7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ओएससीसी की 138वीं बैठक अहमदाबाद में: ड्रोन-यूएवी खतरों और ऑफशोर सुरक्षा पर मंथन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ओएससीसी की 138वीं बैठक अहमदाबाद में: ड्रोन-यूएवी खतरों और ऑफशोर सुरक्षा पर मंथन

सारांश

अहमदाबाद में ओएससीसी की 138वीं बैठक में तटरक्षक, नौसेना, वायुसेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो एक मंच पर आए — ड्रोन-यूएवी खतरों और अंडमान-निकोबार में बढ़ती ऑफशोर गतिविधियों के बीच भारत की समुद्री ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा को नए सिरे से परखने के लिए।

मुख्य बातें

ओएससीसी की 138वीं बैठक 22 मई 2026 को अहमदाबाद में आयोजित हुई।
बैठक की अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की।
ड्रोन और यूएवी से उत्पन्न संभावित खतरों पर विशेष रणनीतिक चर्चा हुई।
अंडमान और निकोबार क्षेत्र में बढ़ती ऑफशोर खोज गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा चुनौतियों का आकलन किया गया।
तटरक्षक बल, नौसेना, वायुसेना, गृह मंत्रालय, ओएनजीसी सहित एक दर्जन से अधिक एजेंसियों ने भाग लिया।
सभी एजेंसियों ने ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए समन्वय मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की अध्यक्षता में 22 मई 2026 को अहमदाबाद में ऑफशोर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (ओएससीसी) की 138वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की समुद्री सुरक्षा को आधुनिक खतरों के अनुरूप सुदृढ़ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इस उच्चस्तरीय बैठक में तटरक्षक बल, नौसेना, वायुसेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो सहित एक दर्जन से अधिक केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का एजेंडा और मुख्य विषय

बैठक का केंद्रीय उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में स्थित तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों, ऊर्जा प्लेटफॉर्म्स और अन्य महत्वपूर्ण ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा करना था। समिति ने समुद्री निगरानी क्षमता को और विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।

गौरतलब है कि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा अब केवल पारंपरिक नौसैनिक तरीकों से संभव नहीं रही — इसके लिए अत्याधुनिक निगरानी तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की अनिवार्यता बढ़ती जा रही है।

ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों से उभरते खतरे

बैठक में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के संदर्भ में ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) से उत्पन्न होने वाले संभावित सुरक्षा खतरों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ड्रोन हमलों के जरिए ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।

अधिकारियों ने बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ठोस रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।

अंडमान-निकोबार क्षेत्र की बढ़ती जिम्मेदारियाँ

अंडमान और निकोबार क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही ऑफशोर खोज एवं ऊर्जा गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा चुनौतियों का विशेष आकलन किया गया। इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता और रणनीतिक महत्व को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया गया।

भाग लेने वाली एजेंसियाँ

इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, डीजी शिपिंग, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, ऑयल एंड नेचुरल गैस आयोग (ओएनजीसी) तथा विभिन्न राज्यों की पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

एजेंसियों की साझा प्रतिबद्धता

बैठक के समापन पर सभी संबंधित एजेंसियों और हितधारकों ने भारत की ऑफशोर संपत्तियों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग और समन्वय को और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठक भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह देखना होगा कि बैठक में हुई चर्चाएँ जमीनी क्षमता-निर्माण में कितनी तेजी से तब्दील होती हैं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओएससीसी की 138वीं बैठक कहाँ और कब हुई?
ऑफशोर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (ओएससीसी) की 138वीं बैठक 22 मई 2026 को अहमदाबाद में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की।
इस बैठक में ड्रोन और यूएवी खतरों पर चर्चा क्यों हुई?
बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियाँ ऊर्जा अवसंरचना के लिए नया खतरा बन चुकी हैं। बैठक में इन खतरों से निपटने की रणनीति तैयार करने और समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
अंडमान-निकोबार क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियाँ क्या हैं?
अंडमान और निकोबार क्षेत्र में ऑफशोर खोज और ऊर्जा गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे सुरक्षा जिम्मेदारियाँ भी बढ़ी हैं। इस क्षेत्र की भौगोलिक दूरी और रणनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए बैठक में विशेष सुरक्षा आकलन किया गया।
ओएससीसी बैठक में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हुईं?
बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, नौसेना, वायुसेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, डीजी शिपिंग, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, ओएनजीसी और विभिन्न राज्यों की पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इस बैठक का भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए क्या महत्व है?
यह बैठक भारत की ऑफशोर ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा को आधुनिक और उभरते खतरों के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में एक उच्चस्तरीय समन्वय प्रयास है। सभी एजेंसियों ने आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जो समुद्री सुरक्षा के बहु-एजेंसी ढाँचे को और प्रभावी बनाने की ओर संकेत करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले