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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बोले — राष्ट्र निर्माण सामूहिक जिम्मेदारी, नागरिक और संस्थाएँ समान भागीदार

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बोले — राष्ट्र निर्माण सामूहिक जिम्मेदारी, नागरिक और संस्थाएँ समान भागीदार

सारांश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जयपुर में माहेश्वरी आयुर्वेद केंद्र के शिलान्यास पर कहा कि राष्ट्र निर्माण सामूहिक दायित्व है — आर्थिक योगदान से परे, सेवा और समर्पण भी उतने ही मूल्यवान हैं। 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को उन्होंने भारत की असली शक्ति बताया।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 22 अगस्त को जयपुर में माहेश्वरी आयुर्वेद विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र के शिलान्यास समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है।
योगदान को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं — परिश्रम, कौशल, ज्ञान और निस्वार्थ सेवा के रूप में भी मापा जाना चाहिए।
'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को उन्होंने समाज की नैतिक शक्ति और लचीलेपन का आधार बताया।
माहेश्वरी समाज ने 1926 से शिक्षा के क्षेत्र में और स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय योगदान दिया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 22 अगस्त को जयपुर में आयोजित माहेश्वरी आयुर्वेद विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र के शिलान्यास समारोह में कहा कि राष्ट्र निर्माण किसी एक वर्ग या संस्था का दायित्व नहीं, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका समान रूप से अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राष्ट्रीय मिशन में योगदान को केवल आर्थिक मापदंडों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

योगदान की व्यापक परिभाषा

बिरला ने कहा कि समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान परिश्रम, समर्पण, पेशेवर कौशल, ज्ञान और निस्वार्थ सेवा के रूप में भी हो सकता है। उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति या संगठन की सेवा का मूल्यांकन केवल धन से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव और मानवीय संवेदनशीलता से होना चाहिए।

महामारी और सामूहिक चेतना

महामारी के दौर का उल्लेख करते हुए ओम बिरला ने कहा कि भारत को अपनी सामूहिक सामाजिक चेतना और एक-दूसरे की देखभाल करने की सदियों पुरानी परंपरा से असाधारण शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने जोर दिया कि सामूहिक जिम्मेदारी, करुणा और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना ही समाज को विकट परिस्थितियों में नैतिक बल और लचीलापन प्रदान करती है।

माहेश्वरी समाज की विरासत

लोकसभा अध्यक्ष ने जयपुर स्थित माहेश्वरी समाज को नए संस्थान की स्थापना पर बधाई दी और कहा कि यह समाज की मानवता-सेवा की यात्रा में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय है। उन्होंने माहेश्वरी समाज की सेवा, त्याग, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी की विरासत को 'गौरवशाली और प्रेरणादायक' बताया।

बिरला ने याद दिलाया कि 1926 में ही माहेश्वरी समाज के दूरदर्शी सदस्यों ने शिक्षा को एक प्रबुद्ध, सुसंस्कृत और प्रगतिशील समाज की आधारशिला के रूप में पहचान लिया था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्कूलों और शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए अपनी ऊर्जा और सामर्थ्य एकजुट किया।

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

बिरला ने यह भी रेखांकित किया कि माहेश्वरी समाज ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और पूज्य भामाशाह से जुड़ी त्याग एवं देशभक्ति की अमर भावना को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया। यह संदर्भ इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक संस्थाओं की जड़ें राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ी रही हैं।

आगे की राह

माहेश्वरी आयुर्वेद विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र का यह शिलान्यास आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को सामुदायिक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि इन संस्थाओं को जवाबदेही और पारदर्शिता के किस ढाँचे में संचालित किया जाएगा। माहेश्वरी समाज की 1926 से चली आ रही विरासत उल्लेखनीय है, पर आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र की कार्यप्रणाली, वित्तपोषण और नियामक अनुपालन पर स्पष्टता सार्वजनिक विश्वास के लिए ज़रूरी होगी।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जयपुर में क्या कहा?
ओम बिरला ने 22 अगस्त को जयपुर में माहेश्वरी आयुर्वेद विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र के शिलान्यास पर कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सामूहिक प्रयास है और इसमें नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों व सामाजिक संस्थाओं की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने योगदान को केवल आर्थिक दृष्टि से न मापने की अपील की।
माहेश्वरी आयुर्वेद विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र क्या है?
यह जयपुर में माहेश्वरी समाज द्वारा स्थापित किया जा रहा एक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य एवं अनुसंधान संस्थान है, जिसका शिलान्यास 22 अगस्त को हुआ। यह संस्थान पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा से जोड़ने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
'वसुधैव कुटुंबकम' का उल्लेख बिरला ने किस संदर्भ में किया?
बिरला ने 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को समाज की नैतिक शक्ति और लचीलेपन का स्रोत बताया। उनके अनुसार, यही भावना महामारी जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों में भारत को एकजुट रखती है और सामूहिक जिम्मेदारी की प्रेरणा देती है।
माहेश्वरी समाज का शिक्षा और स्वतंत्रता आंदोलन में क्या योगदान रहा है?
बिरला के अनुसार, माहेश्वरी समाज ने 1926 में ही शिक्षा को प्रगतिशील समाज की आधारशिला मानते हुए स्कूल और शिक्षण संस्थान स्थापित किए। इसके अलावा, समाज ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई और पूज्य भामाशाह की देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाया।
राष्ट्र निर्माण में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
ओम बिरला के अनुसार, सामाजिक संस्थाएँ परिश्रम, समर्पण और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से वह योगदान देती हैं जिसे आर्थिक मापदंडों से नहीं मापा जा सकता। ये संस्थाएँ सरकारी प्रयासों की पूरक बनकर राष्ट्रीय विकास को जमीनी स्तर पर मजबूत करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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