ऑपरेशन मिलाप: दिल्ली पुलिस ने जुलाई में 43 नाबालिगों सहित 124 लापता-अपहृत लोगों को परिवार से मिलाया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिले ने ऑपरेशन मिलाप के तहत 1 से 31 जुलाई 2026 के बीच 43 नाबालिगों और 81 वयस्कों सहित कुल 124 लापता व अपहृत व्यक्तियों को सकुशल उनके परिजनों से मिलाया। इनमें से कई लोग 2020 से लेकर 2026 तक के विभिन्न वर्षों से लापता थे।
ऑपरेशन मिलाप: कैसे चला अभियान
पुलिस के अनुसार, किसी भी लापता या अपहरण की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने तत्काल तलाशी अभियान शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज की जाँच, ऑटो स्टैंड, ई-रिक्शा स्टैंड, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर लापता लोगों की तस्वीरें लगाना और बस चालकों, कंडक्टरों तथा वेंडरों से पूछताछ इस अभियान के प्रमुख हथियार रहे। स्थानीय मुखबिरों के नेटवर्क और आसपास के पुलिस स्टेशनों व अस्पतालों के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल ने भी अहम भूमिका निभाई।
थाना-वार बरामदगी का ब्यौरा
आरके पुरम पुलिस ने 1 से 18 वर्ष की आयु की 2 नाबालिग लड़कियों और 7 वयस्कों (4 पुरुष, 3 महिलाएँ) को बरामद किया। साउथ कैंपस पुलिस ने 1 नाबालिग लड़की और 1 पुरुष को परिजनों से मिलाया। वसंत कुंज नार्थ पुलिस ने दो अलग-अलग अभियानों में 5 नाबालिग लड़कियों और 17 वयस्कों को सुरक्षित बरामद किया।
कापसहेड़ा पुलिस ने 5 लड़के, 9 लड़कियाँ, 6 पुरुष और 8 महिलाओं को ढूंढा। पालम विलेज पुलिस ने 3 नाबालिग व 8 वयस्क, सागरपुर पुलिस ने 5 नाबालिग व 10 वयस्क, दिल्ली कैंट पुलिस ने 2 नाबालिग व 2 वयस्क, तथा सरोजिनी नगर पुलिस ने 2 पुरुष और 1 महिला को परिवार से मिलाया। इसके अतिरिक्त, एसजे एन्क्लेव पुलिस ने 2, किशनगढ़ पुलिस ने 5, मानव तस्करी विरोधी इकाई ने 10 और लापता व्यक्ति इकाई ने 13 लोगों को बरामद कर परिजनों तक पहुँचाया।
वर्षों पुराने मामलों में भी मिली सफलता
पुलिस ने बताया कि बरामद किए गए अनेक व्यक्ति वर्षों से लापता थे। अभियान के दौरान 2020 में लापता हुए 12 वयस्कों, 2021 से लापता 1 महिला, 2024 के मामलों से जुड़े 5 व्यक्तियों, 2025 से लापता 2 व्यक्तियों और 2026 में लापता हुए 104 व्यक्तियों — जिनमें 41 नाबालिग और 63 वयस्क शामिल हैं — का पता लगाया गया। यह तथ्य दर्शाता है कि पुरानी लापता रिपोर्टें भी इस अभियान के दायरे में रहीं।
आगे की राह
दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस के इस अभियान को दिल्ली पुलिस की संस्थागत क्षमता का उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक सूचना नेटवर्क और तकनीकी निगरानी के समन्वय से ऐसे अभियानों की सफलता दर बढ़ती है। आने वाले महीनों में इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।