22 अक्टूबर 2026
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जमीन के आसमानी दाम किसानों को भूमिहीन बना रहे हैं: ओम प्रकाश धनखड़ की चेतावनी

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जमीन के आसमानी दाम किसानों को भूमिहीन बना रहे हैं: ओम प्रकाश धनखड़ की चेतावनी

सारांश

BJP नेता ओम प्रकाश धनखड़ ने झज्जर में खुलकर कहा — महँगी ज़मीन और घटती कृषि आय मिलकर किसानों को भूमिहीन बना रही है। समाधान पोल्ट्री, फ्लोरीकल्चर और दिल्ली-NCR के ₹400 करोड़ रोज़ाना के बाज़ार तक सीधी पहुँच में है।

मुख्य बातें

BJP नेता ओम प्रकाश धनखड़ ने 21 अक्टूबर 2026 को झज्जर में कहा कि ज़मीनों के ऊँचे दाम किसानों को भूमिहीन होने की कगार पर पहुँचा रहे हैं।
उनके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में इस क्षेत्र की 6,000 एकड़ ज़मीन किसानों के हाथ से निकल गई।
धनखड़ के कार्यकाल में A2+FL फॉर्मूले पर फसल मूल्य निर्धारण, फसल बीमा और 14 फसलों की सरकारी खरीद शुरू हुई — अब 24 फसलों तक विस्तारित।
किसानों को अब फसल बीमा से सालाना ₹1,200 करोड़ मुआवजा मिल रहा है; 52 टर्मिनल बाज़ारों से ₹284 करोड़ का लाभ मिल चुका है।
धनखड़ ने सुझाया कि पोल्ट्री, मत्स्य पालन, फ्लोरीकल्चर जैसी आय-सघन खेती और दिल्ली-NCR के ₹300-400 करोड़ रोज़ाना के बाज़ार तक सीधी पहुँच ही किसान को भूमिहीन होने से बचा सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने 21 अक्टूबर 2026 को झज्जर में किसान संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ज़मीनों के बढ़ते दाम किसानों को उनकी पैतृक भूमि से बेदखल होने की कगार पर पहुँचा रहे हैं। उनके अनुसार, जब ज़मीन की क़ीमत इतनी ऊँची हो जाए कि उस पर पारंपरिक खेती लाभकारी न रहे, तो किसान मजबूरी में ज़मीन बेचने लगता है।

मुख्य घटनाक्रम

धनखड़ ने कहा कि जब भी वे अपने इलाके के गाँवों में जाते हैं, तो नई दीवारें और बँटी हुई ज़मीनें देखकर मन व्यथित हो जाता है। उन्होंने कहा, 'मुझे अंदर से अच्छा नहीं लगता कि यह ज़मीन कहीं न कहीं हमारे किसान की चली गई।' यह ऐसे समय में आया है जब हरियाणा के झज्जर और आसपास के क्षेत्रों में भूमि की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में इस क्षेत्र के किसानों की लगभग 6,000 एकड़ ज़मीन छिन गई। धनखड़ ने कहा कि यह 'भूमिहीन बनाने की प्रक्रिया' रोहतक और झज्जर दोनों ज़िलों में हुई।

अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ

धनखड़ ने अपने मंत्री-काल का हवाला देते हुए बताया कि उनकी अगुवाई में किसानों को A2+FL फॉर्मूले के आधार पर फसलों के दाम दिलाए गए — यानी खेती का नगद खर्च और परिवार के श्रम का मूल्य दोनों जोड़कर मूल्य निर्धारण हुआ। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा पहले BJP के घोषणापत्र में शामिल हुआ और फिर नीति में तब्दील हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में 14 फसलों की सरकारी खरीद शुरू हुई, जो अब बढ़कर 24 फसलों तक पहुँच गई है। इसके अलावा फसल बीमा योजना के तहत किसानों को अब सालाना ₹1,200 करोड़ का मुआवजा मिल रहा है। कृषि क्षेत्र में 52 टर्मिनल बाज़ार शुरू किए गए, जिनसे सब्ज़ी किसानों को सीधे ₹284 करोड़ का मुआवजा मिल चुका है।

आम जनता और किसानों पर असर

धनखड़ ने कहा कि महँगी ज़मीन पर धान और गेहूँ की खेती अब आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रही। उनके अनुसार, इसका समाधान 'आय-सघन खेती' (income-intensive farming) में है — जिसमें पोल्ट्री, मत्स्य पालन (फिशिंग), फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) और फल उत्पादन शामिल हैं।

उन्होंने ज़ोर दिया कि इन फसलों के लिए प्रत्यक्ष विपणन (डायरेक्ट मार्केटिंग) ज़रूरी है, ताकि बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हो सके और किसान को उचित दाम मिल सके।

