अपेक्षाकृत कम हिस्सा मिलता है — यह संरचनात्मक मुद्दा है, न कि राजनीतिक। ब्याज मुक्त ऋण योजना की प्रशंसा उचित है, पर यह विवेकाधीन है और इसे कर-बंटवारे के संस्थागत अधिकार के समतुल्य नहीं रखा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र-राज्य वित्तीय ढाँचे में उन राज्यों के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन है जो राजकोषीय अनुशासन और उच्च जीएसटी संग्रह में अग्रणी हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण ने कर्नाटक को मिले फंड के बारे में क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2014 से 2026 के बीच वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत कर्नाटक को लगभग ₹4 लाख करोड़ का कर-बंटवारा हुआ, जो यूपीए काल के 10 वर्षों में मिले ₹82,000 करोड़ से करीब पाँच गुना अधिक है। इसके अलावा अनुदान और सहायता के रूप में ₹2.71 लाख करोड़ अतिरिक्त मिले।
कर्नाटक सरकार का 'भेदभाव' वाला दावा क्या है?
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का तर्क रहा है कि राज्य केंद्र को बड़ा राजस्व देता है, लेकिन बदले में उसे अनुपात में पर्याप्त धन नहीं मिलता। सीतारमण ने इस दावे को तथ्यों के आधार पर गलत बताते हुए आंकड़े पेश किए।
50 वर्षों की ब्याज मुक्त ऋण योजना क्या है और कर्नाटक को इससे कितना मिला?
यह केंद्र सरकार की एक विवेकाधीन योजना है जिसके तहत राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है। 2021 से अब तक इस योजना के तहत कर्नाटक को ₹18,000 करोड़ से अधिक की सहायता मिली है।
वित्त वर्ष 2026-27 में कर्नाटक को केंद्र से कितना फंड मिलेगा?
सीतारमण के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में केवल कर-हिस्सेदारी के रूप में कर्नाटक को ₹63,000 करोड़ मिलने का प्रावधान है। उनका दावा है कि यह एकल वर्ष की राशि यूपीए के पूरे 10 वर्षों में मिले फंड से 76 प्रतिशत अधिक है।
नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक का इस संदर्भ में क्या महत्व है?
सीतारमण ने हाल ही में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सामने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य मिलकर 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करेंगे। यह बैठक सहकारी संघवाद की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में पेश की गई।
राष्ट्र प्रेस
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