जमीन के आसमानी दाम किसानों को भूमिहीन बना रहे हैं: ओम प्रकाश धनखड़ की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने 21 अक्टूबर 2026 को झज्जर में किसान संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ज़मीनों के बढ़ते दाम किसानों को उनकी पैतृक भूमि से बेदखल होने की कगार पर पहुँचा रहे हैं। उनके अनुसार, जब ज़मीन की क़ीमत इतनी ऊँची हो जाए कि उस पर पारंपरिक खेती लाभकारी न रहे, तो किसान मजबूरी में ज़मीन बेचने लगता है।
मुख्य घटनाक्रम
धनखड़ ने कहा कि जब भी वे अपने इलाके के गाँवों में जाते हैं, तो नई दीवारें और बँटी हुई ज़मीनें देखकर मन व्यथित हो जाता है। उन्होंने कहा, 'मुझे अंदर से अच्छा नहीं लगता कि यह ज़मीन कहीं न कहीं हमारे किसान की चली गई।' यह ऐसे समय में आया है जब हरियाणा के झज्जर और आसपास के क्षेत्रों में भूमि की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में इस क्षेत्र के किसानों की लगभग 6,000 एकड़ ज़मीन छिन गई। धनखड़ ने कहा कि यह 'भूमिहीन बनाने की प्रक्रिया' रोहतक और झज्जर दोनों ज़िलों में हुई।
अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ
धनखड़ ने अपने मंत्री-काल का हवाला देते हुए बताया कि उनकी अगुवाई में किसानों को A2+FL फॉर्मूले के आधार पर फसलों के दाम दिलाए गए — यानी खेती का नगद खर्च और परिवार के श्रम का मूल्य दोनों जोड़कर मूल्य निर्धारण हुआ। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा पहले BJP के घोषणापत्र में शामिल हुआ और फिर नीति में तब्दील हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में 14 फसलों की सरकारी खरीद शुरू हुई, जो अब बढ़कर 24 फसलों तक पहुँच गई है। इसके अलावा फसल बीमा योजना के तहत किसानों को अब सालाना ₹1,200 करोड़ का मुआवजा मिल रहा है। कृषि क्षेत्र में 52 टर्मिनल बाज़ार शुरू किए गए, जिनसे सब्ज़ी किसानों को सीधे ₹284 करोड़ का मुआवजा मिल चुका है।
आम जनता और किसानों पर असर
धनखड़ ने कहा कि महँगी ज़मीन पर धान और गेहूँ की खेती अब आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रही। उनके अनुसार, इसका समाधान 'आय-सघन खेती' (income-intensive farming) में है — जिसमें पोल्ट्री, मत्स्य पालन (फिशिंग), फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) और फल उत्पादन शामिल हैं।
उन्होंने ज़ोर दिया कि इन फसलों के लिए प्रत्यक्ष विपणन (डायरेक्ट मार्केटिंग) ज़रूरी है, ताकि बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हो सके और किसान को उचित दाम मिल सके।
दिल्ली-NCR बाज़ार का अवसर
धनखड़ ने एक व्यावहारिक अवसर की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम का कृषि उत्पाद बाज़ार प्रतिदिन ₹300 से ₹400 करोड़ का है। उनका कहना था कि झज्जर और आसपास के किसान इस विशाल बाज़ार के बेहद नज़दीक हैं, इसलिए उनका यह नैतिक और व्यावसायिक — दोनों ही दायित्व बनता है कि वे शहरी उपभोक्ताओं को ताज़ा उत्पाद सीधे पहुँचाएँ।
'अगर हम इस बाज़ार पर अपना अधिकार जमा लेते हैं, तो हमारा किसान बहुत अच्छी आमदनी वाला हो जाएगा — वह भूमिहीन होने से बचेगा और हमारी ज़मीनें बचेंगी' — धनखड़ ने कहा।
क्या होगा आगे
धनखड़ की यह टिप्पणी हरियाणा में कृषि नीति पर जारी बहस को और तेज़ कर सकती है, ख़ासकर तब जब प्रदेश में भूमि अधिग्रहण और किसान आय को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है। गौरतलब है कि यह बयान किसी सरकारी नीति-घोषणा के रूप में नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ BJP नेता की व्यक्तिगत राय के तौर पर सामने आया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार 'आय-सघन खेती' को बढ़ावा देने के लिए कोई संस्थागत ढाँचा तैयार करती है या नहीं।