बंगाल चुनाव: ओवैसी का हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन, कांग्रेस ने कहा भाजपा का सच्चा साथी
सारांश
Key Takeaways
- ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन मुस्लिम बहुल सीटों पर असर डाल सकता है।
- कांग्रेस ने ओवैसी को भाजपा का सच्चा साथी बताया है।
- बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे।
- मतगणना 4 मई को होगी।
- इस गठबंधन के राजनीतिक नतीजों पर सभी की नजरें हैं।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में यह बताया कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता हुमायूं कबीर की नई आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन में भाग लेगी। इस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने कहा, “धन्यवाद ओवैसी। आपने अपनी धर्मनिरपेक्षता का भेष हटा दिया है और अपने असली सांप्रदायिक चेहरे को उजागर कर दिया है।”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ओवैसी ने खुद को भाजपा की “बी-टीम” के रूप में साबित किया है, बल्कि वे उसके “सच्चे साथी” भी हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एआईएमआईएम-एजेयूपी गठबंधन की निंदा करते हुए कहा, “धन्यवाद, असदुद्दीन ओवैसी। आपने अपनी धर्मनिरपेक्षता का मुखौटा हटा दिया है और दुनिया को अपना असली सांप्रदायिक चेहरा दिखा दिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “आपने यह भी सिद्ध किया कि आप न केवल भाजपा की बी-टीम हैं, बल्कि उसके सच्चे साथी भी हैं। लोग हुमायूं कबीर पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने पार्टी बनाने के लिए धन लिया है। क्या आपको दिल्ली से फंड मिल रहा है? जनता सब समझती है और वह आपको पश्चिम बंगाल और हैदराबाद के चुनावों में जवाब देगी।”
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इस मुद्दे पर कहा, “जहां भी धर्मनिरपेक्ष वोटों का विभाजन होता है, उसका लाभ अंततः भाजपा को ही मिलता है। ओवैसी इसके लिए जाने जाते हैं और उन पर अक्सर ऐसे आरोप लगते हैं। वह निश्चित रूप से ऐसी रणनीतियों का पालन करते हैं जिससे वोटों का विभाजन हो सके। इसलिए हम कहते हैं कि वह भाजपा की बी-टीम के रूप में कार्य करते हैं।”
झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडे ने भी कहा, “मुझे लगता है कि अब ओवैसी को कुछ राज्यों में सफलता मिली है। उन्होंने भाजपा को मजबूत किया है और धर्मनिरपेक्ष दलों को कमजोर किया है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है। मुझे लगता है कि बंगाल की राजनीति में वह कहीं फिट नहीं बैठेंगे।”
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी कहा, “चाहे वह हुमायूं कबीर हों या ओवैसी, सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में जो जहर बोया है, उसने ऐसे कई किरदार पैदा किए हैं जो उसी जहर को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। जब एक स्वाभाविक विकल्प मौजूद है, तो ऐसे तत्वों का कोई महत्व नहीं रहेगा और इन चुनावों में उनका अस्तित्व मायने नहीं रखेगा।”
इस बीच, बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह ओवैसी की पार्टी है और यदि वह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह उनका स्वतंत्र निर्णय है। पार्टी अपने संगठन का विस्तार करना चाहती है और कई क्षेत्रों में उसकी उपस्थिति है। ओवैसी ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है और एक लोकतांत्रिक पार्टी होने के नाते उसके नेता उसी अनुरूप कार्य करते हैं।”
294 सदस्यीय बंगाल विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा और मतगणना 4 मई को होगी।
एआईएमआईएम-एजेयूपी गठबंधन आगामी चुनावों में मुस्लिम बहुल सीटों पर वोट शेयर को प्रभावित कर सकता है। इन चुनावों को मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है।