ओपी राजभर का अखिलेश पर हमला: '1990 कारसेवक फायरिंग के लिए मांगें माफी, राहुल को भी ले जाएं अयोध्या'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 8 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने अखिलेश से माँग की कि जब वे दिसंबर में अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन के लिए जाएं, तो अपने 'दिल्ली वाले बड़े भाई' — कांग्रेस नेता राहुल गांधी — को भी साथ लेकर चलें और 1990 में कारसेवकों पर हुई फायरिंग के लिए माफी माँगें।
एक्स पर क्या लिखा राजभर ने
राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'अखिलेशजी, अब जब आप रामलला का आशीर्वाद लेने अयोध्या जाने की बात कर रहे हैं, तो अपने दिल्ली वाले बड़े भाई को भी साथ ले जाइए। आखिर उनकी मां और उनकी पार्टी ही तो भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताती रही है।' उन्होंने राहुल गांधी को अयोध्या दिखाने और यह बताने का आग्रह किया कि 'भगवान श्रीराम कोई काल्पनिक पात्र नहीं हैं।'
राजभर ने अखिलेश यादव से यह भी कहा कि वे राहुल गांधी को बताएं कि वे अब 'कांग्रेस की ऐतिहासिक गलतियों का बोझ नहीं उठाएंगे' और उनसे 'रामलला के सामने सिर झुकाकर पूर्वजों की गलतियों का प्रायश्चित करने' का आह्वान किया।
1990 की फायरिंग पर माफी की माँग
एसबीएसपी प्रमुख ने अपनी पोस्ट में कहा, 'अखिलेश भैया, बात सिर्फ आपके बड़े भाई की नहीं है। जब आप रामलला के दर्शन करने जाएं, तो उन पूज्य कारसेवकों की आत्माओं से भी क्षमा मांगिए, जिन पर आपकी समाजवादी पार्टी की सरकार ने गोली चलवाई थी।' गौरतलब है कि 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान अयोध्या में कारसेवकों पर पुलिस फायरिंग की घटना हुई थी, जो आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश ने 'मुस्लिम वोटों के लिए खुद भी कई टोपियां पहनीं और मुसलमानों को भी बहुत सी राजनीतिक टोपियां पहनाईं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है।
अखिलेश के फैसले का स्वागत भी
तमाम तीखी टिप्पणियों के बावजूद राजभर ने अखिलेश यादव के राम मंदिर दर्शन के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'देर आए दुरुस्त आए। आपका रामलला के दर्शन का फैसला स्वागत योग्य है। जाइए और उनका आशीर्वाद लीजिए। शायद अयोध्या की पवित्र धरती पर पहुंचकर आपको कुछ ऐसे सच दिखाई दें, जो राजनीति से ऊपर हैं।' यह रवैया स्पष्ट करता है कि राजभर एक साथ राजनीतिक दबाव बनाने और सांस्कृतिक-धार्मिक आधार पर अखिलेश की यात्रा को अपने पाले में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
दीपोत्सव और अयोध्या आमंत्रण
राजभर ने अखिलेश यादव को अगले वर्ष अयोध्या के दीपोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा, 'लाखों दीप जलेंगे, अयोध्या फिर से जगमगाएगी और पूरी दुनिया रामलला की नगरी की भव्यता देखेगी।' राजभर ने सपा समर्थकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो यह 'भ्रम' फैला रहे हैं कि यह 'आखिरी दीपोत्सव' था, वे इस बात को 'मोटे अक्षरों में नोट कर लें।' उन्होंने अखिलेश को इस वर्ष के दीपोत्सव का वीडियो देखने और 'राम की पैड़ी पर उमड़े जनसैलाब की आस्था को महसूस करने' का आग्रह किया।
राजभर ने अंत में कहा, 'जिस दिन जनता को समझ लेंगे, उसी दिन राम को भी समझ जाएंगे।' — यह टिप्पणी 2027 के चुनावी समीकरणों को देखते हुए अत्यंत राजनीतिक महत्व रखती है।