नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 33 ई-बसें लॉन्च, CM योगी ने दिखाई हरी झंडी; 3 हाइड्रोजन बसें भी रवाना
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 जून 2026 को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लिए कुल 33 हाईटेक इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इसी अवसर पर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में एनटीपीसी दादरी द्वारा निर्मित 3 ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों को भी रवाना किया गया।
बस संचालन का ढाँचा
नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण — तीनों क्षेत्रों में 11-11-11 यानी कुल 33 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। इन बसों का परिचालन बोटेनिकल गार्डन से होगा और ये नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सेक्टर-62, कौशांबी बस डिपो तथा ग्रेटर नोएडा वेस्ट सहित प्रमुख गंतव्यों को आपस में जोड़ेंगी। इस नेटवर्क से लाखों दैनिक यात्रियों को तेज़ और सुलभ परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
यात्री सुरक्षा के इंतज़ाम
प्रत्येक ई-बस में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी चालक सीट से की जा सकती है। बसों के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर भी कैमरे स्थापित हैं। इसके अलावा पैनिक बटन, एसओएस अलर्ट सिस्टम और इमरजेंसी गेट जैसी सुविधाएँ दी गई हैं। किसी भी आपात स्थिति में यात्री एसओएस बटन दबाकर चालक को तत्काल सूचित कर सकेंगे।
ग्रीन हाइड्रोजन बसें: पर्यावरणीय महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल जल-वाष्प निकलती है, जिससे वायु प्रदूषण शून्य रहता है। इस परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 2,080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा — जो करीब 1,750 पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है। साथ ही प्रति वर्ष लगभग 1,000 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
प्रत्येक हाइड्रोजन बस 42 यात्रियों की क्षमता और 12 मीटर लंबाई वाली है। एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरने पर यह बस लगभग 750 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। यह परियोजना देश का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन भी है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें शहरी परिवहन को जीवाश्म ईंधन से मुक्त करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही हैं। गौरतलब है कि NCR पहले से ही देश के सर्वाधिक वायु-प्रदूषित क्षेत्रों में गिना जाता है, और ऐसे में इलेक्ट्रिक व हाइड्रोजन बसों का एक साथ संचालन शुरू होना नीतिगत दृष्टि से उल्लेखनीय है। YEIDA और एनटीपीसी दादरी की साझेदारी इसे एक सार्वजनिक-निजी सहयोग का व्यावहारिक मॉडल भी बनाती है।
आने वाले महीनों में इन बसों के विस्तार और हाइड्रोजन फ्यूलिंग बुनियादी ढाँचे की प्रगति पर नज़र रखी जाएगी, जो इस पहल की दीर्घकालिक सफलता तय करेगी।