सुनील जाखड़ का भगवंत मान सरकार पर हमला: सहकारी बैंक नियमों से किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 31 अक्टूबर 2026 को जालंधर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर तीखा हमला बोला। जाखड़ का आरोप है कि मान सरकार ने सहकारी बैंकों के ऋण-संबंधी नियमों में बदलाव कर किसानों पर आर्थिक बोझ डाला है और कर्ज लेने की प्रक्रिया को जानबूझकर इतना जटिल बना दिया है कि किसान सहकारी बैंकों से ऋण ले ही न सकें।
ओटीएस योजना का वादा और विधानसभा की चुप्पी
जाखड़ के अनुसार, जब किसान यूनियनों ने कृषि ऋण सहित विभिन्न माँगों को लेकर चंडीगढ़ में धरना दिया था, तब पंजाब सरकार के कृषि मंत्री ने 7 सितंबर को लिखित आश्वासन दिया था कि सहकारी बैंकों के कृषि ऋण के लिए एकमुश्त निपटान योजना (OTS) विधानसभा में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा का पिछला सत्र भी समाप्त हो चुका है, लेकिन यह योजना अभी तक नहीं आई।
इससे पहले जून 2026 में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा बढ़ाने और विभिन्न फसलों के लिए ऋण देने की नीति की घोषणा की थी। जाखड़ का दावा है कि इन दावों के बावजूद सहकारी बैंकों में न एक भी नया किसान खाता खुला और न ही ऋण सीमा में कोई वृद्धि हुई।
हिस्सेदारी राशि दोगुनी, जमीन गिरवी अनिवार्य
जाखड़ ने विस्तार से बताया कि पहले सहकारी समितियों के माध्यम से ₹1 लाख के कर्ज के लिए किसान को ₹3,300 और ₹2 लाख के कर्ज के लिए ₹5,000 की हिस्सेदारी जमा करानी पड़ती थी। मान सरकार के नए नियमों के तहत यह राशि क्रमशः बढ़ाकर ₹6,000 और ₹9,000 कर दी गई है।
इसके अलावा, पहले यह हिस्सेदारी सहकारी समिति में जमा की जाती थी और किसान खाता बंद करते समय आसानी से वापस ले सकते थे। नए आदेशों के अनुसार यह राशि अब बैंक में जमा करानी होगी, जहाँ से इसे वापस पाना किसानों के लिए कठिन बताया जा रहा है।
जाखड़ ने एक और बड़े बदलाव का उल्लेख किया — पहले सहकारी बैंकों से कर्ज लेने के लिए जमीन गिरवी रखना अनिवार्य नहीं था, लेकिन अब नए नियम के तहत किसान को ऋण के लिए अपनी जमीन गिरवी रखनी होगी।
ब्याज छूट भी समाप्त, भूमि बंधक बैंक पाँच माह से बंद
जाखड़ के अनुसार, पहले यदि किसान के पास किसी अन्य बैंक का किसान क्रेडिट कार्ड भी था, तो उसे ब्याज में 4 प्रतिशत की छूट मिलती थी। नए नियमों में यह छूट समाप्त कर दी गई है, जिससे अब किसानों को जमीन गिरवी रखने के बावजूद महँगा ऋण लेना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब के 11 जिला भूमि बंधक बैंक पिछले पाँच महीनों से बंद पड़े हैं, और किसान व कर्मचारी दोनों इन बैंकों के बाहर धरने पर बैठे हैं। जाखड़ ने कहा कि सहकारिता विभाग मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री भगवंत मान की है।
मंडियों में कटौती, बुआई सीजन में कर्ज का संकट
जाखड़ ने कहा कि इस समय किसानों को गेहूँ की बुआई के लिए बीज, खाद और डीजल खरीदना है, लेकिन एक तरफ वे धान बेचने के लिए मंडियों में कटौती का शिकार हो रहे हैं और दूसरी तरफ सहकारी बैंकों से ऋण भी नहीं मिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बैंकों के पास धन ही नहीं छोड़ा है जिससे किसानों को ऋण दिया जा सके।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में किसान आंदोलनों की स्मृतियाँ अभी ताज़ा हैं और राज्य में कृषि संकट का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि का हवाला
जाखड़ ने राज्य सरकार की आलोचना के साथ-साथ केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र ने 9 करोड़ 34 लाख किसानों के खातों में नई किस्त के रूप में ₹18,500 करोड़ भेजे हैं। उनके अनुसार इस योजना के तहत मोदी सरकार अब तक किसानों को ₹4 लाख 60 हजार करोड़ दे चुकी है। गौरतलब है कि यह तुलना BJP नेता की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा है।
भगवंत मान सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पंजाब के किसानों का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार OTS योजना और सहकारी बैंकों के नियमों पर कब और क्या कदम उठाती है।