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हल्दीघाटी का युद्ध देशभक्ति का जीवंत प्रतीक: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का उदयपुर में संबोधन

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हल्दीघाटी का युद्ध देशभक्ति का जीवंत प्रतीक: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का उदयपुर में संबोधन

सारांश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उदयपुर में महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि देते हुए हल्दीघाटी के युद्ध को देशभक्ति का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने मेवाड़ के संघर्ष को आज के 'विकसित भारत' के लक्ष्य से जोड़ते हुए युवाओं से समर्पण और अनुशासन की अपील की।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 16 जून को उदयपुर में महाराणा प्रताप की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया।
बिरला ने हल्दीघाटी के युद्ध को देशभक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का जीवंत प्रतीक बताया।
महाराणा प्रताप ने भील समुदाय और आम जनता के साथ मिलकर सीमित संसाधनों में मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी।
महारानी पद्मिनी , महाराणा कुंभा और राणा पुंजा को भी देश-सेवा की प्रेरणा-स्रोत विभूतियाँ बताया गया।
बिरला ने युवाओं से 'विकसित भारत' निर्माण के लिए समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी अपनाने का आह्वान किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार, 16 जून को उदयपुर में महाराणा प्रताप की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि मेवाड़ की पवित्र भूमि ने संपूर्ण विश्व को साहस, वीरता और स्वाभिमान का संदेश दिया है। उन्होंने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित न मानते हुए इसे देशभक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का जीवंत प्रतीक बताया।

महाराणा प्रताप का जीवन: त्याग और स्वाभिमान का प्रतीक

बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप ने जानबूझकर राज-पाट के ऐशो-आराम को त्यागा और अपना संपूर्ण जीवन मेवाड़ की स्वतंत्रता, जनता की सेवा और लोगों के सम्मान की रक्षा में समर्पित कर दिया। उनके अनुसार, इस महान योद्धा का जीवन देशभक्ति और बलिदान का एक अनूठा उदाहरण है, जो आज की और आने वाली पीढ़ियों को सदैव दिशा दिखाता रहेगा।

भील समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े महाराणा

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इतिहास में मेवाड़ का संघर्ष अपने आप में अनूठा है। सीमित संसाधनों के बावजूद महाराणा प्रताप ने स्थानीय भील समुदाय और आम जनता के साथ मिलकर देश की पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए असाधारण साहस और दृढ़ विश्वास के साथ संघर्ष किया। यह एकता और जन-समर्थन की वह मिसाल है जो आज भी प्रासंगिक है।

मेवाड़ की महान विभूतियाँ: प्रेरणा के अक्षय स्रोत

इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा और राणा पुंजा जैसी महान विभूतियाँ देश-सेवा के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। उन्होंने रेखांकित किया कि हल्दीघाटी का युद्ध आज भी अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध की अमिट चेतना का प्रतीक है।

युवाओं से आह्वान: विकसित भारत के लिए समर्पण जरूरी

इतिहास की इस प्रेरणा को वर्तमान लक्ष्यों से जोड़ते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से आग्रह किया कि वे 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए उसी मेहनत और समर्पण के साथ कार्य करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे भारत प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है, देश के प्रति समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना सर्वाधिक आवश्यक है।

संस्कृति और तकनीक का समन्वय: बिरला का विकसित भारत का दृष्टिकोण

बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि एक सच्चा विकसित भारत वह होगा जहाँ प्राचीन सांस्कृतिक पहचान भी जीवित रहे और आधुनिक तकनीक भी फले-फूले। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मेवाड़ का यह प्रेरक इतिहास आने वाली पीढ़ियों को देश-सेवा और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने के लिए सदैव अभिप्रेरित करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजपूत गौरव और राष्ट्रवादी भावना को समकालीन नीतिगत एजेंडे से संबद्ध करती है। उल्लेखनीय है कि हल्दीघाटी युद्ध की व्याख्या को लेकर इतिहासकारों में मतभेद रहे हैं, और इस प्रकार के आयोजन अक्सर एक विशेष ऐतिहासिक दृष्टिकोण को स्थापित करने का माध्यम बनते हैं। युवाओं से की गई अपील तब तक प्रतीकात्मक रहेगी जब तक उसे ठोस नीतिगत ढाँचे का समर्थन न मिले।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हल्दीघाटी युद्ध के बारे में क्या कहा?
ओम बिरला ने कहा कि हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति और अन्याय के विरुद्ध लड़ाई का जीवंत प्रतीक बन चुका है। उन्होंने यह बात 16 जून को उदयपुर में महाराणा प्रताप स्मृति कार्यक्रम में कही।
महाराणा प्रताप के संघर्ष को बिरला ने किस रूप में याद किया?
बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप ने राज-पाट का ऐशो-आराम त्यागकर भील समुदाय और आम जनता के साथ मिलकर सीमित संसाधनों में मेवाड़ की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनके अनुसार यह एकता और जन-समर्थन की अनूठी मिसाल है।
बिरला ने मेवाड़ की किन महान विभूतियों का उल्लेख किया?
लोकसभा अध्यक्ष ने महाराणा प्रताप के साथ-साथ महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा और राणा पुंजा का नाम लेते हुए उन्हें देश-सेवा की प्रेरणा का अक्षय स्रोत बताया।
बिरला ने युवाओं से क्या अपील की?
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे मेवाड़ के इतिहास से प्रेरणा लेकर 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करें।
बिरला के अनुसार 'विकसित भारत' की परिकल्पना क्या है?
ओम बिरला के अनुसार एक सच्चा विकसित भारत वह होगा जहाँ प्राचीन सांस्कृतिक पहचान भी जीवित रहे और आधुनिक तकनीक भी फले-फूले — अर्थात् परंपरा और प्रगति का समन्वय।
राष्ट्र प्रेस
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