कर्नाटक को 2014-2026 के बीच मिले ₹4 लाख करोड़: निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के 'भेदभाव' के दावे को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 14 जून 2026 को ठोस आंकड़ों के साथ यह स्थापित किया कि कर्नाटक को केंद्र से अब तक का सर्वाधिक वित्तीय आवंटन मिला है — और इस तरह राज्य की कांग्रेस सरकार के उस दावे को सीधे खारिज किया जिसमें कहा जाता रहा है कि राज्य केंद्र को भारी राजस्व देता है, लेकिन उसके अनुपात में धन वापस नहीं पाता। वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत कर-बंटवारे के माध्यम से 2014 से 2026 के बीच कर्नाटक को लगभग ₹4 लाख करोड़ प्राप्त हुए हैं।
यूपीए बनाम एनडीए: आंकड़ों की तुलना
सीतारमण ने केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर एक विस्तृत तुलनात्मक तस्वीर पेश की। उनके अनुसार, यूपीए शासनकाल के 10 वर्षों में कर-बंटवारे के तहत कर्नाटक को केवल ₹82,000 करोड़ मिले थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह राशि बढ़कर लगभग ₹4 लाख करोड़ हो गई — अर्थात लगभग पाँच गुना अधिक।
अनुदान और सहायता के मद में भी अंतर उतना ही स्पष्ट है। यूपीए के 10 वर्षों में कर्नाटक को इस मद में लगभग ₹60,000 करोड़ मिले, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह राशि ₹2.71 लाख करोड़ रही।
ब्याज मुक्त ऋण योजना और कोविड के बाद की रणनीति
वित्त मंत्री ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह माना कि राज्यों की आर्थिक मज़बूती के बिना राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बनाए रखना संभव नहीं है। इसी सोच के तहत केंद्र ने सभी राज्यों के लिए 50 वर्षों की ब्याज मुक्त ऋण योजना शुरू की।
इस योजना के अंतर्गत 2021 से अब तक कर्नाटक को ₹18,000 करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि वित्त आयोग की किसी अनिवार्यता के तहत नहीं, बल्कि राज्यों में पूंजीगत निवेश और विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दी गई है।
वित्त वर्ष 2026-27 का प्रावधान
सीतारमण ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में केवल कर-हिस्सेदारी के रूप में कर्नाटक को ₹63,000 करोड़ मिलने का प्रावधान है। उनके दावे के अनुसार, यह एकल वर्ष की राशि यूपीए शासन के पूरे 10 वर्षों में मिले फंड से 76 प्रतिशत अधिक है।
सहकारी संघवाद और 'विकसित भारत' का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने हाल ही में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक का संदर्भ देते हुए कहा कि उसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए थे और प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि केंद्र और राज्य मिलकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करेंगे। सीतारमण ने यह भी कहा कि भारत के विकास की यात्रा में केंद्र और राज्यों दोनों की साझी भूमिका है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध — विशेषकर दक्षिणी राज्यों और केंद्र के बीच — एक संवेदनशील राजनीतिक विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि राज्य जितना केंद्र को देता है, उतना वापस नहीं पाता।