14 वर्षों तक भारत में फर्जी पहचान से रह रहा पाकिस्तानी आतंकी, पूर्व डीजीपी ने उठाए गंभीर सवाल
सारांश
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जम्मू, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में फर्जी पहचान का सहारा लेते हुए 14 वर्षों से अधिक समय तक रह रहे लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी के मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र तैयार किए हैं। उन्होंने यह सवाल किया है कि क्या भारत में फर्जी पहचान पत्र बनाना इतना सरल है?
एसपी वैद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि आरोपी का नाम उमर हैरिस है, जो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है और उसके खिलाफ वहाँ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। यहां तक कि उसे जेल भी जाना पड़ा है। पाकिस्तान की आईएसआई जैसी एजेंसियाँ अक्सर ऐसे लोगों को कट्टरपंथी बनाकर लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों में भर्ती करती हैं। उसे प्रशिक्षण दिया गया और भारत में घुसपैठ कराई गई, जहाँ उसने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी अपनी गतिविधियाँ संचालित कीं।
उन्होंने बताया कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि उसने राजस्थान में 'सज्जाद' नाम से एक फर्जी पहचान बनाई और शादी के प्रमाण पत्र सहित कई जाली दस्तावेज प्राप्त किए। सवाल यह है कि क्या भारत में फर्जी पहचान पत्र बनाना इतना आसान है? क्या भारत का पासपोर्ट, मैरिज सर्टिफिकेट, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड—इन सबका निर्माण इतना सरल है?
उन्होंने यह भी सवाल किया कि आरोपी सऊदी अरब कैसे गया? इतनी सक्षम इमिग्रेशन व्यवस्था होने के बावजूद वह कैसे बाहर निकल गया? एनआईए को इसकी जांच करनी चाहिए कि उसने फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज कैसे प्राप्त किए और इसमें कौन लोग शामिल हैं? यदि सब कुछ जाली था तो वह देश से बाहर कैसे जा सका?
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कुछ मामले सामने आते हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि ऐसे कितने लोग हैं? कितनी जानकारियाँ लीक हो रही हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए। कमियों को उजागर कर उन पर कार्यवाही की जानी चाहिए, क्योंकि यह देश की सुरक्षा का मामला है। ऐसे मामले देश के लिए खतरा हैं, क्योंकि ऐसे लोग भारतीय नागरिक के रूप में कहीं भी जा सकते हैं।
श्रीनगर में दो अमेरिकी पर्यटकों को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़े जाने पर एसपी वैद ने कहा कि यह भी देश के लिए खतरा हो सकता है। यह अच्छी बात है कि हमारी एजेंसियों ने उन्हें पकड़ लिया है। इसकी जाँच होनी चाहिए कि वे इसे कैसे लेकर आए और किसने अनुमति दी।
ईरान-अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत रद्द होने पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा नहीं है, इस कारण इस प्रकार की बातचीत के विफल होने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत की जिम्मेदारी पाकिस्तान को दी है, जिससे सफलता की संभावना कम है।