दिल्ली-NCR बाज़ार का अवसर

धनखड़ ने एक व्यावहारिक अवसर की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम का कृषि उत्पाद बाज़ार प्रतिदिन ₹300 से ₹400 करोड़ का है। उनका कहना था कि झज्जर और आसपास के किसान इस विशाल बाज़ार के बेहद नज़दीक हैं, इसलिए उनका यह नैतिक और व्यावसायिक — दोनों ही दायित्व बनता है कि वे शहरी उपभोक्ताओं को ताज़ा उत्पाद सीधे पहुँचाएँ।

'अगर हम इस बाज़ार पर अपना अधिकार जमा लेते हैं, तो हमारा किसान बहुत अच्छी आमदनी वाला हो जाएगा — वह भूमिहीन होने से बचेगा और हमारी ज़मीनें बचेंगी' — धनखड़ ने कहा।

क्या होगा आगे

धनखड़ की यह टिप्पणी हरियाणा में कृषि नीति पर जारी बहस को और तेज़ कर सकती है, ख़ासकर तब जब प्रदेश में भूमि अधिग्रहण और किसान आय को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है। गौरतलब है कि यह बयान किसी सरकारी नीति-घोषणा के रूप में नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ BJP नेता की व्यक्तिगत राय के तौर पर सामने आया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार 'आय-सघन खेती' को बढ़ावा देने के लिए कोई संस्थागत ढाँचा तैयार करती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विरोधाभास यह है कि वे जिस BJP सरकार का हिस्सा रहे हैं, उसी के दौर में हरियाणा के औद्योगिक और रियल एस्टेट विस्तार ने ज़मीनों के दाम सर्वाधिक ऊँचाई पर पहुँचाए। 'आय-सघन खेती' और 'डायरेक्ट मार्केटिंग' की बात नई नहीं है — यह एजेंडा वर्षों से नीति-दस्तावेज़ों में है, परंतु ज़मीन पर क्रियान्वयन के लिए संस्थागत ढाँचे का अभाव बना हुआ है। दिल्ली-NCR बाज़ार का ₹300-400 करोड़ रोज़ाना का अनुमान प्रेरणादायक है, लेकिन बिना कोल्ड-चेन, ग्रेडिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की मज़बूती के यह अवसर केवल बड़े किसानों तक सीमित रह सकता है। असली सवाल यह है कि क्या यह बयान किसी ठोस नीतिगत हस्तक्षेप की भूमिका है या चुनावी मौसम की पूर्व-संध्या पर भावनात्मक लामबंदी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश धनखड़ ने झज्जर में किसानों के भूमिहीन होने की क्या वजह बताई?
धनखड़ के अनुसार, ज़मीनों के अत्यधिक ऊँचे दामों की वजह से धान-गेहूँ जैसी पारंपरिक खेती उन पर आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह जाती, और किसान मजबूरी में अपनी ज़मीन बेच देता है। उन्होंने इसे 'भूमिहीन बनाने की प्रक्रिया' बताया।
धनखड़ के कार्यकाल में किसानों के लिए कौन-सी योजनाएँ शुरू हुईं?
धनखड़ ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में A2+FL फॉर्मूले पर फसल मूल्य निर्धारण, फसल बीमा योजना, 14 फसलों की सरकारी खरीद (अब 24 फसलें) और 52 टर्मिनल बाज़ार शुरू हुए। इनसे किसानों को सालाना ₹1,200 करोड़ बीमा मुआवजा और ₹284 करोड़ का टर्मिनल बाज़ार लाभ मिल चुका है।
A2+FL फॉर्मूला क्या है और इसका किसानों से क्या संबंध है?
A2+FL फॉर्मूले का अर्थ है खेती का नगद खर्च (A2) और परिवार के श्रम का मूल्य (FL) — इन दोनों को जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करना। यह किसानों की वास्तविक लागत के करीब मूल्य सुनिश्चित करने का तरीका है और लंबे समय से किसान संगठनों की माँग रही है।
धनखड़ ने किसानों की भूमिहीनता से बचाने का क्या उपाय सुझाया?
उन्होंने 'आय-सघन खेती' — यानी पोल्ट्री, मत्स्य पालन, फ्लोरीकल्चर और फल उत्पादन — और दिल्ली-NCR के ₹300-400 करोड़ रोज़ाना के बाज़ार तक सीधी (डायरेक्ट) मार्केटिंग को समाधान बताया। उनका कहना था कि झज्जर की भौगोलिक निकटता इस बाज़ार का लाभ उठाने का बड़ा अवसर है।
धनखड़ ने हुड्डा सरकार पर क्या आरोप लगाए?
धनखड़ ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में इस क्षेत्र के किसानों की लगभग 6,000 एकड़ ज़मीन चली गई, जिसने किसानों को भूमिहीन बनाने की नींव रखी। हालाँकि उन्होंने इस दावे का कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया।
राष्ट्र प्रेस
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