नीतीश कुमार का इस्तीफा: भाजपा के दबाव में तारिक अनवर का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का इस्तीफा भाजपा के दबाव में आया।
- तारिक अनवर ने इसे बिहार की जनता के साथ धोखा
- राज्यसभा में ओबीसी मुद्दे पर विवाद हुआ।
- विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।
- संविधान के अनुसार, दो सदनों में से एक से इस्तीफा देना अनिवार्य है।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने टिप्पणी की है कि यह इस्तीफा नीतीश कुमार की स्वयं की इच्छा से नहीं, बल्कि भाजपा के दबाव में दिया गया है, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
तारिक अनवर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में यह भी कहा कि नीतीश कुमार का इस्तीफा एक आवश्यकता थी, क्योंकि संविधान के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति दो सदनों का सदस्य है, तो उसे एक सदन से इस्तीफा देना अनिवार्य है।
उन्होंने नीतीश के इस्तीफे को बिहार की जनता के साथ धोखा बताया और कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को अधर में छोड़ दिया है। चुनाव के दौरान किए गए वादों को उन्होंने नहीं निभाया है। बिहार की जनता को यह भी ज्ञात है कि नीतीश ने भाजपा के दबाव में इस्तीफा दिया है।
सोमवार को राज्यसभा में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) से मुस्लिम समुदाय को बाहर किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलना चाहिए।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया और सरकार के रुख के खिलाफ विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।