ओएससीसी की 138वीं बैठक अहमदाबाद में: ड्रोन-यूएवी खतरों और ऑफशोर सुरक्षा पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की अध्यक्षता में 22 मई 2026 को अहमदाबाद में ऑफशोर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (ओएससीसी) की 138वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की समुद्री सुरक्षा को आधुनिक खतरों के अनुरूप सुदृढ़ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इस उच्चस्तरीय बैठक में तटरक्षक बल, नौसेना, वायुसेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो सहित एक दर्जन से अधिक केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक का एजेंडा और मुख्य विषय
बैठक का केंद्रीय उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में स्थित तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों, ऊर्जा प्लेटफॉर्म्स और अन्य महत्वपूर्ण ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा करना था। समिति ने समुद्री निगरानी क्षमता को और विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।
गौरतलब है कि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा अब केवल पारंपरिक नौसैनिक तरीकों से संभव नहीं रही — इसके लिए अत्याधुनिक निगरानी तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की अनिवार्यता बढ़ती जा रही है।
ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों से उभरते खतरे
बैठक में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के संदर्भ में ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) से उत्पन्न होने वाले संभावित सुरक्षा खतरों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ड्रोन हमलों के जरिए ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।
अधिकारियों ने बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ठोस रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।
अंडमान-निकोबार क्षेत्र की बढ़ती जिम्मेदारियाँ
अंडमान और निकोबार क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही ऑफशोर खोज एवं ऊर्जा गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा चुनौतियों का विशेष आकलन किया गया। इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता और रणनीतिक महत्व को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया गया।
भाग लेने वाली एजेंसियाँ
इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, डीजी शिपिंग, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, ऑयल एंड नेचुरल गैस आयोग (ओएनजीसी) तथा विभिन्न राज्यों की पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
एजेंसियों की साझा प्रतिबद्धता
बैठक के समापन पर सभी संबंधित एजेंसियों और हितधारकों ने भारत की ऑफशोर संपत्तियों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग और समन्वय को और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठक भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।